फूल खिलना बाकी है

अतुल कुमार पाण्डेय

फूल खिलना बाकी है
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सारांश

ग्यारह जनवरी थी जब मैं अमन से पहली बार मिली थी. बहुत सौम्य और सुन्दर चेहरा था उसका. दुनिया के छल-कपट से बहुत दूर था उसका निर्मल मन. बिलकुल वैसा ही था जैसा मेरे सपनों का राजकुमार था. मैं तो दीदी से मिलने गई थी, क्या पता था कि अपना दिल किसी के पास छोड़कर चली आऊंगी. और क्या पता था कि मेरा दिल लिए वह संसार से विदा हो जायेगा.
Alok
Rula dia.....pyar bahut dukh deta h
Sapana
woww....very heart touching story
Lipsa
badhiya story👌
Sandhya
Behd khubsurat 😊😊
सखी
दुखद अंत..
Savitri
ati utam but dukhd end
sudha
nice but sad story
Ranjeet
very emotional story.. very nice
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