पात्र परिचय

अजीत- एक नवविवाहित युवक

रोहित- एक अविवाहित युवक (अजीत का दोस्त)

श्वेता – अजीत की पत्नि

प्रीति- श्वेता की सहेली

दृश्य १

( ऑफिस का दृश्य है। रोहित कुर्सी पर बैठा है, और अपने सामने रखी हुई टेबल पर रखे पेपर पर कुछ लिख रहा है। अजीत का हाथ में बैग लेकर हड़बड़ाते हुए प्रवेश )

रोहित -(अजीत को देखकर ) क्या यार ! आज भी पूरे पंद्रह मिनिट लेट है तू , वो तो अच्छा हुआ की बॉस यहाँ पर नहीं आया ,नहीं तो आज तो तेरी शामत आ जाती।

अजीत -हाँ ,मेरी तो शामत ही शामत है, घर में शामत ऑफिस में शामत

रोहित -घर में किस बात की शामत है बे , भाभी के हाथ का खाना खाने मिलता है गर्मागर्म परांठे , और इधर मुझे देख सूखी ब्रेड खा -खा कर खुद भी सूखता जा रहा हूँ। ना जाने कब मेरी शादी होगी और गर्मागर्म परांठे बनाने वाली आयेगी।

अजीत - (टाई ढीली करते हुए रिलैक्स बैठने की कोशिश करता हुआ) हाँ -हाँ , मैंने भी यही सोच कर शादी की थी गर्मागर्म परांठें जरूर मिल जाते है पर साथ में जली -कटी बातों का सालन भी होता है।

रोहित - कौनसी जली- कटी बातें सुनाती हैं भाभी ?


अजीत - वही रोज की झिकझिक तुमने गीला तौलिया पलंग पर क्यों छोड़ा, सोफे पर अख़बार क्यों रख दिया , तंग आ गया हूँ अकेला था तो मन का राजा था ,जहाँ मन चाहे वहां सामान रखो अब तो सर पर चौबीस घंटे तलवार लटकती रहती है ,परेशान हो गया हूँ यह भी क्या ,अपने मन से कुछ भी नहीं कर सकता।

रोहित- कुछ भी बकवास नहीं कर शादी के बाद ही तेरा घर, घर लगता है पहले तो कबाड़खाना लगता था। श्वेता भाभी तो तेरे जीवन में बहार बन कर आई हैं।

अजीत - हाँ -हाँ दूर के ढोल सुहावने ही होते हैं ,तेरी शादी नहीं हुई ना इसलिये सब कुछ अच्छा लग रहा है। मैं तो तुझे सलाह दूंगा कुछ दिन मत कर शादी ,कुछ और मौज- मस्ती कर ले।

रोहित- एक प्यारी सी बीवी साथ में हो तभी तो मौज -मस्ती होगी, खुद शादी करके मजे कर रहा है, और यह मुझे क्या ऊंटपटांग सलाह दे रहा है। तुझे मालूम है मैं शादी के लिए मरा जा रहा हूँ |

अजीत - ठीक है बच्चू ,तुझे कुँए में कूदने का इतना ही शौक है तो कूद कुएं में ,समझा रहा हूँ कबसे की शादी अँधा कुआँ होती है ,आँख में पट्टी बांधकर बस बीवी की बात माननी पड़ती है, उसकी हाँ में हाँ मिलानी पड़ती है।

रोहित - पर उसमें भी एक मजा है मेरे यार ,बस मेरी शादी करा दे ........

अजीत – अक्ल के अंधे को अब क्या समझाऊँ ठीक है कर ले शादी तू भी आजा मेरी बिरादरी में। उस रायबरेली वाली लड़की का क्या हुआ जिससे बात चल रही थी ?

रोहित – बस हर बार की तरह कोई जवाब नहीं आया, मुझे तो समझ नहीं आता इन लड़कियों को क्या चाहिए होता है तू देख तो रहा है , अच्छा –खासा कमाता हूँ ,देखने में भी बुरा नहीं हूँ ,पता नहीं ये हूर की परियाँ किससे शादी करना चाहती हैं। देख रहा है ना तू ....कितने पापड़ बेलने पड़ रहें हैं एक लड़की पाने के लिए.......

अजीत – तू पापड़ बेल रहा है और मैं पापड़ सा बिल रहा हूँ, रोज श्वेता के बिल पे करते –करते, कितनी भी पूरी करो उसकी फरमाईशें पूरी ही नहीं होती |

रोहित - (अजीत की बात काटते हुए) तू घूम -फिर कर अपनी ही क्यों सुनाने लगता है , एक गैर शादीशुदा को शादी की बुराईयाँ बता रहा है। जिसने अभी तक शादी का लड्डू चखा ही नहीं उसे कह रहा है कि लड्डू कड़वा है।

अजीत - बस यार रोहित यह शादी का लड्डू ऐसा ही है ,जो खाए पछताये जो न खाये वह भी पछ्ताये ....

रोहित - इसीलिए तो कह रहा हूँ मुझे यह लड्डू खाने से वंचित नहीं रहना, खा कर ही पछताउँगा

(तभी फोन की घंटी बजती है )

अजीत - (हड़बड़ा कर फोन उठाते हुए ) बस चुप कर यार , देख श्वेता का फोन आ रहा है

हलो श्वेता .......हलो हाँ बोलो श्वेता .....

(मंच के दूसरे कोने से श्वेता फोन पर बात कर रही है )

श्वेता – हाय डिअर, क्या कर रहे हो

अजीत – श्वेता .. ऑफिस में आया हूँ तो क्या करूँगा ...काम कर रहा हूँ

श्वेता - ठीक है करो काम मैंने तो बस इतना कहने के लिए फोन किया था कि आज जल्दी घर आ जाना

अजीत – जल्दी कैसे आ सकता हूँ , छुट्टी होने पर ही आऊँगा

श्वेता- हाँ ..हाँ छुट्टी होने पर ही आना पर बाहर कहीं समय बर्बाद मत करना तुम्हारे दोस्तों के साथ

अजीत - अब दोस्त ही कौनसे बचे हैं, सबकी शादी हो गई ले दे कर एक रोहित है

श्वेता - हाँ वही कह रही हूँ , साथ में रोहित को भी ले आना

अजीत - उसे क्यों ?

श्वेता – अजीत तुम्हारी यही खराब आदत है तुम प्रश्न बहुत करते हो, ठीक है ...बता देती हूँ शाम को मेरी सहेली प्रीति आ रही है ....अरे वही जिसने अपनी शादी में तुम्हारे जूते छिपाए थे ,याद आया न कुछ ... हाँ , बस वह भी लड़का देख रही है, मैंने सोचा रोहित से मिला दूँ

अजीत - हाँ याद आया ...उसे कैसे भूल सकता हूँ पर अपना रोहित तो बहुत सीधा -सादा है उसके साथ रोहित की जोड़ी कैसे बन सकती है ?

श्वेता – जानती हूँ तुम्हारा दोस्त कितना सीधा है, सब मालूम है मुझे , प्रीति थोड़ी सी तेज है पर दिल की बुरी नहीं है

अजीत – हाँ बाबा ... तुम्हारी सहेली है ,बुरी कैसे हो सकती है ?

श्वेता – तो ठीक है , शाम को रोहित के साथ घर आओ कुछ प्लान करते हैं

अजीत – ठीक है , बाय डार्लिंग ....

श्वेता - बाय ..बाय ....सीयू इन द इवनिंग

( अजीत रोहित से जो फाइल में कुछ लिख रहा है )

अजीत – रोहित... श्वेता ने शाम को तुम्हें घर बुलाया है |

रोहित - पर मुझे क्यों ?

अजीत – बस समझ ले तेरी शामत आने वाली है

रोहित- (कुछ न समझने की मुद्रा में ) मेरी शामत .... पर मेरी शामत क्यों ?

अजीत - अरे भाई वह लड़की ही शामत है

रोहित - कौनसी लड़की ? पहेलियाँ मत बुझा .... जल्दी से बता क्या बात है, भाभी ने क्या कहा ?

अजीत - अरे , शाम को श्वेता की सहेली प्रीति आ रही है, वह भी लड़का ढूंढ रही है, श्वेता तुम्हारी बात उससे चलाना चाहती है |

रोहित – यह तो खुशी की बात है, तू क्यों कह रहा है ... शामत आ रही है तू जलता है मुझसे नहीं चाहता कि कोई लड़की मुझे मिले |

अजीत – बकवास मत कर सही कह रहा हूँ मैं ,यह प्रीति है ना पूरी “तनु वेड्स मनु” की तनु है कितने लड़के उसके आगे- पीछे घूमते हैं ...

रोहित - छी छी ...तू चाहता है ऐसी चरित्रहीन से मैं शादी करूँ

अजीत – मैं नहीं चाहता बे .....श्वेता चाहती है....

रोहित - ठीक है भाभी ने बुलाया है तो चलता हूँ , देख तो लूँ इस तनु को ...कौनसा उससे मिलने से रिश्ता ही तय हो जाएगा, अब काम कर शाम तक यह सारी फाइलस निपटानी हैं।

अजीत – हाँ.. हाँ

(अजीत और रोहित दोनों काम करते हैं )

दृश्य २

( अजीत के घर का दृश्य है ,चार कुर्सियां रखी हैं , श्वेता और प्रीति दो कुर्सियों पर बैठे हैं, दो कुर्सियाँ खाली हैं )

श्वेता - पूरे सात बज गए ,ये दोनों अब तक नहीं पहुंचे , न जाने किस बेजवाबदार इंसान से शादी की है, समय का कोई ख्याल ही नहीं ।

प्रीति - क्यों फ़िक्र करती है श्वेता , शाम के सात ही बजे हैं कोई रात के दो नहीं बज गए

श्वेता – फिर भी इनको अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए जो कहा उसे मानना चाहिये ,तू नहीं जानती प्रीति इन पतियों की नकेल हमारे हाथ में होनी चाहिए नहीं तो इन्हें हाथ से निकलते देर नहीं लगती (सेल फोन हाथ में लेकर) अभी डांट पिलाती हूँ।

( तभी सामने से रोहित और अजीत आते हुए दिखाई देते हैं )

श्वेता - अरे आ गए आप लोग ...अभी फोन ही कर रही थी ...

रोहित – भाभी आप बुलाएँ और हम न आएं ,इतनी तो हममें हिम्मत नहीं

श्वेता - रोहित , यह मेरी सहेली प्रीति रायबरेली से आई है

रोहित- हलो ..

प्रीति - हलो ( तुरंत अजीत की ओर मुखातिब होकर ) क्या बात है जीजाजी कैसे हैं आप ? आज बड़ी चुप्पी लगा रखी है। श्वेता .. तूने क्या इनके मुंह पर ताला लगाया है, यदि लगाया है तो चाबी दे दे खोल देती हूँ ....

( कह कर प्रीति जोर-जोर से हँसने लगती है )

अजीत – (अचकचा कर ) ऐसी कोई बात नहीं प्रीति , मैंने सोचा पहले तुम्हारी बात रोहित से तो हो जाये ।

प्रीति – उनसे भी बात हो ही जायेगी पर आपसे तो हमारी पुरानी पहचान है

अजीत - हाँ हाँ ...क्यों नहीं कैसी हो तुम ? बड़े दिनों बाद फुर्सत मिली यहाँ आने की

प्रीति – जीजाजी एग्जाम थे मेरे , आप तो जानते हैं ,मैं लॉ की पढाई कर रही हूँ |

श्वेता - यह फाइनल इयर है ,अब प्रेक्टिस करेगी और साथ –साथ में लड़का भी देख रहे हैं ,इसके परिवार वाले

अजीत - बहुत अच्छी बात है फिर आया कोई पसंद ?

प्रीति - हैं तो बहुत , पर लंगूरों के बीच अंगूर ढूंढ़ना बड़ा कठिन काम है |

अजीत - (हँसते हुए ) तुमने बेचारे लड़को को लंगूर कह दिया। सच में शायद तुम नहीं चाहती कि लंगूर को तुम जैसी हूर मिल जाये |

रोहित - वैसे आप किस बिला पर लड़कों को लंगूर कह रही हैं , कैसा लड़का चाहती हैं आप ?

श्वेता - आप लोग बातें करें , मैं चाय बना कर लाती हूँ

प्रीति - श्वेता , आज क्या चाय में ही निपटा रही है?

श्वेता - चुप कर जरुरत से ज्यादा बोलती है तू

अजीत - मैं भी फ्रेश होकर अभी आता हूँ

(श्वेता और अजीत अंदर जाते हैं )

प्रीति - कैसा लड़का चाहती हूँ मैं ?यह तो मुझे भी नही मालूम बस धिनचाक होना चाहिये।

रोहित - व्हाट इज दिस धिनचाक ?

प्रीति – यानी उसे देख कर दिल में फुलझड़ियाँ और पटाखे फूटने चाहिये |

रोहित - भगवान करे ऐसा लड़का आपको जल्दी ही मिल जाये |

प्रीति - वो तो मिल ही जायेगा ,अभी कानपुर से रिश्ता आया था ,वह तो मेरे इम्तहानों की वजह से मैंने बिना देखे ही ना कह दी |

रोहित -आप रायबरेली से है ना , मुझे भी रायबरेली की एक लड़की का रिश्ता आया था और मैं कानपुर का हूँ

प्रीति - आप कानपुर के.... मैं रायबरेली की ....ऐसा इत्तफाक कैसे हो सकता है ,कहीं आप ही तो वे नहीं

रोहित – मेरे पास लड़की का प्रोफाइल है ,बस फोटो नहीं है ( बैग से पेपर निकलता है ) यह देखिये हाँ नाम है प्रीति गुप्ता ...

प्रीति - अच्छा तो आप ही हैं ....वही तभी मौसीजी कह रही थी कि एक बार फोटो देख ले लड़का हीरा है हीरा

रोहित - फिर भी आपने फोटो नहीं देखा

प्रीति - मैंने उन्हें जवाब दिया मुझे कोई अंगूठी में नहीं जड़ाना हीरे को

रोहित - अंगूठी में नहीं जड़ा सकती थी, दिल में तो बसा सकती थी

प्रीति - हाँ काश ... तब फोटो देख लेती तो…

रोहित -तो ...बोलिए ना ....कर लेती न मुझे पसंद ?

प्रीति -शायद

रोहित - तुम लड़कियों का यही प्रॉबलम है ,जो दिल में है वो जुबां पर नहीं लाती। तुम्हारी नजरों में मैं भी शायद लंगूर हूँ , पर लंगूर भी इंसान के ही पूर्वज थे |

प्रीति - अरे आप तो बुरा मान गये। आप नहीं जानते कि क्यों मैं शादी को लेकर इतना परेशान हो जाती हूँ ,कोई निर्णय नहीं ले पाती हूँ , और लड़कों में खामियाँ ढूंढ़ती हूँ क्योंकि .....

रोहित – हाँ बोलिए न क्यों ....क्यों ढूँढती हैं आप लड़कों में खामियाँ....

प्रीति -( रुंधे गले से ) क्योंकि उन जल्लादों ने ...पच्चीस लाख रूपये पूरे न दे पाने के कारण मेरी दीदी को जिन्दा जला दिया ......पापा तो रूपये जमा कर ही रहे थे उन्होंने राह भी नहीं देखी ...

( प्रीति की आँखों से आंसू बहने लगते हैं )

रोहित-(उठ कर उसके पीछे जा जिस कुर्सी पर वह बैठी है, कुर्सी के हत्थों को पकड़ लेता है ) बस चुप हो जाइये ...ऐसे दरिंदों को तो भगवान खुद सजा देता है

प्रीति- (आंसू पोंछते हुये ) माफ कीजिये ...यूँ पहली मुलाकात में आपके सामने मुझे यह बात नहीं करनी चाहिये थी

रोहित –कोई बात नहीं , आपका मन तो हल्का हो गया

प्रीति –( कुछ कठोर आवाज में ) तबसे मैंने तय किया है ...मैं शादी उससे ही करुँगी जो एक पैसा भी दहेज में न ले ,मुझे दो कपड़ों में स्वीकार करे |

रोहित – बस प्रीति , अब और कुछ बताने की जरुरत नहीं , तुम्हारे इस तेजतर्रार स्वाभाव के पीछे जो मासूम दिल है उसे मैंने देख लिया है , मैं तुम्हें बिना दहेज स्वीकार करूँगा ,तुम मेरे लिये अनमोल हो |

प्रीति - रोहित , मैं आप जैसा ही लड़का चाहती थी ,पर क्या आपके माता-पिता को बिना दहेज विवाह स्वीकार होगा ?

रोहित- मेरे माता-पिता मेरे निर्णय को पूरा सम्मान देंगे ....और मैं अपनी छोटी बहिन का विवाह भी दहेज के बिना ही करूँगा , यह मेरा वादा है |

( तभी श्वेता का हाथ में चाय का ट्रे लेकर प्रवेश साथ में अजीत भी है )

श्वेता - अब बता प्रीति रानी , हमारे रोहित तुम्हें पसंद हैं कि नहीं ?

अजीत – क्यों नहीं पसंद आयेगा , आखिर यार किसका है |

रोहित - भाभी , मुझे तो मालूम ही नहीं था कि आप इस तरह मेरी बात बना देंगी |

श्वेता – हाँ रोहित, लड़की तो घर में ही थी और तुम न जाने कहाँ -कहाँ ढूंढ रहे थे |

अजीत - (दोनों हाथ उठकर नाचते हुए ) मेरे यार की शादी है ...

प्रीति - जीजाजी , हमारी शादी में आप दोनों को नाचना है |

अजीत – जरूर , तेरी शादी में तो धमाल होगी एक तरफ मेरा दोस्त दूल्हा और एक तरफ श्वेता की सहेली दुल्हन ...वाह मजा आ जायेगा |

रोहित - सब कुछ इतनी जल्दी हो जायेगा सोचा भी नहीं था |

श्वेता - हाँ रोहित , भगवान जब देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है, उसने सबके लिए जोड़ीदार बनाया है |

अजीत -हाँ ,जैसे उसने मेरे लिए तुम्हें बनाया (श्वेता के गले में हाथ डालता है )

रोहित और प्रीति एक साथ – और मेरे लिए तुम्हें

( दोनों एक -दूसरे के गले में हाथ डालते हैं )


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