देखो देखो चमईया हमार सुतूही

सोनी पाण्डेय

देखो देखो चमईया हमार सुतूही
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उत्प्रेक्षा
लाजवाब कल्पनाशीलता
brijesh
उत्तम कथा। रीति रिवाज के पालन और आधुनिक सोच के बीच उहापोह से भरी कथा दिल को छू गयी।
धनंजय
बहुत सुंदर कहानी है सोनी जी ..समाज का बहुत बड़ा ढ़ोंग आपने उजागिर किया हैऔर ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये सच है वैसे भी हमारे उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकाचार की बहुत मान्यता भी है।
डॉ.रमाकांत
Ek dam satik likha hai pade likhe pRivaro me bhi parampra nibhana padta hai. Na mano to amma log Jan nikal leti hai...
अभिराज
बेहद शानदार, शुरआत मैं थोड़ा धीमी थी बिच मैं जो संवाद डाले हैं वो ही आधार हैं बहुत ही बढ़िया अंत इसका .......👌👌👌
शशांक
Pragatisheel.Deshaj bhasha ka sundar prayog. Ant me kuch behtar ki ummeed thee.
Deepak
काफी प्रभावशाली लिखा ह अपने ग्रामीण वातावरण के बारे में ....एक पति और पत्नी का इतना तर्कपूर्ण बहस पढ़ के बस अपने विचार बदल gye
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