किसी ने मुझ से कहा था की उज्जैन के लोग उज्जैन को कैसे पहचानते है ?

मैंने कहा खुसबू से |पूरा उज्जैन अपनी एक अलग ही खुसबू से महकता है | बाबा महाकाल के दरबार में हुई प्रार्थना की खुसबू ,क्षिप्रा की पवित्रता की खुसबू और विध्यास्थाली की ज्ञान की खुसबू,और तो और प्रेम की खुसबू से | उज्जैन तो बस एक खुसबू ही है| बड़े बड़े महाकवि लेखक शायर और गलियों के आवारा मजनू आशिक सब बनारस की गलियों में ठहरे इश्क को बयान करने में इतने मशगूल हो गये की किसी का उज्जैन की तरफ ध्यान ही न गया |तो मैंने भी सोच लिए की इस धार्मिक नगरी के अन्दर बसे प्यार को में खुद ही पेश कर देता हु|

अवंतिका नगरी जितना दिन में होती है उतना ही रात में भी यह हर जगह नहीं होता ऐसा |यह दिन में कर्म के रंग मिलेंगे तोह रात और सुबह को धरम तैरता हुआ | भस्मारती के समय जब राख बाबा महाकाल को छूती है तोह ऐसा लगता है की बस अभी ही शिव जी धरती पर आयेंगे और हमारे सर पर हाथ रख देंगे | ढेरो दीपकों से सजी थाल से क्षिप्रा की आरती की जाती है वो दीपक तारे बन कर अपनी प्रतिछाया में चमकते रहते है उसका अपना अलग ही सौंदर्य है उसकी माधुर्यता को शब्दों में दर्शाना तोह मेरे बस की बात नहीं है | इतना पवित्र जल जिसमे उस अमृत की बूंदे हो जिससे पाने के लिए देवता और असुरों में संघर्ष हुए हो तो वोह क्षिप्रा मैया का महत्व कुछ ऊँचा ही कर देते है |

खैर यह बातें छोडिये | आज श्रावण पूर्णिमा है |मतलब शाही स्नान का दिन| कहा जाता है की इस दिन स्नान करने से सारे पापों से छुट्टी मिल जाती है यह कितना सही है यह में तोह नहीं बता सकता पर हाँ इतना कह सकता हु की ही दिन शहर की छठा ही निराली होती है |शाम के करीब ४ बज रहे थे |राम घाट में शाही स्नान चल रहा था |महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था की गयी थी और पुरुषों के लिए अलग |

Barricades लगाये गए थे सीडियों पे भी और रस्शी से हिस्सें भी बाटें गए थे | कोई स्नान के बाद पूजा भी करवा रहा था तोह कोई बस स्नान करने ही आया था |छोटे छोटे बच्चे इस स्नान के महत्व को तो नहीं जानते पर उनके लिए तोह नदी में नहाना मज़े की बात है|और क्या पता उनकी भक्ति ही भगवन को सबसे जायदा प्रिय हो |एक और बात के लिए यह कहा जा सकता है जैसे किसी ने आज के दिन व्रत रखा है तोह कोई आने से पहले अपना पेट पूरा भर के आया है|लोगों की इतनी भीड़ की कोई पहचान में ही न आये |साधुओं और भक्तों में भी कोई अंतर ही ना रह जाता है| कई बार तोह ऐसा लगता है की यह लोग ही शिप्रा मैया का हिस्सा हो किसी की कोई अलग पहचान ही नहीं बचती है |

एक लड़का करीब २५ साल का शक्ल से ही झलकता है की बहुत पढने वाला है कद सामान्य बहुत गोरा नहीं था पर देखने में अच्छा दिखता था छोटी छोटी आंखे और हसमुख चेहरा और बाल वैसे तोह स्टाइलिस्ट तरीके से कटे हुए थे पर इस वक़्त तोह पानी से भीगे थे |साल का ठन्डे शिप्रा के पानी में से कई साधुओं और भक्तों के बीच में से निकल के आता है|वैसे वो ऐसा लगता तोह नहीं की धोती पहनता हो पर फिर भी उसने धोती पहन राखी थी उसके ऊपर एक बड़ा सा सफ़ेद कुरता| पूरा भीगा हुआ हाथ जोड़कर नदी से बहार आता है | अपना कुरता उतरता है और बैग लेकर पास में बने अस्थ्याई chaiन्गिंग room में जाता है और शर्ट और जींस पहन लेता है|

"क्या कर रहा था राज कितनी देर लगा दी तूने | कहीं शिप्रा में डूबने का इरादा तोह नहीं था तेरा |

ध्यान रखा कर अभी तक तो तेरी शादी भी नहीं हुई है यदि हाथ पाव टूट गए और नहीं करनी किसी लड़की को तुझसे शादी |"संभव ने मज़ाक में कहा |

राज बस हंस कर रह गया| उसने अपना चश्मा लगाया और आगे बढ़ गया| पीछे से संभव चिल्ला रहा था |

पर राज तब तक सीडियों के ऊपर पहुच चूका था|

राज उज्जैन का नहीं था पर UEC में computer science से engineering करने के बाद वोह यही का कहलाया जा सकता है| पुणे में ३ साल से TCS में नौकरी कर रहा था| कॉलेज की reunion पार्टी में आया तो सोचा की चलो कुछ पुण्य कमा लेते है और इसलिए स्नान में आया था| उसका जायदा इन सब चीज़ों में मानना तो न था पर फिर भी घर वाले धार्मिक होने के कारन भगवान् में विश्वास बहुत करता था |

राज और संभव दोनों सीडियों पे बैठ गए लोगों के मन की श्रद्धा और विशवास को पवित्रता से मिलते देखना एक अलग ही अनुभव होता है |यह वही लोग होते हैं जिनसे हम रोज़ मिलते है जिनके अन्दर आचाई होती है और बुराई भी पर यहाँ सिर्फ उनका वोह पहलु रह जाता है जो उन्हें आछे और बुरे दोनों से अलग कर उन्हें बस इंसान बना देता है| दूर गहरे पानी में खड़ा एक आदमी जो अपनी अंजुली में जल लेकर अपने ऊपर डाल रहा था ऐसा लग रहा था की जैसे बस यदि अंत हो भी तो इससे खुबसूरत अंत नहीं हो सकता किसी चीज का|

“चल यार वो मंदिर के दर्शन करते हैं |”राज अपने ख्यालों से बहार आ गया था | वो खड़ा हुआ पर संभव अभी भी इस सुकून को और महसूस करना चाहता था |

“तू चल में कुछ देर और यहाँ रखना चाहता हु थोड़ी देर में आता हु|”

शाम ढालना सुरु हो चुकी थी कृतिम साधनों से रौशनी फैलना चालू हो चूका था |कितना ख़ूबसूरत होते है न कुछ पल भी अनजाने में ही जिन्हें हम महसूस करना भूल जाते है |

राज चल दिया|वैसे तो यहाँ कई मंदिर थे राज एक एक करके सबके दर्शन करने लगा और फिर कृष्णा जी के मंदिर के पास गया |

एक छोटा सा मंदिर था उसके वहां एक पुजारी था वो आरती करने लगा और राज हाथ जोड़कर अपनी आँखे बंद कर ली और वासुदेव की स्तुति में मंत्र बोलने लगा |तभी एक लड़की पूजा की थाली लिए वहां आई|गुलाबी रंग का सलवार पहने थी और बाल भीगे हुए थे ऐसा लग रहा था की सीधे स्नान करके ही आई थी शायद | जल रहे दीपकों की रौशनी से शायद उसकी ख़ूबसूरती और बाद गयी थी |बड़ी सी आँखे उस पर मुस्कुराता चेहरा वो खुल के हसने वाली लड़की थी यह उसके चेहरे से झलकता था |उसके खुले बाल कंधे से भी नीचे जा रहे थे बाल दोनों कन्धों पे आधे आधे बिखरे थे|बहुत ही ज्यादा सुन्दर तो नहीं थी पर उसकी आँखे देखकर किसी का भी दिल आ जाये उस पर|जब बोलती तो ऐसा लगता मनो हर एक शब्द के लिए उसका चेहरा ढल जाता है |उसके आने से एक खुसबू फ़ैल गयी थी जो राज को महसूस हो रही थी |”आरती कर दीजिये पंडित जी|”मीठी सी आवाज़ राज के कानो में गूँज गयी |पर वो तो अपनी आँखे बंद करके खड़ा था | जैसे ही आरती ख़तम हुई गुलाबी रंग में रंगी लड़की ने अपनी आँखे ऊपर उठाई और पूजा की थाली लेकर चल दी वो जैसे ही मुड़ी थी उसके गीले बालो से कुछ बूदें राज पेपड़ गयी | राज ने हड़बड़ी में आँखे खोली और बस उसे जाता हुआ ही देख पाया|

तभी वहां संभव आ गया|”चल यार आगे चलते है|” राज चलने लगा पर कृष्णा जी के मंदिर में हुई उस छोटी सी अनदेखी मुलाकात ने उसके दिल पर गहरी छाप छोड़ दी थी |थोड़ी ही देर में कुछ तो हुआ था....शायद बहुत कुछ |कुछ ऐसा जो राज ने कभी न सोचा था | राज के मन में बस एक ही बात आ रही थी वो कृष्ण जी के मंदिर वाली लड़की कौन थी? शाम के करीब ४ बज रहे थे सूरज की रौशनी में अभी से एक लालिमा आने लगी थी|

दोनों दोस्तों ने अपने smart-phones निकले और सेल्फी लेने लगे कभी पानी की तरफ खड़े होकर तो कभी मंदिर की तरफ|आधे घंटे सेल्फी सेल्फी खेलने के बाद दोनों को ध्यान आया की संभव अपने दोस्त का DSLDSLR लेकर आया था| फिर राज ने camera लिया और फोटो लेने लगा और संभव smart-phone में क्लिक की हुई फोटोज को facebook पे डाल कर लोगों को tag करने लगा| कुछ फोटोज पवित्र स्नान कर रहे लोगों की लेने के बाद राज ने सीडियों के ऊपर नज़र डाली तो देखा वहां एक छोटा सा लड़का खड़ा हुआ था जो भीख मांग रहा था | लोग उसे हटा रहे थे |पीछे से खरे सोने जैसे किरणें आज रही थी |क्या दृश्य थे | इससे पहले वो कैमेरा में क्लिक कर पता उसने देखा एक लड़की पिंक कलर के सलवार सूट में वहां आई और उस छोटे लड़के से बात करने लगी |नए नए भाव बनाकर उस छोटे से बच्चे के चेहरे पे ख़ुशी लाने की कोशिश कर रही थी| राज वही थम गया | यह वही है शायद...नहीं पर.........नहीं नहीं नहीं यह वही लड़की है कैसे भूल सकता हु में |क्या पल था वो |जैसे अभी तक उसकी जिन्दगी में जो कुछ हुआ हो वो बस इस पल की और ले जा रहा था राज को|राज ने बस ज़ूम किया उससे ध्यान भी नहीं आया की फोटो भी खिची जा सकती है|उसे बस उस लड़की को पूरी तरह से देखना चाहता था |छोटे बचे के बराबर आने के लिए लड़की थोड़ी झुकी उसके सारे बाल उसके चेहरे के सामने आ चुके थे |आँखों के सामने से कुछ बाल हटाकर जैसे ही अपने कानों के पीछे सहलाते हुए ले गयी बस राज की दुनिया वही पूरी तरह से रुख गयी | अभी तक तो बालों ने रोक रखा था पर अब राज उस लड़की की आँखे देख सकता था|जैसे इससे ख़ूबसूरत और मासूम आँखे उसने कभी देखि ही न हो| और मुस्कुरता सा चेहरा...... राज ने पहली बार किसी लड़की को देख कर इतना सुकून महसूस किया होगा | छोटे से बच्चे से बात करते में वो अपने चेरे के भाव बदल रही थी जैसे उदास होना या मुस्कुराना | जो कहीं न कही राज को अपनी और खीच रहा था |


तभी अचानक राज का फ़ोन बजा|लगता है फ़ोन नहीं चाहता की राज उसके अलावा किसी और को देखे उस लड़की को भी नहीं|

“यार यह साला code execute नहीं हो रहा| kuch internal error |”राज इस वक़्त तक गुस्से में आ चूका था |

“यार कितनी बार बताऊँ तुझे...|”और वो समझाने में लग गया |थोड़ी देर बाद जब फिर वहां देखा तो वो लड़की वहां नहीं थी |राज जोर से फ़ोन पे चिल्लाया “क्या है यार तू..| किसी काम का नहीं है |एक काम भी ढंग से नहीं होता |मन्हूस तेरी वजह से ....फुट यार|”और गुस्से में फ़ोन काट दिया|अब तो राज से रुका नहीं जा रहा था पर जाने कहा चली गयी थी वो|

“वेदी कहाँ थी तू?कितनी देर से तुझे ढूँढ रही थी में|”शालिनी ने कहा| वैदेही चौक गयी|

“कुछ नहीं यार” वोह जो छोटे मंदिर के वहां जो नीली शर्ट में जो लड़का है न...वोह काफी देर से मेरा पीछा किये जा रहा है|”वैदेही ने कहा |

“वोह चोमू” हाँ वही”

“देखने में तोह शरीफ घर का लगता है | हाँ और पढ़ा लिखा भी लगता है| एक काम करते हैं तेरे भाई से बोल दे वोह देख लेंगे |एक झटके में सही हो जायेगा|”

“नहीं यार ऐसा नहीं हैं |शरिफ लड़का लगता है|”

“कहीं तू भी तोह.....मेरा मतलब..”

“कुछ भी मत बोल यार तुझे तो पता है न.”वैदेही ने चौक कर जबाब दिया|.

“ऐसे मत देख उससे शक हो जायेगा की हमें पता चल चुका है|”

“ठीक है |“शालिनी ने कहा |

तभी वैदेही ने अपना फ़ोन निकला और सेल्फी खीचने के बहाने राज को देखा |

मासूम सा राज अभी भी इस बात से अनजान की वैदेही को सब पता है बस उससे ही देख रहा था |

तभी एक बूढी औरत उसके पास वाली सीडी पे बैठ जाती है|वो काफी थक चुकी थी|

राज उनसे बात करता है और उनकी मदद करता है|व उनका सामान उठा कर और हाथ पकड़ कर उन्हें सीडियां चढाने लगता है|

यह सब वैदेही देख लेती और खुश होती है वो कोई बुरा लड़का नहीं है|

तभी उसके भैया वहां आ जाते हैं और उससे और शालिनी को अपने साथ ले जाने लगते है| तभी वैदेही कहती है “भैया में बस अभी आई |”

“ठीक है जाओ |”वैदेही वहां गयी जहाँ राज खड़ा था वहां जाती है और वापस लौट आती है|

बूढी औरत की मदद करने के बाद राज वापस उसी जगह आता है तो देखता है की वैदेही वहां नहीं है|तभी संभव भी वहां आ जाता है|राज ने संभव से पुचा की उसने देखा की वो लड़की कहाँ गयी पर संभव को भी नहीं पता वोह कहाँ गयी|

बस फिर क्या था राज तेज़ी से वहां से बहार निकला और वैदेही को खोजने लगा |

पर जैसा हर आशिक के साथ होता है वो कहीं न दिखी|उसके पीछे संभव भी वहां आया गया था वहां आया |उसे समझ आ चूका था की राज को वो लड़की नहीं मिली|

राज तोह अब जैसे पागल हो गया था इश्क में अक्सर ऐसा ही होता है कोई लड़की जितनी जल्दी पसंद आती है उसे खोजना उतना ही मुस्किल होता है|


कहाँ गयी होगी हाँ जरूर पास में लगी दुकानों में से किसी में कुछ खरीद रही होगी आखिर है तो लड़की ही खरीददारी का शौक तो होगा ही|

उसने सारी दुकाने देख डाली पर उसका कहीं कोई पता न चला| एक दूकान के पास से गुजरते हुए उसकी नज़र एक B bracelet पर पड़ी उसने सोचा यह उस लड़की के हाथ में कितना सुन्दर लगेगा और बिना सोचे उसे खरीद लिए|पर दिक्क्कत अभी वही की वही थी जिसके लिए लिया वो तो मिले|

संभव वहां आता है|दोनों मिलकर सोचते है वो कहाँ गयी होगी तभी संभव बताता है अभी उसकी एक लड़के के साथ जुबानी जुंग हुई है पार्किंग को लेकर राज पूछता है

“ कौन है वो|” संभव एक ब्लैक कलर की कार की और इशारा करके बटाटा है |राज देखता है की उस गाडी के पीछे वाली सीट पर वोह पिंक कलर की ड्रेस वाली लड़की बैठी है|और बस बिना कुछ सोचे उसके पीछे भागने लगता है | पर उस गाड़ी तक नहीं पहुच पता |

संभव उसकी हालत देखकर हस्त है और कहता है “तुझे वोह गाड़ी मिल भी जाती तो तू क्या करता ?क्या बोलता उससे ”

“वो तो बाद की बात है पहले मिले तो|”

“पर अब वो कहा गयी होगी |”

“एक बात बता क्या वो इस शहर की लगती थी ”संभव ने पूछा |

नहीं इतना तो पक्का है वो इस शहर की नहीं है |उसके बोलने के ढंग से और दूसरा number plate भी दिल्ली की थी |”

बस तो फिर पक्का वो यहाँ घुमने आई होगी और पहले महाकाल के मंदिर अगर गयी होगी तोह फिर शायद गोपाल मंदिर जाए या फिर महाकाल मंदिर जाएगी महाआरती में |”

बस फिर क्या था राज ने तेज़ी से गाड़ी निकली और पहुच गए गोपाल मंदिर पर वो लड़की जिसने राज को परेशान कर रखा वो कहीं न दिखी|फिर राज गाडी धूमता है महाकाल मंदिर की तरफ और इतनी तेज़ चलता है जैसे किसी प्रतियोगिता में भाग ले रहा हो |

राज तेजी से महांकाल मंदिर पहुचता है|महाकाल मंदिर पूरी तरह से सजा हुआ था |

आखिर हो भी क्यूँ न उज्जैनी के राजा का मंदिर है |अपने आप में अनूठे और अद्वितीय |

राज सीधे मुख्य मंदिर में प्रवेश करता है जहाँ अभी आरती चल रही थी |कितनी भीड़ थी वहां पर |पर राज साड़ी भीड़ को काट कर आगे जाता है और वहां उसका ध्यान आरती पे कम और गुलाबी सलवार वाली लड़की को खोजने में जयादा रहता है और वोह मिल भी जाती है इसके बाद तो बस पुरे समय वो उस बड़ी सी आँखे और प्यारी सी मुस्कान वाली लड़की को देखता रहता है जाने अनजाने उसका विश्वाश उस लड़की की आँखों में श्रद्धा देख कर भगवान में और बढ़ जाता है |

आस पास के लोगों के चेहरे के रंग बदल जाते है |संभव कहता है “भाई क्या कर रहा है घुरना बंद कर लोगों को गुस्सा आ रहा है ,पिटवाएगा क्या? बहुत जूते पड़ेंगे संभल जा |तू महाकाल मंदिर में है |”

आरती ख़तम होने के बाद सब यहाँ वहां हो जाते है राज उस लड़की और उसके परिवार के पीछे पीछे बाहर तक आता है |जब राज को वो अपनी आँखों के सामने दिखती है तो राज उससे बात करने के लिए आगे बढता है पर उसका भाई उस लड़की के आगे खड़ा रहता है जिस कारन वो बात नहीं कर पाता |

फिर अचनक ही भीड़ के कारन वोह नज़रों से ओझल हो जाते है |

बहुत कोशिश करने पर भी वो लोग नहीं दिखते तो अब राज हिम्मत हार जाता है |

अब वो रूहासा हो जाता है |वही बैठ जाता है |और सोचता है क्या किस्मत है मेरी नाम तक पता नहीं कर पाया |ऐसा भी हो सकता है की वो वापस चली जाये अब और में उससे एक बार भी नहीं मिल पाउँगा |क्या भगवान् एक बार तो मिलवा दो |वो और संभव साथ में बैठे रहते है |

तभी थोड़ी देर बाद राज को एक फ़ोन आता है |

“हेलो | Is this Mr. Raj speaking |”एक लड़की ने पूछा |

“Yes, I am .Sorry who is this?”

“Actually झे आपका Office Id Card इद कार्ड पड़ा हुआ मिला था क्षिप्रा के पास तोह मेने सोचा की आपको लौटा दू|”

राज ने अपनी pocket check की सच में ID वहां नहीं था और ID के बिना ऑफिस में घुस भी नहीं सकता था|

“आप कहाँ में वहां आ जाता हु अपना ईद लेने |”राज ने कहा |

“मैं वहीँ राम घाट पे हु आप जल्दी आ जाएये मुझे कुछ ही देर में निकलना है |में यहाँ सीडियों के पास आपको मिल जाऊँगी |मैंने रेड कलर कि ड्रेस पहनी हुई है |ठीक है |”

संभव ने पूछा “कहीं यह वही लड़की तो नहीं ?”

राज ने कहा “मैं उसकी आवाज़ पहचानता हु यह वो नहीं है|यार वैसे भी मेरी किस्मत बहुत खराब है |मेरा कुछ नहीं होगा|”

दोनों राम घाट पर जाते है|रस्ते में पुरे समय संभव बस यही समझाता है” कोई बात नहीं यार कभी न कभी तो वो मिलेगी ही |”

“कब उसकी शादी होने के बाद |”

वो दोनों राम घाट पे पहुचते है |राज नीचे नदी किनारे देखता है और संभव ऊपर |

अब रात ढलने ही वाली है |अँधेरा बढ़ने लगा है |पूरा राम घाट बस lights और दियो की रौशनी में महकने लगता है |कितना सुन्दर लगता है यह दृश्य|

तभी “राज |”राज के पीछे से एक मीठी सी आवाज़ आती है |

यह क्या यह तो वही आवाज़ है |यह कैसे हो सकता है| राज को अपने कानो पर भरोसा नहीं होता |(क्या हालत है यार लड़की क्या आई दोस्तों तो छोडिये कानो पर से भरोसा उठ जाता है |)

उसने पलट कर देखा यह वही लड़की है|

रात के अँधेरे और रौशनी के संगम उस लड़की को और भी खूबसूरत बना देता है |वो कहना चाहता है की तुम पास से तो और भी जायदा सुन्दर लगती हो और तुम्हारी हंसी और भी जायदा खुशनुमा है |पर इस वक़्त तो कोई शब्द जैसे उसकी जुबान से बाहर आना ही नहीं चाहता |

सच में या वोह कोई सपना तोह नहीं देख रहा|

“Hii! में वैदेही मिश्रा रोहतक से हु |”

वैदेही यही है वो नाम जिसके पीछे आज राज इतना भागा |और चुकी ये नाम उस लड़की का था तो यह तो इस नाम को और भी सुन्दर बना देता है |वैदेही ...........क्या बात है |

“मैंने आपको मेरा पीछा करते हुए देखा था यहाँ पर भी और महाकाल मंदिर में भी | ”

राज चुप चाप खड़ा था उसके पास बोलने के लिए कुछ भी नहीं सही है उसने पीछा किया था अब इस बात को तो गलत सावित नहीं किया जा सकता |

“नहीं ऐसा नहीं है...वोह तोह में ....”

“कुछ कहने की जरूरत नहीं है |मैंने सच में तुम्हे देखा था |यदि तुम शरीफ लड़के ने होते तोह अभी तक अपने भाई से कहकर तुम्हे पिटवा दिया होता|समझे |”

“पर तुम तुम संस्कारी और पड़े लिखे लगे इस लिए मैंने तुमसे बात करने का सोचा |

मुझे उम्मीद है तुम समझ सकते हो यह बात |

मेरी सगाई हो चुकी है और अगले महीने मेरी शादी है| हम यहाँ एक परिचित की शादी में आये थे तो सोचा की बाबा महांकाल का आशीर्वाद ले कर जाये |तुम्हारे मन में जो कुछ भी चल रहा हो सब यही छोड़ दो |”

“क्या ??” राज तो जैसे अन्दर से पूरा टूट चूका था |नहीं यार यह नहीं हो सकता |यह तो...यह तो.........हट यार मेरी किस्मत ही खराब है |

राज उदास हो उठा वो कर भी क्या सकता था उसके हाथ में कुछ भी नहीं था |

“देखो उदास मत हो मुझे पूरी उम्मीद है तुम्हे मुझसे बेहतर लड़की मिल जाएगी |तुम एक बहुत ही समझदार और अच्छे लड़के हो |”वैदेही से समझाते हुए कहा |

वैदेही ने राज का ID वापस कर दिया और अपने बैग से प्रसाद का डिब्बा निकल कर उसमे से प्रसाद का एक लड्डू राज को दिया |

राज ने हाथ आगे बढ़ाते हुए अपने दुःख को काटते हुए मजाकिया अंदाज़ में पूछा “ प्रसाद दे रही हो अब पाँव भी पढने होंगे क्या |”

इस पर वैदेही मुस्कुरा दी|

कितनी प्यारी हसी है इसकी पर यार यह मेरे साथ नहीं हो सकती |राज ने अन्दर ही अन्दर अपनी किस्मत को कोसा|

वैदेही ने भी उसी ढंग से कहा “इसकी कोई जरूरअत नहीं पर तुम चाहो तो छु सकते हो| मेरा आशीर्वाद मिलेगा जो जरूर ही कोई अच्छी लड़की मिल जाएगी |

मुझे उम्मीद है तुम मुझे लेकर जायदा दुखी नहीं होगे |क्यूंकि अगर तुम दुखी हुए तो मुझे भी दुःख होगा और में भी खुस नहीं रह पाऊँगी |”

और बस इतना कहकर वो चल दी | राज ने उसे रोका और अपनी जेव से Bracelet निकल कर उसे देते हुए कहा की “यह मैंने तुम्हारे लिए खरीदा था मुझे बहुत ख़ुशी होगी अगर तुम यह रख लो तो|प्लीज !!”इससे जायदा राज न तो कुछ कह सकता था न कुछ कर सकता था |वैदेही ने वो लिया और “अगली बार कोई लड़की पसंद आये न तो ऐसे मजुनों की तरह पीछा मत करते बैठने हर लड़की मेरी तरह समझदार नहीं होती|पता चला कही पिट गए तो|”

यह कहकर वो चली गयी|

राज उदास हो गया बहुत ही ज्यादा|

वोह अभी भी नदी के किनारे था और वैदेही अपने परिवार के साथ ऊपर एक मंदिर के सामने थे बस रात का सुकून ले रहे थे |अब उन्हें काफी लम्बा सफ़र करना था उसके लिए तैयार हो रहे थे |

राज उदास होकर वही बैठ गया | वैदेही भी इस बात से उदास थी की उसने एक भले लड़के का दिल तोड़ दिया था |शालिनी ने पूछा “ अगर तुम्हारी सगाई ने हुई होती तोह क्या तुम....”

“पता नहीं|” वैदेही ने जबाब दिया |

तभी संभव वहां कुल्फी लेकर आया |उसने सारी बातें सुन ली थी उन दोनों के बीच में नहीं आया |पर कहते हैं न जब लड़की चली जाती है तो दोस्त ही काम आते है| राज का मन हल्का करने के लिए कुल्फी ले आया था|

और फिर वो मज़ाक करने लगा ..कहने लगा” भाई तेरी शादी तो नहीं होने वाली इस जनम में|अपनी कुंडली दिखवा ले कहीं|पूछ लेना शादी होगी की कुंवारा ही रहेगा |”

यार एक बात बता कहीं यह लड़की तुझे युही टाल तो नहीं रही की तू पसंद नहीं इसलिए कुछ बहाना बना दिया |”


“नहीं यार ऐसा नहीं है मेने उसकी facebook DP चेक की है |कोई चिराग नाम का लड़का है |”

“और ये उसकी फ्रेंड कस क्या स्टेटस है?मेरी बात करा दे?”

राज ने गुस्से से देखा और फिर हस दिया| संभव ने कहा चल वैसे ही reunion के लिए काफी लेट हो चुके है|”

राज उठ खड़ा हुआ और वहां से जाने लगा बीच में वही कृष्णा जी का मंदिर आया |मंदिर बस बंद होने ही वाला था राज ने अपनी जेब से कुछ हज़ार के नोट निकले और वहां दान कर दिए |

पुजारी जी ने कहा “ यह महाकाल की नगरी होने के साथ ही कृष्णा जी की विद्यास्थली भी है|कृष्णा जी तुम्हे हर सफलता दिलाये और तुम्हारी पसंद की लड़की से तुम्हारी शादी हो|जय हो कृष्णा कन्हैया लाल की |”राज मुश्कुरा दिया और वैदेही की तरफ देखने लगा वो भी मुस्कुरा रही थी |

पर अब वैदेही को सुकून था की राज संभल जायेगा की अब वो किसी की मुश्किलों का कारन नहीं बनेगी |राज जल्दी में वहां से निकला पार्टी ८ बजे से थी और ८:३० हो रहे थे |

कॉलेज पहुचने से पहले राज के मोबाइल में notification आया Vaidehi Mishra Sent you a friend’s request |





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