कौतुक-कथा

अवधेश प्रीत

कौतुक-कथा
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मधुलिका
अच्छा प्रयास आज के हालात पर
भूपेन्द्र
शब्दों का ऐसा तालमेल बेहद लाजवाब
Suhel
shabdo ka jo tarkik chunaav aapne kiya hai... lajwaab... mai khud nahi soch paa raha hu.. ki aap itna gahra kis tarah se soch sakte hai... " jinke paas apni smriti nahi hoti un komo k pass koi itihaas nahi hota..." best line ...!!!
Iconoclast
vyangya aur rochakta ek sath
बाबू
आधुनिकता के नाम पर प्रकृति के विनाश का परिणाम यही होने वाला है बहुत प्रासंगिक रचना अति सुन्दर
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