ऋण – मुक्ति

डॉ.आरती स्मित

ऋण – मुक्ति
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DKSINGH
कहानी पूर्ण रूप से अपने शीर्षक पर आधारित है परंतु वास्तविक समाज में बहू और पुत्री दोनों ही स्त्रियां हैं जो बहू पुत्री के रूप में नायिका बनती है वही न जाने क्यों बहू के रूप में खलनायिका बन जाती है...
Rajesh Varshney
मर्मस्पर्शी कहानी
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शानदार
Om Sapra
Arti ji... kahani rin mukti kafi sahaj dhang se likhi ek sashakt v bhavna pradhaan kahani hai...... badhai..... om sapra . Sahitya sachiv. Mitra sangam patrika. Dr mukherji nagar. Delhi-9818 180 932
Bharat Baranwal
आज के समाज का दर्पण है यह कहानी।
Prince Jain
बहुत बढ़िया ऐसी कहानी जो हमेशा दिल को छु जाये
Abhishek Sinha
अद्भुत कहानी। कहना तो बहुत कुछ चाहता हूँ पर जैसे शब्द हीं नहीं मिल रहे।
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