नीड़ में नीड़ का निर्माण

मधुर कुलश्रेष्ठ

नीड़ में नीड़ का निर्माण
(15)
पाठक संख्या − 4545
पढ़िए
लाइब्रेरी में जोड़े

सारांश

ऑफिस से लौटा तो बेटी ने चहकते हुए कहा, ‘‘पापा दो लोग अपना प्लॉट देखने आए थे।’’ बेटे ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलाई, ‘‘हाँ पापा, दो लोग अपना प्लॉट देखने आए थे।’’ में चौंक गया, प्लॉट! कौन सा प्लॉट? मन शंका-कुशंकाओ में भटकने लगा। मेरा तो कोई प्लॉट ही नहीं है। ‘‘हाँ पापा, फुदक-फुदक कर देखा दो चिड़ियों ने। अपने पोर्च में फैली मनीप्लांट के बीच बनी तिकोनी जगह पर बैठ-बैठकर मजबूती देखी। सुरक्षित जगह देखी। शायद दोनां को पसंद आ गई हमारे पोर्च की जगह। दोनों ने खुश होते हुए कहा।’’
कुसुम
सुंदर रचना जो मानवीय द्वंद और श्रेष्ठता को दर्शाती है। मानव स्वयम्भू ही रहना चाहता है लेकिन उसके दम्भ को पशु पक्षी भी समझ लेते है।सुंदर चित्रण
Archana
Bhaut sundar rachna
Sandeep
Thanks.... For being Human
Namita
सजीव चितरण
Sudarshan
मानव मन की सुन्दर अभिव्यक्ति ।
Ajit
आनंद दायी
shilpi
👌👌👌👌
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
+91 8604623871
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.