जिला अस्पताल के गेट के पास लगा हुआ वर्शो पुराना परिवार नियोजन के बोर्ड के बगल मे आज एक और नया बोर्ड बेटी बचाओ देष बचाओ लगा देखकर कमल की ऑखे चमक उठी। दहेज के अत्याचारो से जूझती हुई बेटियॉ आज समाज मे अभिषाप बन गई थी । यद्यपि कि वह समाज मे फैली हुई इस बुराई से अछूती नही थी फिर भी उसे नारी होने का गौरव था। और वह चाहती थी कि देष की हर बेटी आने वाले कल मे अपने आप को गौरवान्वित महसूस करे । जिसके लिये देष के हर प्रान्त ,हर षहर ,हर गॉव ,हर गली मे पैदा होने वाली प्रत्येक बेटी को षिक्षित किया जाय और उन्हे अपने पैरो पर खड.ा होने के काबिल बनाया जाऐ । इस दिषा की ओर हो रहे प्रयास के अर्न्तगत आज सरकार द्वारा बेटी बचाओ के अभियान मे भ्रूणहत्या पर रोक एक महत्वपूर्ण कदम था । आज अपने स्कूल से बेटी बचाओ देष बचाओ के अर्न्तगत एक निबन्घ प्रतियोगिता का आयोजन करके जब वह घर लौटी तो वह बहुत थकी हुई थी । वह रजाई मे घुसते ही गहरी नींद मे सो गई । लेकिन षीघ्र ही उसके कानो मे किसी नवजात षिषु के रोने की आवाज से ऑख खुल गई। आवाज सुनकर वह चौक गई । थोड.ी देर बाद वह आवाज धीरे धीरे गायब हो गई । लेकिन कुछ ही देर बाद वह आवाज उसे फिर सुनाई दी। अब उसे विष्वास हो गया कि जरूर वही कही आस पास कोई बच्चा अवष्य है । वह बहुत तेजी से छत की ओर भागी । ऊपर जाकर कमल ने चारो ओर देखा , छत से नीचे भी देखा लेकिन कही कोई भी बच्चा नजर नही आया। उदास होकर वह अपने बिस्तर पर जाकर सोने का प्रयास करने लगी लेकिन रातभर बच्चे की आवाज ने उसे सोने नही दिया ।
सुबह होते ही वह तुरन्त घर के बाहर उस बच्चे की खोज मे निकल पड.ी। सूरज की रोषनी मे कमल ने देखा कि घर के बगल मे खाली पढ.े हाथे की घासफूस के बीच दीवार से चिपकी हुई एक कपड.े की गठरी पड.ी हुई है । पास जाकर जब कमल ने देखा तो वह उस गठरी को देखकर आष्चर्यचकित रह गई। इस गठरी मे एक नवजात बच्ची बधी पड.ी थी। उसने उसे तुरन्त अपनी गोदी मे उठा लिया । गोदी की गरमी पाते ही बच्ची गहरी नींद सो गई। गहरी नींद मे सोई हुई बच्ची को देखकर कमल की ऑखो से पानी गिरने लगा क्योकि उसे मालूम था कि यह बच्ची अब कभी ऑख नही खोलेगी ।

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