आज शिवानी बहुत खुश थी क्योंकि आज उसकी जिंदगी का सबसे खास दिन था।
उसका एक सपना तो कुछ समय पहले ही पूरा हो चुका था डॉक्टर बनने का।
और दूसरा सपना आज पूरा होने जा रहा था ,प्रत्युष को पाकर।

शिवानी बचपन से एक अंतर्मुखी स्वभाव की लड़की थी ना कभी बाहर जाना ना कभी किसी से बात करना , पता नहीं उसके मन में पुरुषों और लड़कों की प्रति घृणा के भाव क्यों भरे हुए थे।कभी किसी लड़के से बात ही नहीं करना चाहती थी ।
दसवीं का इम्तिहान पास करने के बाद उसके मम्मी पापा ने उसे पढ़ाई करने के लिए बड़े शहर मे भेजा । और उसके पीछे कारण भी यही था की खुले माहौल मे जाकर शिवानी के स्वभाव मे थोड़ा बदलाव आ जाये।
उसकी सोच विकसित हो सके और उसके मन मे जो घृणा के भाव थे सभी पुरुषों के लिए वो भी
कम हो जाये।
उसकी सोच ऐसी क्यों थी इसके पीछे कारण क्या था वो उसके घर के लोग कभी समझ ही नही पाये,ना ही उन्होंने जानने की कोशिश ही की।बस शिवानी की माँ उसे हमेशा समझाया करती थी कि सब लड़के एक जैसे नहीं होते हैं लेकिन बचपन से जो बात मन मे बैठ जाती है उसे फिर मन से निकालना नामुमकिन ही होता है।
खैर काफी समझा बुझा कर माँ ने शिवानी को गर्ल्स हॉस्टल मे शिफ्ट किया और वापस आ गयी।
आज शिवानी के कॉलेज का पहला दिन था वहां भी उसने गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन लिया क्योंकि लड़कों के साथ वह असहज महसूस करती थी। इतनी नफरत की वजह कोई समझ ही नही पा रहा था,लेकिन बड़े होने के बाद जब समझदारी आई तो उसे इतना तो समझ मे आ ही गया था की उसके साथ बचपन मे जो हुआ वो बहुत बुरा था।अब उसकी नफरत घटने के बजाए बढ़ती ही जा रही थी ...|
समय बीतता गया शिवानी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा भी अच्छे अंकों से पास कर ली और अब उसने जो सपना देखा था डॉक्टर बनने का उसके लिए खुद को तैयार करना था।
पढ़ाई मे तो शिवानी काफी आगे थी ही जल्द ही उसने मेडिकल के इंट्रेंस मे सफलता प्राप्त कर ली और उसे एक सरकारी मेडिकल कॉलेज मे एडमिशन भी मिल गया।
अब यहां सामना हुआ उसका एक ऐसे माहौल से जिससे शिवानी हमेशा भागती आई थी।
उसकी कक्षा मे लड़कियों से ज्यादा लड़के ही थे और वो अब कुछ कर भी नही सकती थी शिवाय वहां रहके पढ़ाई करने के और उसी माहौल मे घुलने मिलने के।
वहीं घुलते मिलते उसकी मुलाकात हुई प्रत्युष से जो पढ़ाई मे काफी तेज था और शिवानी को अगर कोई दिक्कत होती तो वो उसे समझा दिया करता था।शिवानी प्रत्युष के अच्छे स्वभाव से काफी प्रभावित हुई क्योंकि ये लड़का उसकी सोच से बिल्कुल विपरीत था।धीरे धीरे दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गए और धीरे धीरे दोनो के बीच प्यार के अंकुर भी फुट पड़े लेकिन दोनो एक दूसरे से कुछ कह नही पा रहे थे ,हालांकि दोनो मे दोस्ती बहुत गहरी हो चुकी थी और दोनो एक दूसरे से सारी बातें शेयर भी करते थे।फिर एक दिन प्रत्युष ने उसके पुरुषों के प्रति घृणा का कारण पूछा ,शिवानी बिना कुछ कहे चली गयी।प्रत्युष ने सोचा शायद शिवानी को बुरा लगा इसलिए फिर उसने कभी पूछा ही नही की क्या वजह है इस नफरत की।
एक दिन शिवानी कॉलेज से लौटकर अपने हॉस्टल की तरफ जा रही थी कि तभी कुछ लड़के उसका पीछा करने लगे,जिसका एहसास शिवानी को हो चुका था और वो तेजी से कदम बढ़ाने लगी अपने हॉस्टल की तरफ लेकिन सुनसान जगह देखते ही लड़कों ने उसके साथ छेड़खानी शुरू कर दी, अब वो किसी तरह अपना हाथ छुड़ा के भागी तो लड़के भी उसके पीछे भागने लगे। दौड़ते दौड़ते वो एक इंसान से टकराई , वो प्रत्युष था उसका सबसे अच्छा दोस्त। अपने परिवार के पुरुषों को छोड़कर वो किसी पर विश्वास करती थी तो वो था प्रत्युष।
प्रत्युष को देखते ही सारे लड़के भाग खड़े हुए और अचानक से शिवानी को ये महसूस हुआ की यही वो लड़का है जिसके साथ वो खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती है।वहीं शिवानी ने उसका धन्यवाद किया और अपने दिल की बात भी बताई,प्रत्युष ये सुनकर बहुत खुश हो गया की शिवानी भी उसे पसंद करती है और खुश हो भी क्यों न उसकी जिंदगी जो मिल गयी थी उसे। आखिरकार शिवानी ने वो सबसे बड़ी बात प्रत्युष को बताई जो वर्षों से उसने अपने दिल मे छुपाये रखा था।
बचपन मे वो जहाँ अपनी छोटी से दोस्त के घर खेलने जाया करती थी वहां उसके एक अंकल ने कई बार शिवानी के साथ कुछ ऐसा किया जिसका पता उसे बड़े होने के बाद चला ।
और सिर्फ वहां ही नही एक बार वो अपने एक रिश्तेदार के घर गयी वहां भी एक लड़के ने उसके साथ गलत करने की कोशिश की थी ।
और इन्ही दो घटनाओं के बाद शिवानी सभी पुरुषों को राक्षश समझने लगी थी और कितना दुखद था ये की आज भी एक उसके साथ वही होने वाला था पर भगवान का शुक्र था की आज प्रत्युष समय पर उन दानवों से रक्षा के लिए आ खड़ा हुआ। बचपन से अपने मन मे इतनी बड़ी बात छुपाये रखने से शिवानी का स्वभाव भी चिड़चिड़ा सा हो गया था ,आज प्रत्युष को सारी बातें बताकर वो काफी हल्का महसूस कर रही थी।
अब बारी थी अपने मम्मी पापा को मनाने की ।
शिवानी के मम्मी पापा बहुत खुश थे शिवानी मे इतना बदलाव देखकर,और जब उन्होंने प्रत्युष के बारे मे जाना तो वो तुरत राजी हो गए पर प्रत्युष के माँ पिताजी को मनाना मुश्किल सा लग रहा था क्योंकि वो पुराने ख्यालातों के थे और चुकि शिवानी एक दूसरे जाति की लड़की थी इसलिए वो दोनो साफ इंकार कर रहे थे।
पर वो कहते हैं न जब दो लोग सच्चा प्यार करते हैं तो पूरी कायनात आपको एक होने की दुआ देती है।
अपने एकलौते बेटे की जिद के आगे आखिरकार उनको झुकना ही पड़ा।

प्यार की ताकत के आगे कोई भी शक्ति नही टिक सकती ये शायद किसी ने ठीक ही कहा है तभी तो आज एक अंतर्मुखी स्वभाव की शिवानी प्रत्युष की दीवानी बन चुकी थी और प्रत्युष के प्यार की ताकत ही थी की शिवानी को उसने हमेशा के लिए अपना बना लिया।

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