आधी रात को नींद खुली तो उसकी छाती के कर्कश बालों ने मेरे चेहरे और बदन में गिन्न भर दी । तुरंत समीर की याद आई। वो क्या कर रहा होगा। उसके बारे में सोचने से पहले मैंने मेरा सर रोहित के सीने से उठा लिया। दसवे माले की बालकनी से जुडे हुए बेड पर रात के तीन बजे मैं अपनी टीशर्ट ढूंढ रही थी।  दूर दूर तक हलकी रौशनी दिखाई दे रही थी। मैंने आवाज न हो ऐसे व्हिस्की का गिलास भरा और मेरा फोन उठाकर बालकनी में आ खड़ी हुई। सब अनजान था।  जगह, घर,रोहित ! रोहित से कुछ महीनों से चैटिंग चल रही थी। लेकिन मुझे पता था वो हाथ थामने वालों में से नहीं था। लड़का वो अच्छा था लेकिन कभी उसके बारे में इतना सोचा ही नहीं था। समीर जो मेरा चार साल से प्रेमी था उसने एक दिन अचानक से मुझे आकर बता दिया की उसकी शादी तय हो गई हैं और वो भी उसकी पसंद की लड़की से।  मतलब वो पिछला पूरा साल किसी और के साथ भी था। इतनी देर में रोहित ने पीछे से आकर मेरे पेट को अपने दोनों हाथों से जकड लिया। वो भरी नींद में था।  उसकी आँखे टमाटर सी लाल थी। उसने मुझे अंदर ले जाना चाहा।  रात का नशा उतर चूका था मुझे।  समीर की यादों ने फिर से डेरा दाल दिया था। रोहित के घर आना और यह सब में पड़ना अब गलत लगने लगा था मुझे।  गिल्ट खून में दौड़ रहा था। लेकिन तभी याद आया की समीर तो अपने हनीमून पर अभी होगा। ज्यादा सोचना और बात करना नहीं चाहती थी मैं।  और मैंने जो हो रहा था होने दिया।  रोहित मुझे अंदर ले गया और मुझे अपने कंबल के अंदर नजदीक खिंच कर सोने लगा। सांसे लेना मुश्किल हो गया था मेरा लेकिन उसको जताना नहीं चाहती थी और इसीलिए वैसे ही पड़ी रही। 


कुछ दिन और गुजरे। रोहित हँसाता था, मैगी बनाकर खिलाता था, रात को डरना मत कहकर प्यार से सुलाता था। हफ्ते में चार दिन मैं रोहित के घर से ही ऑफिस के लिए निकलती थी। समीर की यादें मिटने लगी। मुझे रोहित के साथ समय गुजारना अच्छा लगने लगा। हम दोनों की सोच भी काफी मिलती थी। पता ही न चला की कब मैं रोहित से प्यार कर बैठी।  हम दोनों रिश्तों के मामले में धीरे से आगे बढ़ने वालों में से थे।  मैंने पहली बार रोहित के लिए लेवईस की टी शर्ट खरीदी और उसको गिफ्ट की। उसने मुझे पहन कर दिखाई और जब मैं किचन में गई तो उतारकर कोने में फेंक दी।  मैंने वो देख लिया।  रोहित का बर्ताव बदलने लगा।  उसने मुझे घर आना ठीक नहीं हैं, सोसाइटी वाले क्या कहेंगे , कहकर मेरा उसके घर जाना काम करवा दिया। उसने मैसेज/ कॉल्स पर भी खुद को रोक लिया। जब मैंने जानना चाहा तो मुझे बताया की वह इन सब विषयों पर अभी बात करना नहीं चाहता है। हमारे बिच में सबकुछ था और कुछ भी नहीं था।  कभी वो रात को १२ बजे मुझे बुलाता।  मैं उसके घर जाती और सुबह होने से पहले निकल लेती।  

एक दिन एक दोस्त से पता चला की रोहित ने एक महीने पहले कंपनी में इस्तीफा दे दिया है और कुछ दिनों में वह अहमदाबाद छोड़ कर चला जायेगा। मैं हक्की बक्की रह गई। उन्ही दिनों मुझे पता चला की मेरे डेट्स भी १२ दिन पीछे चल रहे थे।  मैंने उससे उसके जाने के बारे में जानना चाहा तो भड़क कर बोला उससे तुम्हारा कुछ लेना देना नहीं हैं।  उसने बताया - वैसे भी लॉन्ग डिस्टेंस मेरे किस्से में काम नहीं करनेवाला और मैं नहीं चाहता की तुम मेरी वजह से अपनी करियर छोड़ कर मेरे साथ चलो।  मेरे पास कहने को कुछ नहीं था।  उसने अपना फोन नंबर तक शेयर नहीं किया और एक दिन चला गया। 

रिपोर्ट्स आने पर मेरी हालत ख़राब हो गई। मैं दिल दिमाग से तूट चुकी थी। मैं कभी यह सब जमेलों में पड़ना नहीं चाहती थी।  मैंने दोस्तों के पास से उसका फोन नंबर पाया और उसको सारी बात बताई मैसेज पर। रात के दो बजे उसका मैसेज आया "तुम क्या चाहती हो मुझसे ?" मैंने मेसेज पढ़ने के बाद फोन फेंक दिया।  रोना धोना कुछ दिनों तक चला। सब अकेले सहा। 

करीब दो महीनों के बाद रोहित का मैसेज आया। तुम मुम्बई क्यों नहीं आती। घूमने आओ।  तुम्हे मिलने का मन है। मैं इस सब में स्वमान कब का खो चुकी थी।  शायद आगे कुछ हो के खयाल से में मुम्बई चली गई उससे मिलने। उसने मुझे मुम्बई में जॉब ढूंढने को कहा। मेरा मन खुश हो रहा था कई दिनों के बाद। यहाँ से आगे अब सब ठीक ही होगा। शायद मैंने ही उससे रिश्ते के बारे में सवाल करके डरा दिया होग , इसबार मैं ऐसी कोई गलती नहीं करुँगी। मैं मुम्बई आ गई। दो साल हमने साथ गुजारे।  मुझे मेरा पहला वाला रोहित वापिस मिल गया था। वो हँसता था और हंसाता था।लेकिन कभी दोस्तों के सामने मुझे फ्रेंड से अधिक नहीं माना।

एक रात उसके सेल फ़ोन पर आ रही वाट्सएप्प की लगातार आवाजो ने मेरी नींद उड़ा दी।  मैं पानी के लिए किचन में गई तो रोहित वहा बालकनी में किसी के साथ प्यारभरी बाते कर रहा था।  मैंने ध्यान से सुना तो वो अपनी एक्स के साथ फोन पर बतिया रहा था।  वाट्सएप्प पर भी लगातार वो उससे बाते करता रहता।  पूछने पर बताता की वो दोनों अब सिर्फ दोस्त है।  पांच साल की बातें करनी बाकि हैं इसलिए वो इतनी ज्यादा बाते करता हैं।  लेकिन यह सब ६ महीनो तक चलता रहा। अब वह हर महीने दिल्ली जाने लगा।  और मुझे जिस बात का डर था वही हुआ।  उसने एक दिन मुझे बता दिया की शायद वो उसकी एक्स के प्यार में है। और इसलिए मुझे अब अलग घर लेना होगा और हम हमेशा की तरह अच्छे दोस्त बने रहेंगे।  

मैं अभी भी उसके साथ रहती हूँ। नया घर ढूंढ रही हूँ लेकिन अकेलेपन का डर खाये जा रहा है।  उन दोनों को प्यारभरी बाते करते सुनती हूँ। रातो को रोती हूँ। और कल वे लोग उनकी पहली ट्रिप पर साथ जा रहे हैं। मुझे अब मेरी ६०० से अधिक रातें जो मैंने उसके नाम लिखी थी वो काट खा रही हैं। एंग्जायटी के डर से और लोगो को क्या मुहँ दिखाउंगी के डर से अब मैं घर से बाहर सिर्फ ऑफिस के लिए निकलती हूँ। रात को रोहित कभी आकर हाल पूछता हैं तो नींद आ जाती है। 

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