मेर रेप हुआ था!

वर्तमान दिन

प्लीज मुझे छोड़ दो।

मुझे जाने दो। तुम ये ठीक नहीं कर रही हो। मैंने इसलिए तुम्हें घर पर नहीं बुलाया था।

मैं बस हमारी गलतियों को ठीक करना चाहता था।

वो हाथ जोड़कर, कुछ दुबका हुआ-सा बिस्तर के ऊपर बैठा था।

शिवानी उसी के पास लगभग न जितने कपड़ों में खड़ी थी और राजीव की कमीज़ के बटन खोल रही थी। पर मैं तो ये गलती तुम्हारे साथ बार-बार करना चाहती हूँ।

राजीव सिर्फ़ हाथ जोड़कर उसके सामने गिड़गिड़ा रहा था।

शिवानी: शश्श।।। शोर मत करो। कोई आ जाएगा। फिर हमारे प्यार में डिसटर्ब होगा।

राजीव: प्लीज मुझे जाने दो, वरना मैं शोर मचा दूंगा।

शिवानी: हाए! तुम कितने क्यूट हो राजीव। तुम्हारी ऐसी मासूम बातें ही तो मुझे तुम्हारा दीवाना बना देती है। तुम्हें क्या लगता है तुम शोर मचाओगे और लोग तुम्हारी बात मान लेगी।

अब तक शिवानी राजीव की कमीज़ के सब बटन खोल देती है और राजीव एक बार फिर रोने और गिड़गिड़ाने लगता है।

लगभग 6 महीने पहले-

टिंग-टोंग।।। टिंग-टोंग।।। घर की घंटी बजती है।

अरे आ रही हूँ- अंदर से एक औरत की आवाज़ आती है।

ये मिसेज वर्मा है, वे आकार दरवाजा खोलती है।

हैलो आंटी, सॉरी इस समय आपको परेशान किया। मेरा नाम शिवानी है। मैं आज सुबह ही पड़ोस के घर मे रहने आई हूँ- शिवानी ने कहा।

आओ न बेटा अंदर आओ। इसमें परेशानी की क्या बात है। बताओ कैसे आना हुआ?- मिसेज वर्मा ने बड़े प्यार और अपनेपन से कहा।

जी आंटी। दरअसल कमरे में एक कील लगानी है और मेरा हथौड़ा नहीं मिल रहा है। क्या पास मिल सकता है।– शिवानी ने थोड़ा झिझकते हुए पूछा।

अरे हाँ बेटा, क्यों नहीं।, राजीव ज़रा स्टोर रूम से हथौड़ा लाकर दे दो।- मिसेज वर्मा ने लगभग चिल्लाते हुए कहा।

(राजीव कमरे में हथौड़ा लेकर आता है। राजीव 19 साल का है। वह कॉलेज में पढ़ता है।)

उसने हथौड़ा लाकर अपनी मम्मी के हाथ में दिया।

मिसेज वर्मा- अरे ये मुझे क्या दे रहा है। अपनी शिवानी दीदी को दे। ये शिवानी दीदी है, साथ वाले घर में रहने आई हैं।

राजीव: हैलो दीदी।

शिवानी बस मुस्कुरा दी।

(ये उनकी पहली मुलाक़ात थी। इसके बाद शिवानी हथौड़ा लेकर घर चली गयी और राजीव और उसकी माँ भी अपने काम में लग गयी।)

एक दिन शिवानी शाम को जब अपने घर वापिस आ रही थी तो मिसेज वर्मा राजीव को डांट रही थी।

मिसेज वर्मा: तुझे कितनी बार बोला है थोड़ा इंग्लिश की तैयारी कर लिया कर। देखा न अब भी तू इंग्लिश के पेपर में सबसे कम नंबर लाया है। सुन इंग्लिश के बिना आगे कोई भविष्य नहीं है। तू समझ रहा है न।

शिवानी: हैलो आंटी, क्या हुआ? क्यों डांट रही हो आप राजीव को?

मिसेज वर्मा: (उन्होंने राजीव के सिर पर चपत लगते हुए कहा।) अरे क्या बताऊँ बेटा, ये राजीव है न बिलकुल नहीं पढ़ता।

शिवानी: अरे तो क्या हुआ आंटी मैं राजीव को पढ़ा दूँगी।

मिसेज वर्मा: तुम? तुम कब पढ़ा सकोगी बेटा।

शिवानी: ऑफिस से घर आकर

मिसेज वर्मा: इस समय? हो पाएगा क्या?

शिवानी: अरे हाँ आंटी। अब आपके और अपने प्यारे राजीव के लिए इतना तो मैं कर ही सकती हूँ।

ये कहते हुए वो प्यार से राजीव के गाल खींचती है और अपने घर चली जाती है।

राजीव अब रोज़ शिवानी से पढ़ने उसके घर जाने लगता है। शिवानी रोज़ उसे इंग्लिश की नई नई चीजें बहुत आसान तरीके से सीखती है। जहाँ शिवानी को पढ़ाने में बहुत मज़ा आता था, वहीं राजीव को उसके साथ रहकर पढ़ने में बहुत मज़ा आता था। अब वह इंग्लिश में पहले से ज़्यादा अच्छा हो गया था। मम्मी भी उसके इस प्रोग्रैस से बहुत खुश थी। धीरे-धीरे राजीव और शिवानी की दोस्ती होने लगी। वे दोनों बिना काम के भी एक-दूसरे के घर आने जाने लगे।

एक दिन जब राजीव शिवानी के घर कमरे में बैठकर पढ़ रहा था तो शिवानी राजीव के पास आकर बैठ गई। वो राजीव के बहुत करीब जाकर बैठी थी। उसके शरीर जब राजीव के शरीर से टकराया तो राजीव थोड़ा खिसककर बैठ गया। राजीव के थोड़ा दूर जाने से वह दोबारा उसके करीब आकर बैठ गई। राजीव को थोड़ा अटपटा तो लगा पर उसने इससे गलती समझकर लगभग अनदेखा कर दिया। अब ये अक्सर रोज़ की बात हो गई। शिवानी राजीव के ज़्यादा करीब जाकर बैठने लगी। राजीव को अजीब तो लगता था पर दोस्ती और उम्र के लंबे फासले की इज्ज़त करते हुए वह इसे अनदेखा कर देता।

एक दिन जब राजीव बैठकर पढ़ रहा तो था शिवानी ने पीछे से आकर उसे पकड़ लिया और पीछे से ही उसके गाल पर चुंबन दे दिया। ये अचानक हुई हरकत से राजीव घबरा गया और शिवानी से दूर हट गया। उसने शिवानी की तरफ सवालियाँ नज़रों से देखा। शिवानी की आँखों में अजीब-सी शरारत थी। राजीव इस अचानक आए बदलाव से डर गया। इससे पहले की वह वहाँ से जा पाता शिवानी एक बार फिर आकर उससे गले लग गई।

शिवानी: राजीव तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो। तुम्हें छूना और महसूस करना मुझे बहुत सुख का एहसास देता है।

राजीव: ये आप क्या बोल रहे हो दीदी। छोड़ो मुझे, प्लीज मुझे जाने दो।

शिवानी: प्लीज मुझे दीदी मत बोलो। शिवानी बोला करो। मैं तुम्हारे मुँह से अपना नाम सुनना चाहती हूँ। ये कहते हुए शिवानी अपने चेहरा राजीव के चेहरे की तरफ ले जाने लगी।

राजीव शिवानी को झटक कर चला गया| शिवानी ने उसे रोकने की कोशिश भी की पर वो नहीं माना।

उसके बाद कुछ दिनों तक राजीव शिवानी के घर पर पढने नहीं आया। जब मिसेज वर्मा ने राजीव से इसका कारण पूछा तो राजीव ने बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया। पर ये टालना ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया। माँ की जिद्द पर राजीव को फिर शिवानी के घर पर पढ़ने जाना ही पड़ा।

शिवानी: ओह राजीव, मुझे तो लगा था की तुम फिर कभी नही आओगे।

राजीव: दीदी, मैं पढ़ने नहीं आया हूँ वो तो मम्मी ने ज़िद्द की तो मुझे आना पड़ा।

शिवानी: तुम अभी भी मुझसे नाराज़ हो? माफ़ नहीं करोगे अपनी दोस्त को? देखो राजीव मैं तुम्हे बहुत पसंद करती हूँ और उस दिन मैं थोडा सा बहक गई थी। प्लीज मुझे माफ़ कर दो।

राजीव: शिवानी दीदी मैं ये समझ सकता हूँ। लेकिन ये सब गलत है। आप मेरी दीदी जैसी हो।

शिवानी: ठीक है राजीव, पर प्रॉमिस करो की तुम मुझे दीदी नहीं बोलोगे। अब से हम दोस्त है। तुम मेरा नाम लेकर मुझसे बात करोगी।

राजीव: पर आप मुझसे बड़ी हैं। मैं ऐसा नहीं कर सकता।

शिवानी: तो क्या हुआ जो उम्र में बड़े होते हैं क्या वो दोस्त नहीं हो सकते?

राजीव: नहीं, वो मेरा मतलब नहीं था।

शिवानी: तो बोलो, नो दीदी, सिर्फ़ शिवानी?

राजीव: हम्म... ठीक है। दीदी।

शिवानी: क्या?

राजीव: ठीक है शिवानी।

शिवानी और राजीव हँसने लगते हैं।

शिवानी: ओके दोस्त, तो क्या हम फिर से पढ़ाई शुरू कर सकते हैं?

राजीव: हाँ, बिलकुल।

शिवानी और राजीव एक बार फिर से दोस्त बन जाते हैं। दोनों ही एक बार फिर दोस्ती होने पर बहुत खुश थे। उन दोनों ने बहुत दिनों के बाद साथ में टाइम बिताया था।

राजीव जहाँ इस मसले को सुलझाकर खुश था। शिवानी के चेहरे पर बस राजीव के वापिस आ जाने का सकून था।

राजीव शायद समझ नहीं पा रहा था पर शिवानी आज भी वही चाहती थी जो वो तब चाहती थी जब उसने पहले बार राजीव को देखा था। शिवानी ने जब पहली बार राजीव को देखा था तभी से वह उसको पसंद करने लगी थी। ये पसंद प्यार वाला नहीं था वह बस राजीव को पाना चाहती थी। राजीव को घर पर बुलाना और उसे अपनी तरफ आकर्षित करने का ही तरीका था वो जब शिवानी राजीव के नजदीक जाकर बैठी थी। शिवानी के दिमाग मे अब भी वही सब था। राजीव के साथ दोस्ती करना, उसे एक बार फिर अपने नज़दीक लाने का तरीका था।

राजीव इन सबसे अंजान था। वह बस खुश था तो इसलिए की एक बार फिर वो शिवानी के साथ बैठ कर पढ़ सकेगा और उसे फिर से ये परेशानी नहीं होगी। दोनों का रोज़ मिलना और साथ में टाइम बिताने का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया। शिवानी कभी-कभी थोड़ी कोशिश करती रहती थी की वह राजीव के नजदीक जा सके।

एक दिन फिर वही हुआ। राजीव जब पढ़ने के लिए शिवानी के घर आया तो शिवानी ने उसे कमरे में बैठने के लिए कहा और दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद वह राजीव के पास जाकर फिर से उसके नजदीक जाकर बैठ गयी। राजीव ने जब उससे दूर हटने की कोशिश की तो शिवानी ने ज़बरदस्ती करते हुए उसे लगभग बिस्तर पर लेटा दिया और उसके ऊपर गिर गयी। जब राजीव ने चिल्लाने की कोशिश तो शिवानी ने अपने होंठ उसके होंठ पर रखते हुए उसकी आवाज़ बंद कर दी। शिवानी की इस हरकत से राजीव का दम घुटने लगा था। वह छटपटा रहा था। वह जितना शिवानी की पकड़ से छूटने की कोशिश करता शिवानी अपनी पकड़ को और मजबूत कर देती। राजीव लड़का होकर भी अपने आपको शिवानी की मज़बूत पकड़ से नहीं निकाल पा रहा था। धीरे-धीरे शिवानी ने उसकी शर्ट के बटन खोल दिए। अब शिवानी के हाथ राजीव की पैंट की तरफ जाने ही लगे थे की दरवाजे की घंटी बज गई। घंटी की आवाज़ सुनकर राजीव की साँसों में साँस आई। जहाँ शिवानी अपने कपड़े ठीक करके दरवाज़ा खोलने गई वहीं राजीव ने झट से अपने कपड़े ठीक किए और घर से चला गया। राजीव के ऐसे चले जाने से शिवानी घबरा गई। उसे डर की कहीं राजीव ये सब किसी को बता न दे। पर तभी उसने देखा की राजीव घर की तरफ नहीं गया है बल्कि नीचे की तरफ गया है तो वह तुरंत उसके घर चली गई। घर जाकर अपनी पोल खुल जाने के डर से उसने मिसेज वर्मा को एक मनघडन्त कहानी सुनाई और कहा की राजीव ने उसके साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की है। पहले तो मिसेज वर्मा को इस बात पर विश्वास नही हुआ पर जब उन्हे शिवानी की आँखों में आँसू देखे तो उन्हें लगा की राजीव से जवानी के जोश में गलती हो गई। उन्होने फोन करके राजीव को घर पर बुलाया। जब राजीव ने घर में शिवानी को बैठ देखा तो वह डर गया। इससे पहले की वह कुछ बोलता मिसेज वर्मा ने आकर उसको एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया।

मिसेज वर्मा: राजीव की तरफ से मैं तुमसे माफी मांगती हूँ शिवानी। प्लीज इसे माफ कर दो।

राजीव: पर माँ मैंने किया क्या है।

शिवानी: सॉरी राजीव, मैं ये सब आंटी को बताना तो नहीं चाहती थी पर अगर आज मैं ये आंटी को नहीं बताती तो तुम ये गलती दोबारा भी कर सकते थे।

राजीव: ये सब क्या हो रहा है? माँ शिवानी झूठ बोल रही है मैंने कुछ नहीं किया। बल्कि आज शिवानी ने ही मेरे साथ ज़बरदस्ती की। इसने पहले भी ऐसा.....

राजीव की बात पूरी भी नहीं हुई थी की मिसेज वर्मा ने फिर से उसके गाल पर एक तमाचा मार दिया। राजीव कहता रहा पर किसी ने उसकी एक न सुनी। शिवानी अपनी चालाकी पर मुसकुराती हुए घर से चली गई।

राजीव ने अपनी मम्मी को समझाने की बहुत कोशिश की। पर वो कुछ समझने को तैयार ही नहीं थी। वह तो बस रोती जा रही थी।

राजीव: प्लीज चुप हो जाओ मम्मी। आप मेरी बात समझो। मैंने कुछ नहीं किया। बल्कि शिवानी ने।

मिसेज वर्मा: चुप कर रज्जी। मुझे नहीं पता था की तुम ये सब कर सकते हो। क्या यही संस्कार दिए थे मैंने तुम्हें?

राजीव: मम्मी मैं सच कह रहा हूँ। शिवानी ने मेरे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की। एक बार नहीं बल्कि दो बार। आज भी जब मैं उसके घर पढ़ने गया तो उसने मेरा रेप करने की कोशिश की।

मिसेज वर्मा: रेप? तेरा दिमाग तो खराब नहीं हो गया। लड़को का रेप नहीं होता रज्जी। रेप लड़कियों का होता है वही तो तूने आज शिवानी के साथ करने की कोशिश की। तुझे शर्म आनी चाहिए।

राजीव: नहीं मम्मी प्लीज मेरी बात का विश्वास करो। मैंने कुछ नही किया।

वह सब बातें उन्हें बताने की कोशिश करता है पर वो बिना कुछ सुने ही वहाँ से उठकर चली जाती हैं।

इसके बाद से शिवानी, राजीव और मिसेज वर्मा ने मिलना लगभग बंद कर दिया था। पर शिवानी बार-बार राजीव को फोन करके रिझाने की कोशिश करती रहती थी।

राजीव इन सब बातों से परेशान हो चुका था। और इससे ज्यादा परेशान वो इस बात से था की उसकी मम्मी भी उसकी बातों का विश्वास नहीं कर रही है। राजीव ने इसे ठीक करना चाहता था। उसने शिवानी को फोन करके मिलने के लिए कहा। शिवानी को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उन दोनों ने दिन का टाइम फिक्स किया जब मिसेज वर्मा घर पर नहीं होती।

2 दिन बाद प्लान के अनुसार शिवानी राजीव के घर पर आई। शिवानी ने राजीव की पसंद के रंग का सूट पहना हुआ था। वह घर पर आई। राजीव ने उसके लिए दरवाजा खोला और उसे अपने कमरे में ले गया।

वर्तनाम दिन

राजीव: देखो शिवानी मैं चाहता हूँ की तुम मम्मी को सब सच बता दो।

शिवानी: ठीक है मैं वो करूंगी जो तुम चाहते हो इसके लिए तुम्हें भी वह करना होगा जो मैं चाहती हूँ।

राजीव: देखो मैं तुम्हें मना कर चुका हूँ। तुम्हारे झूठ की वजह से मेरी मम्मी मुझपर विश्वास नहीं कर रही हैं।

शिवानी: मैं वो सब नहीं करती तो तुम आज मुझे यहाँ कैसे बुलाते राजीव।

इतना बोलकर शिवानी ने एक बार फिर राजीव को बिस्तर पर गिरा दिया।

प्लीज मुझे छोड़ दो।

मुझे जाने दो। तुम ये ठीक नहीं कर रही हो। मैंने इसलिए तुम्हें घर पर नहीं बुलाया था।

मैं बस हमारी गलतियों को ठीक करना चाहता था।

वो हाथ जोड़कर, कुछ दुबका हुआ-सा बिस्तर के ऊपर बैठा था।

शिवानी उसी के पास लगभग न जितने कपड़ों में खड़ी थी और राजीव की कमीज़ के बटन खोल रही थी। पर मैं तो ये गलती तुम्हारे साथ बार-बार करना चाहती हूँ।

राजीव सिर्फ़ हाथ जोड़कर उसके सामने गिड़गिड़ा रहा था।

शिवानी: शश्श।।। शोर मत करो। कोई आ जाएगा। फिर हमारे प्यार में डिसटर्ब होगा।

राजीव: प्लीज मुझे जाने दो, वरना मैं शोर मचा दूंगा।

शिवानी: हाए! तुम कितने क्यूट हो राजीव। तुम्हारी ऐसी मासूम बातें ही तो मुझे तुम्हारा दीवाना बना देती है। तुम्हें क्या लगता है तुम शोर मचाओगे और लोग तुम्हारी बात मान लेगी।

अब तक शिवानी राजीव की कमीज़ के सब बटन खोल देती है और राजीव एक बार फिर रोने और गिड़गिड़ाने लगता है। शिवानी अपने कपड़े भी उतार देती है। तभी किसी के दरवाजा खोलने की आवाज़ आती है। इससे पहले की राजीव अपने आपको संभाल पता शिवानी बिस्तर पर लेट कर राजीव को अपने ऊपर खींच लेती है। तभी मिसेज वर्मा कमरे मे आ गई।

राजीव और शिवानी को ऐसी हालत मे देखकर वह एक बार फिर राजीव को थप्पड़ दिया और शिवानी खुद को बचाने के लिए रोती हुई घर चली गई। मिसेज वर्मा भी राजीव को कमरे में अकेले छोडकर चली गई। राजीव ने कमरा बंद करके के खुद को अंदर बंद कर लिया। कुछ देर बाद जब मिसेज वर्मा राजीव के कमरे का दरवाज़ा खोला तो राजीव को सामने पंखे पर लटका हुआ पाया। वह चीखती चिल्लाती कमरे से बाहर आ गई। तभी पड़ोस के कुछ लोगों को बुलाया गया। उनकी मदद से राजीव को नीचे उतारा गया।

मिसेज वर्मा को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। उन्हें लगा की उनके बेटे से जो गलती हुए है उसके कारण उसने ऐसा किया। राजीव की खुदखुशी की खबर सुनकर शिवानी घर तक आई तो मिसेज वर्मा उसे गले लगाकर रोने लगी। घर के बाहर लोगों की भीड़ लग चुकी थी। सब लोग खुदखुशी के अलग-अलग कारणों की अटकले लगा रहे थे। कोई इसे इम्तिहान का दवाब बोलता तो कोई लड़की का चक्कर। अफवाहों के बीच से नजरे बचाते हुए मिसेज वर्मा, शिवानी और कुछ पड़ोसियों ने मिलकर राजीव का अंतिमसंस्कार किया। ऐसे ही दिन बीतते रहे। मिसेज वर्मा अब अकेली हो गई थी। वो जब भी राजीव को याद करती तो उन्हे उसकी गलती याद आ जाती और जब वह उसे भूलने की कोशिश करती तो शिवानी का चेहरा उन्हे उसका एहसास दिला देते।

दिन यूँ ही बीतते जा रहे थे। कुछ दिनों बाद राजीव का कमरा साफ़ करते हुए मिसेज वर्मा को राजीव के बिस्तर पर तकिये के नीचे दबी हुई एक सी.डी दिखाई दी। उन्होने वह सी.डी कम्प्युटर में लगाई और देखने लगी।

उन्होने जो देखा वो कुछ यूँ था... उसमे राजीव ने अपने रिकॉर्डिंग की हुई थी।

मम्मी तब मैं शायद 11 या 12 साल का ही रहा होंगा जब पापा चले हमे छोड़कर चले गए थे। आपने अकेले मुझे संभाला, मुझे अच्छी परवरिश दी। आपको याद है जब मैं 15 साल का था तो आप और मैं साथ में बैठ कर अखबार पढ़ रहे थे। उसमे रेप शब्द पढ़कर मैंने आपसे उसके बारे मे जानना चाहा था।

याद है आपने मुझे क्या बताया था। जब हम किसी की मर्ज़ी के बिना किसी के साथ संबंध बनाने की कोशिश करते हैं तो वो रेप होता है, मतलब बलात्कार। पर मम्मी आपने ये नहीं बताया था की रेप बस लड़कियों या बस लड़कों का होता है। मम्मी मेरे साथ भी शिवानी ने ज़बरदस्ती करने की कोशिश की थी। उसने मेरा मानसिक और शारीरिक शोषण किया था पर जब मैंने आपको इस बारे में बताया तो आपने विश्वास नहीं किया। मम्मी आज मैं आपको बताना चाहता हूँ, रेप केवल लड़कियों का नहीं बल्कि लड़कों का भी होता है। ज़बरदस्ती किसे के साथ हो , ज़बरदस्ती होती है और क्योंकि हमारे समाज में केवल लड़कों को गलत समझा जाता है तो लड़कियाँ ऐसे हरकत करके भी बच जाती है। मम्मी मैं जानता हूँ की मैं गलत कर रहा हूँ पर मैं यूँ आपकी नज़रों में गिर के नहीं जी सकता। इसलिए ये कर रहा हूँ। और मैं नहीं चाहता की आप जिंदगीभर इस शर्मिंदगी के साथ जीवन बीताए की आपके बेटे ने कुछ गलत काम किया है आपके लिए ये सी.डी छोड़ के जा रहा हूँ।

इसके बाद विडियो में खुदखुशी वाले दिन हुई राजीव और शिवानी के बातचीत की रिकॉर्डिंग थी। वो सब देखकर मिसेज वर्मा की आँखें फटी की फटी रह गई। उन्हे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। उन्हे अफसोस हुआ कि क्यों वो अपने बेटे पर भरोसा न कर पायी। पर अब वो अपने बेटे को इंसाफ दिलवाना चाहती थी। वह वो सी.डी लेकर पुलिस में गई। पुलिस ने वह सबकुछ देखकर शिवानी को गिरफ्तार कर लिया।

उन्होने अपने बेटे को इंसाफ तो दिलवा दिया था पर अपने बेटे पर अविश्वास के कारण उसे खो दिया था।

रेप, एक ऐसा शब्द जो हम आए दिन खबरों में सुनते और पढ़ते है और उसमें या तो ज़्यादातर रेप लड़कियों के होते है या छोटे बच्चों के। हम कभी लड़के के रेप की खबर नहीं मिलती क्योंकि मिसेज वर्मा कि तरह ही हमने भी ये मान लिया है कि रेप केवल लड़कियों का होता है चाहे वो बच्ची हो या जवान। ज़्यादातर लड़के तो अपने साथ हुए रेप के बारे में किसी को बताते भी नहीं हैं और जो बताने की हिम्मत करते हैं उनका विश्वास नहीं किया जाता।

हमें समझना होगा की रेप, रेप होता है फिर चाहे वो लड़की का हो या लड़के का।

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