कवच

दिलबागसिंह विर्क

कवच
(22)
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सारांश

पाँचों पांडव और द्रोपदी अपने महल में बैठे चौसर खेल रहे हैं | सुधीरकुमार कैमरामैन रंजन के साथ वहाँ पहुँचता है | युधिष्ठर से मिलने का समय लिया गया था, अत: उन्हें सेविकाएँ अंदर ले आती हैं | दोनों सम्राट युधिष्ठर, साम्राज्ञी द्रौपदी और अन्य पांडवों को प्रणाम करते हैं | युधिष्ठर पूछते हैं – कहिए पत्रकार महोदय, कैसे आना हुआ |
Jyoti Sharma
हा हा हा बहोत सुन्दर
Ranjeet Kumar
Best story reading App
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मनमोहन भाटिया
उत्तम
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शशि कांत सिंह
बहुत ही अच्छी कहानी है, सोच को एक नयी दिशा प्रदान करती है I
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Rachna Bansal
very good work..
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संध्या तिवारी
bahut shandar kahani .Behatreen prastuti karan.
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TEJRAJ GEHLOTH
बहुत ही बढियाँ कहानी और एक नया angel .. गजब का satire .. superb भाई
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Kalu Verma
सर आप उस आदमी के पास भी चले जाते जो इस कथा का सूत्रधार था यानि कृष्ण।उनकी भी राय ले ली जाती तो ठीक रहता।प्रयास के लिए सलाम
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बाबू अनजाना
बहुत सुन्दर रचना
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