"अरे प्रियंका जी! आप यहाँ कैसे खड़ी हैं? आज आपके पति आपको लेने नहीं आए?"

अशेष ने पार्किंग से गाड़ी निकालते हुए प्रियंका से पूछा।

"सर! बेटे की तबियत खराब है। मेरे पति उसे लेकर डॉक्टर के पास गये हैं। मुझे भी वहीं पंहुचने को कहा है। लेकिन अभी तक न तो कोई ऑटो दिखा न रिक्शा। सर मुझे जल्दी से बेटे के पास पंहुचना है। मुझे उसकी बहुत चिन्ता हो रही है।"

ये कहते कहते प्रियंका की आवाज भर्रा गयी और उसकी आंखों में आंसू झिलमिलाने लगे।

"अरे! आप परेशान न होइए। बेटा ठीक हो जाएगा।"

"सर! आप नहीं जानते इस वक्त मेरी क्या कंडीशन हो रही है। एक भी ऑटो नहीं है। मैं बेटे के पास पंहुचू तो कैसे?"

अब तक प्रियंका के आँसू गालों के रास्ते बहने लगे।

"प्रियंका जी! इफ यू डोंट माइंड... क्या मैं आपको आपके बेटे के पास ले जा सकता हूँ?"

अशेष ने सकुचाते हुए पूछा।

संकोच तो प्रियंका को भी हो रहा था। लेकिन इस वक्त उसके पास और कोई चारा भी तो नहीं था। उसने धीरे से सहमति में सिर हिला दिया।

अशेष ने गाड़ी में बैठते हुए बगल की सीट की तरफ का दरवाजा खोल दिया।

प्रियंका सीट पर बैठते ही निढाल सी हो गयी। अशेष नें उससे पूछा,

"आपको जाना कहाँ है?"

"स्नेह नगर..

अशेष ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। गाड़ी में सन्नाटा था। बीच बीच में प्रियंका के सुबकने की आवाज आ जाती।

"प्रियंका जी! सारी औरतें एक सी होती हैं। भगवान ने सभी औरतों को बहुत भावुक बनाया है। अपने बच्चों और पति को जरा भी तकलीफ में नहीं देख सकतीं। उनको जरा भी परेशानी हुई नहीं कि वो बेचैन हो जाती हैं। पता है? आपकी ही तरह सुरुचि भी है। वो भी मुझे और बच्चों को किसी भी तरह के कष्ट में नहीं देख पाती। ऐसे ही आपकी तरह आंसू बहाने लग जाती है।"

अशेष ने माहौल को हल्का करने के लिए कहा।

तभी अचानक सामने से आ रही एक कार की हेडलाइट उसके चेहरे पर पड़ी। अचानक पड़ी इस लाइट से उसकी आंखें चौंधिया गयीं। उसने जल्दी से गाड़ी को ब्रेक लगाए। ये सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि प्रियंका अपने आप को संभाल नहीं पाई। और उसका सिर डैश बोर्ड से टकरा गया। अशेष घबरा गया। वो प्रियंका को ऊपर उठाने के लिए उसके ऊपर झुका ही था कि तभी सामने वाली कार बैक हुई और तेजी से अशेष की कार के बगल में आकर रुकी। एक जोड़ी आंख प्रियंका के ऊपर झुके हुए अशेष पर ठहर गयी। अशेष जब तक पलटकर देखता गाड़ी एक झटके से आगे बढ़ गयी।

अशेष की नजर बैक व्यू मिरर पर पड़ी। पीछे जाती हुई गाड़ी को देखते ही उसकी आंखें सोचने वाले अंदाज में सिकुड़ गयीं। उसने दिमाग में कुछ ख्याल आए, जिन्हें उसने तेजी से झटक दिया। तब तक प्रियंका संभल चुकी थी। अशेष ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। गाड़ी में एक बार फिर सन्नाटा था।

दस मिनट बाद दोनों डाॅक्टर के क्लीनिक पर थे। प्रियंका के पति बाहर ही मिल गये। प्रियंका ने गाड़ी से उतरते हुए अशेष को थैंक्यू बोला और जल्दी जल्दी अपने पति से अशेष का परिचय कराया। और लगभग भागती हुई क्लीनिक के अंदर चली गयी। पीछे से उसके पति भी थे।

अशेष को देर हो रही थी। वो जल्द से जल्द घर पंहुच जाना चाहता था। हलांकि वो जानता था घर पंहुचकर एक तूफान का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए वो चाहता था कि जल्दी ही वो तूफान आकर गुजर जाए और फिर सब सामान्य हो जाए।

अशेष ने धड़कते दिल और कांपती उंगलियों से डोरबेल दबाई। दरवाजा सुरुचि ने खोला। लेकिन उम्मीद के विपरीत वो शान्त थी। वो बिना बोले अंदर चली गयी शायद किचन में। अशेष जानता था ये तूफान के पहले की खामोशी है। अशेष बेडरूम में जा ही रहा था कि तभी उसके फोन की घंटी बोल उठी। अशेष ने देखा ये कोई अनजान नम्बर था।

हेलो!!

.........

ओह हाँ पहचाना कुछ देर पहले हम मिले थे।

..........

हेलो हेलो आपकी आवाज कट रही है। यहाँ नेटवर्क सही से नहीं आता है। आप....

फोन कट गया। अशेष ने जल्दी से वाई फाई से फोन कनेट किया और वाट्सएप पर उसी नम्बर पर मैसेज भेज दिया।

••सुनिए आपको जो कहना है आप यहाँ मैसेज कर दीजिए। घर पर फोन से बात करना संभव नहीं है••

थोड़ी देर तक वो अपने मैसेज के आगे लगे दोनों टिक के नीले होने का इंतजार करता रहा। लेकिन जब दस मिनट हो गये तो उसने अपने कपड़े उठाए और वाॅशरूम मे चला गया। वो इस बात से बेखबर था कि एक जोड़ी आंख उसकी सारी हरकत पर नजर रखे है।

तभी फोन में मैसेज नोटिफिकेशन की टोन बजी। सुरुचि ने झपट कर फोन उठा लिया। और ध्यान से मैसेज पढ़ने लगी।

••सर! मैं प्रियंका का पति सुयश हूँ। मैं आपको तहे दिल से धन्यवाद देना चाहता हूँ। आप नहीं जानते सर कि आपने मेरी पत्नी को हमारे पास पंहुचाकर कितना बड़ा एहसान किया। हमारे बेटे की तबियत बहुत खराब थी। वो प्रियंका के बिना एक भी ट्रीटमेंट कराने को तैयार नहीं था। मुझे चिन्ता उस समय हुई जब पता चला ऑटो वालों की हड़ताल है। लेकिन आपने ऐसे समय में प्रियंका को हमारे पास पंहुचाया।••

•• सर! प्रियंका आपकी बहुत तारीफ करती है। उसका कहना है कि आप ऑफिस में हर किसी की हर संभव मदद करते हैं। और हाँ उसने ये भी बताया कि आप जितना ऑफिस वालों के लिए केयरिंग हैं उतना ही अपनी पत्नी और बच्चों के लिए। उनकी जरा सी भी तकलीफ आपको सारा दिन ऑफिस में परेशान रखती है।••

सुरुचि ने अपनी नम हो गयीं आंखों को धीरे से पोछा। तभी फिर मैसेज टोन बज उठी।

••सर! मैं आपको ज्यादा नहीं जानता लेकिन इतना जरूर कह सकता हूँ कि आपके घर वाले बहुत लकी हैं जो आप जैसा इन्सान उनके साथ है।••

••सर! मैं आपसे मिलना चाहता हूँ। कभी समय निकालकर मैडम के साथ हमारे गरीबखाने पर आइए।••

सुरुचि ने जल्दी से टाइप किया

••जरूर आएंगे...

सुरुचि अब तक अशेष को गलत ही समझती थी। उस पर शक करती थी। वो ऑफिस के बाद बिना बताए कहीं भी चला जाता था। कोई भी फोन आने पर बाहर टेरिस पर जाकर बात करता था। सुरुचि हरदम उसकी काॅल लाॅग चेक करती रहती थी। अशेष के वाट्सएप के मैसेज चुपचाप पढ़ती। कई बार इन बातों को लेकर अशेष से नाराज हो जाती। बोलना बंद कर देती।

आज अशेष की गाड़ी सुरुचि की गाड़ी से ही टकराते टकराते बची थी। जब उसने अशेष को प्रियंका पर झुके देखा तो उसने मन ही मन फैसला कर लिया कि कल सुबह ही वो दोनों बच्चों को लेकर अपने मायके चली जाएगी।

लेकिन सुयश के एक मैसेज ने उसकी आंखे खोल दीं। उसकी आंखों से गंगा जमुना बहने लगी।

तभी अशेष ने पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखा। जैसे ही सुरुचि उसकी तरफ मुड़ी अशेष उसके आँसू देखकर घबरा गया।

"क्या हुआ सुरुचि? सब ठीक तो है न? तुम्हारी आँखों में ये आँसू कैसे? प्लीज़ बताओ न क्या बात है?"

सुरुचि उससे लिपटते हुए बोली,

"प्लीज़ अशेष मुझे माफ कर दीजिए।"

"अरे! हुआ क्या? ये तो बताओ। अशेष को कुछ समझ नही आ रहा था।

सुरुचि ने प्रियंका के पति सुयश का मैसेज उसे दिखाया। फिर वो अपने आंसू पोछते हुए बोली,

"अशेष! मैं हमेशा तुम पर शक करती रही। मैं तुम्हारी काॅल लाॅग चेक करती थी और तुम्हारे सारे मैसेज भी पढ़ती थी।"

अशेष ने बीच में उसकी बात काट दी और सुरुचि का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोला

"मुझे पता है सब।"

"आपको पता है? लेकिन आपने मुझसे कभी कुछ नहीं कहा।"

"अरे पगली! ये तो तुम्हारा अधिकार है। तुम्हारा मेरे लिए प्यार है। और कोई भी व्यक्ति अपना प्यार बटते हुए नहीं देख सकता।" अशेष ने उसके आँसू पोछते हुए कहा।

"लेकिन आपने मेरे साथ कभी ऐसा नहीं किया। क्या आपका मुझ पर अधिकार नहीं या आप मुझसे प्यार नहीं करते?"

"ऐसा नहीं है। तुम और हमारे दोनों बच्चे मेरी जान हो। और रही बात तुम्हारे ऊपर शक न करने की तो मुझे बस यही कहना है कि मुझे तुम पर पूरा विश्वास है।"

सुरुचि धीरे से मुस्कुराई और अशेष के सीने पर सिर टिकाते हुए बोली

"आई एम द लकियस्ट वाइफ इन द वर्ल्ड...

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