च्युइंग गम

दिलबागसिंह विर्क

च्युइंग गम
(51)
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सारांश

राकेश को च्युइंग गम चबाने की आदत है | आदत क्या, लत ही कह सकते हैं | वह जब भी अकेला बैठा होता, उसके हाथ जेब में चले जाते और झट से च्युइंग गम उसके मुँह में होती | आज भी यूनिवर्सिटी के कॉफ़ी हाउस में बैठा वह च्युइंग गम चबा रहा है | जिस रफ्तार से वह च्युइंग गम चबा रहा है, उसी रफ्तार से वह मेहर के बारे में सोच रहा है | वह अंदाज़ लगा रहा है कि मेहर आज अकेली आएगी या रीमा के साथ | अक्सर मेहर और रीमा साथ-साथ ही आती हैं | आज उसे लग रहा है कि मेहर अकेले आएगी | उसने रात चैटिंग करते समय इसका इशारा उसको किया था और उसने जिस प्रकार की प्रतिक्रिया दी थी, उससे उसे लगा था कि वह न सिर्फ़ उसका इशारा समझ गई है, बल्कि उससे सहमत भी है | राकेश भी इसीलिए आज अकेला आया है | वैसे वह तो पहले भी कई बार अकेला आया है, लेकिन आज उसके अकेला आने के पीछे खास मकसद है |
Rama Mishra
kuch samajh nahi aaya
rajat
samajh nei aaiye
प्रदीप दरक
बिना निष्कर्ष की कहानी
Mahesh Mishra
samajh se ooper
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Iconoclast Ashish
lgta hai apni kahani utardi.aadhi adhuri si
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manish kumar
bakwaas
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madhuri
risto ki samjh agar insan.ko ho jaye to wo risto ki kadr karega n ki unhe mouka samjhega
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anand pateriya
राकेश अव्वल दर्जे का बेवकूफ है। आजकल की दौड़भाग की जिनदगी मे उसे च्यूइंगम को निचाोड़ कर पी जाना चाहिए था केते
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