साम्प्रदायिक लव

आकाश गौरव

साम्प्रदायिक लव
(10)
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सारांश

गर इश्क़ आंखों ही आंख में पले और एक रात में ही पल के जवां हो जाए तो क्या होगा ?
Gaurav Sharma
भाईसाहब मैं भी स्वयंसेवक हु।और आपने ये बात कहनी में लिखने की कोशिस की बहुत अच्छा लगा।कहानी भी खूबसूरत है।
arsalan khan
is story ka nam samperdayik soch hona chahiye tha
धनंजय कुमार
श्रृंगार रस का वर्णन बहुत अच्छा किया है लेकिन अंत मे जो सोच दिखाई है वो हीन मानसिकता को दर्शाया है। Dear Gaurav try to read my new story "Secular Love"
shri
Bi
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