मलाल

डॉ. बीना राघव

मलाल
(4)
पाठक संख्या − 409
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सारांश

वह किरण थी. . .प्रातः उगते सूरज की मनभावन किरण की तरह...। शांत, सौम्य चेहरे की स्निग्धता और उसके घने लंबे केश किसी देव कन्या का अहसास कराते थे। किरण को इस घर में ब्याह के आए अभी दो वर्ष ही हुए थे किंतु .................. पढ़िए औरत की वेदना की एक और सच्ची कहानी जो हमें सोचने पर विवश कर देती है कि हम भले ही दूसरे ग्रहों पर घर बना लें पर कुछ लोगों की सोच वही दकियानूसी रहेगी .वे औरत का शोषण करने से बाज़ नहीं आयेंगे ......
Seema
लोग कहते हैं समय बदल गया पर आज भी ग्रामीण इलाकों की वहीं दुर्दशा है
Aaliya Khan
very nice
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Surekha Sharma
bahut khoob
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