सारांश

पाँचों पांडव और द्रोपदी अपने महल में बैठे चौसर खेल रहे हैं | सुधीरकुमार कैमरामैन रंजन के साथ वहाँ पहुँचता है | युधिष्ठर से मिलने का समय लिया गया था, अत: उन्हें सेविकाएँ अंदर ले आती हैं | दोनों सम्राट युधिष्ठर, साम्राज्ञी द्रौपदी और अन्य पांडवों को प्रणाम करते हैं | युधिष्ठर पूछते हैं – कहिए पत्रकार महोदय, कैसे आना हुआ |
शशि कांत
बहुत ही अच्छी कहानी है, सोच को एक नयी दिशा प्रदान करती है I
Rachna
very good work..
संध्या
bahut shandar kahani .Behatreen prastuti karan.
TEJRAJ
बहुत ही बढियाँ कहानी और एक नया angel .. गजब का satire .. superb भाई
Kalu
सर आप उस आदमी के पास भी चले जाते जो इस कथा का सूत्रधार था यानि कृष्ण।उनकी भी राय ले ली जाती तो ठीक रहता।प्रयास के लिए सलाम
अनजाना
बहुत सुन्दर रचना
वर्मन
शानदार, जबरदस्त, जिन्दाबाद, लाजवाब
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Surekha
सुन्दर प्रसंग व प्रस्तुति दिलबाग जी
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