ठौर

दिव्या शुक्ला

ठौर
(108)
पाठक संख्या − 4261
पढ़िए
धर्मेंद्र विश्वकर्मा
कहानी के माध्यम से आपने आज की हकीकत बहुत बेहतरीन तरीके से बताया है ..... आखिर इंसान की मानसिकता इतनी क्यों बदल रही है , लोग ये क्यों भूल रहे हैं........ कि कल उनको भी तो बूढ़े होना है...?
Raj Gupta
अंतर्मन को छू गयी यह कहानी । कहने को एक कहानी है, पर हमाने आधुनिक समाज का घिनौना सच है।
Sandhya Mathur
हकीकत से
Prakarti
aaj insaan bhavna rahit ho gya h.
कल्पना भट्ट
बेहद सुन्दर ।
rashmi
मार्मिक ......
yogesh manral
very nice and hearth touching
Adv Singh
दिल को छूने वाली कहानी
akhilesh singh
उत्कृष्ट कहानी
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
+91 8604623871
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.