मुहब्बत मेरे अपनों की

अनिल कुमार सिंह

मुहब्बत मेरे अपनों की
(6)
पाठक संख्या − 37
पढ़िए
लाइब्रेरी में जोड़े
Tej
Tej
bahut hi sundar .
रिप्लाय
Vishal
बेहद बेहतरीन है कविता।
Desh Deepak
निःसंदेह आपकी हर रचना की तरह ये भी ....भावनाओ को शब्द देती... अंततः उदास कर जाती.... ऐसे सच जो उदास कर जाए ...हर लम्हा... हर वक़्त उन्ही की बात.... शायद मैं कायर हूँ इसीलिए ऐसे सच का सामना करने से परहेज़ करता हूँ....सो हो सके तो कुछ मीठे सच के स्वाद को चखाती हुई भी लिखिए भाई...मेरे लिए ही ....😃😃
रिप्लाय
Vinita
आपकी हर रचना बहुत अच्छी होती है। बधाई अनिल जी।
रिप्लाय
Kanishk
Behad khoobsorat hmesha ki tareh, aakhri pankti to dil ko chu gai. God bless you sir.
Umesh
भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति (Y)
रिप्लाय
hindi@pratilipi.com
+91 8604623871
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.