सारांश

” अभी तो मेरे हाथों की मेहँदी भी नहीं उतरी और आप ….” - शारदा ने अपने आंसू पोंछते हुए डबडबाई आवाज़ में अपने पति राधेश्याम से पूछा ,लेकिन राधेश्याम ने उसे बात पूरी नहीं करने दी और बीच में ही उसे टोकते हुए बोला – ” तुम सारी की सारी औरतें ही एक जैसी होती हो , मैं तुम्हारी मेहँदी को देखता रहूँ या कुछ कमाई करूं ? ” ” कमाई तो यहाँ भी हो सकती है |” ” यहाँ क्या खाक कमाई होती है , खेत में फसल तो होती नहीं , कर्ज़ दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है, अगर कुछ दिन और खेती से कमाई की उम्मीद में बैठे रहे तो ये रही – सही जमीन भी बिक जाएगी | ”
Lipsa
एक मध्यम वर्गीय परिवार की परिस्थिति का सचोट वर्णन..... अच्छी कहानि.....
Shashi Kala
समस्या का समाधान करते तो अच्छा था
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Manisha
bhut hi sundar khani
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Vivek
bahut hi badiya
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ميرا كريشان
n
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Savitri
jaayda gents log aisy hi hoty h
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Ambrish
एक अधूरी कहानी
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Kanchan
अच्छी कहानी
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Sudesh
good
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अर्चना
बहुत ही सार्थक कहानी...स्त्री मन की व्यथा का सटीक वर्णन
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