क्या मैं बैल हूँ ?

ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा

क्या मैं बैल हूँ ?
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सारांश

यह एक हास्य -ब्यङ्ग्य की रचना है, जिसमें ब्यङ्ग्य, हास्य के साथ इस तरह घुला मिला है कि दोनों जैसे एकरस हो गए हों। आप रचना को पढ़कर खुद इसका आनंद लें और टिप्पणी लिखना न भूलें।
धर्मेंद्र
ज़िम्मेदारीयों ने इंसान के साथ कैसा खेला खेल.. कभी गधा बनाया, कभी घोड़ा तो कभी बैल.....
दीप्ति
speechless Sir ....👌👌
Dr.Hemant
जबरदस्त
vishal
mishra ji gazab
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मुकुल
अच्छी रचना है सर. पढ़ कर आन्नद आया.
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मनोज
bahut khub Mishra ji
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Sanjiv Kumar
बेहतरीन
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Lalita
Bahut sundar rachana. Ismen hasya men byangya istarah gumfit hai, jaise aam ke falon men ras. Sarthak aur sateek abhibyakti se paripurn ! Hardik sadhuwaad!
ऋषभ
कमाल का शब्द संयोजन और अभिव्यक्ति सर#...हास्य और विडम्बना एक साथ। एक सार्थक रचना।
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