ख्वाब या स्वप्न के बारे में अलग अलग लोगो की अलग अलग मान्यता है, कुछ कहते है की सपने देखने के लिए सोना जरूरी है ,कुछ के अनुसार सपने वो होती है जो आपको सोने नही देती |स्वप्न कभी पुरे होते है ,कभी नही होते ,स्वप्न देखने वाला कभी अपना आकलन न करके अपना स्थान स्वप्न में ऊँचा रखता है |वगैरह अलग अलग अवस्थाओ में सपनो की प्रकृति भी अलग अलग होती है |जैसे बेरोजगार नौकरी के सपने देखता है और नौकरी वाला शादी के सपने |
रवि एक सुन्दर नौजवान था जो आजकल शादी के सपने देख रहा था |उसके सपनो में एक परि यो की रानी आती ,थोड़े देर सपनो में रहती फिर catch me if u can कह कर भाग जाती थी |जब सपने सुनहरे होते है तो सुबह आँख देर से खुलती है ,तो रवि हर दिन 8 बजे तक पक्का उठ जाता था उससे ज्यादा देर नही लगाता था ,रवि मतलब एकदम टिप टॉप boy था जो पानी भी अपने हाथ से निकाल कर नही पिता था|उसकी माँ ही उसके आगे पीछे घूम घूम कर उसकी जरुरतो को पूरा करती थी |
8 बजे तो रिया भी उठती थी ,वही same problem ,सपने देखते देखते देखते बेचारी सुबह जल्दी उठ नही पाती थी |उसके सपनो में भी घोड़े में बैठा सुन्दर सजीला राजकुमार आता था ,और घोड़े में उसे बैठा कर दूर कही ले जाता था ,चल भाग चले पूरब की ओर गाना गाते गाते ,,,,,,,,,
नौकरी करने के साथ साथ रिया गृहकार्य में भी बहुत दकछ थी ,अपनी माँ के साथ मिलकर पूरा खाना बना लेती थी ,माँ बस थोडा मदद कर देती थी ,जैसे रोटी बनाना हो तो माँ आटा गुथ देती थी,रोटी बेल देती थी रिया उसको सेंक देती थी ,चावल बनाना हो तो माँ चावल धोकर ,कुकर में रखकर गैस में चढ़ा देती थी ,तब रिया 2 सिटी आने पर गैस बन्द कर देती थी ;)
वैसे ही खाना परोसने में माँ डाइनिंग टेबल में थाली जमाकर हर थाली में रोटी ,चावल ,दाल ,सब्जी निकाल कर परोस देती थी तब रिया हर एक थाली में एक एक आचार रख दिया करती थी ;)
अपनी बेटी को इतना कार्यकुशल देख कर रिया की माँ उसको बोलती भी थी ,बेटा इतना काम मत किया कर आचार भी मैं रख दूंगी |



कहते है रिश्ते तो ऊपर से ही बन के आये होते है नीचे तो सिर्फ हमको खोजना पड़ता है ,रवि और रिया का रिश्ता भी ऊपर से बन कर आया था और निचे उनके माता पिता ने खोज लिया | शुभ मुहूर्त में दोनों की शादी हो गयी |दोनों ही बहुत खुश थे और खुश हो भी क्यों ना आखिर में दोनों को सपनो की रानी और राजकुमार जो मिल गए थे |
सपना तो रवि की माँ भी देखा करती थी |एक सुन्दर ,सुशील ,गृहकार्य में दकछ बहु आएगी ,जो उसके रवि और पुरे घर को सम्हाल लेगी |अब सभी के ख्वाब का हकीकत से सामना अभी बाक

शादी के 4,5 दिन बाद सभी मेहमान जा चुके थे ,5 लोगो का परिवार था रवि का ,रवि की माँ के अनुसार घर में कोई खास
काम न था ,पर रिया के अनुसार घर में काम ही काम था ये पहला दिन था ,जब रिया वर्षो बाद सुबह 6 बजे उठी थी ,8
बजे तक सबके लिए नास्ता जो तैयार करना था ,ये काम हुआ फिर 10 बजे से खाना बनाने का काम ,खाना खाते तक 3 बज
गए ,शाम में फिर नास्ता और रात में खाना ,ऐसा कुछ दिनचर्या था |
2दिन में ही रिया की हालत पतली ,और हो भी क्यों न ,आचार परोसने से ज्यादा तो कुछ किया नही था मायके , महलो का राजा मिला रानी बेटी राज करेगी,,,,,ऐसा ही कुछ गाना सुनते सुनते उसकी विदाई हुई थी ,और ऐसा ही राज उसको करना था ,भावनाये अब रिया के मुह से हुंकार मारने लगे ,,,,,,यही है साला राज करना ,सुबह से शाम तक बस नौकरानी जैसे काम
करना ,,, इधर रवि बाबू अपने में मस्त ,,,,, तेरी मेरी मुरादों के दिन है रातों
को जग कर सोने के दिन है ,,,गाना गुनगुनाते हुए फुल रोमांटिक
मुड में रिया के मनोद सा से अनजान सुनहरे सपनो में खोये हुए रवि बाबू रिया के आगमन का इन्तेजार कर रहे थे |रिया जब तक कमरे में आई रात के 11 बज गए थे|थकान से बोझिल कदमो से जैसे ही रवि के गुनगुनाये गाने रिया के कान से टकराये ,न जाने क्यों वो गाने रिया को बिलकुल पसन्द नही आये |झल्लाते हुए रिया रवि से बोली ,बन्द करो ये गुनगुनाना |अब चौकने की बारी रवि थी ,रवि समझ नही पाया आखिर ऐसा मैंने क्या कर दिया की ये आते ही झल्ला रही है | रोमांस का भुत तो इस एक वाक्य ने खत्म ही कर दिया |पूछा रिया से की क्या हुआ ??
बस इतना पूछना था की रिया फट पड़ी ,,,,तुमको बीवी चाहिए थी की नौकरानी ,,,सुबह से शाम बस किचन ,,खाना खाना और सिर्फ खाना ,,,,और कुछ काम धंधा है की नही ,,,,अब क्या मेरी पूरी जिंदगी ऐसी ही किचन में चलेगी | फिर रिया ने एक एक कार्य जो उसने किचन में किया उसका विवरण दे डाला ,1 घंटे इस विवरण में लग गए |
रवि के साथ ये पहली बार हुआ की माँ के अलावा किसी औरत ने ऐसा बत्ती दिया हो |हमेसा बिंदास रहने वाला रवि अब थोडा सीरियस था की यदि रिया के वर्कलोड को थोडा कम न किया गया ,तो आगे की जिंदगी में ये भूचाल ला सकती है |
हालाँकि ऐसा भी नही था की सब काम रिया ही करती हो ,50%काम रवि की माँ पूरा कर देती थी ,50% रिया के हिस्से में होता था ,लेकिन पुरे काम का केवल 20% ही रिया ने अपने मायके में किया था जिसके कारन यहाँ अपने हिस्से का 30% ज्यादा काम वो बर्दास्त नही कर पा रही थी |
उधर रवि की माँ को भी लगता था ,अधिकांस काम तो मैंने कर दिया है ,थोडा सा काम ही रिया को करना है ,लेकिन वो थोडा सा काम ही रिया को भारी पड़ रहा था |
अब रवि भी धीरे धीरे काम में हाथ बटाने लगा,हाथ बटाना मतलब अपने तरफ से उनके काम को नही बढ़ाता था | अब पानी खुद से निकाल कर पी लेता था ,खाना खाने के बाद अपने बर्तन खुद ही बेसिन में रख देता था ,उस से कम से कम रिया का मुड कुछ कम खराब होता था |लेकिन रवि में आया ये परिवर्तन माँ की आँखों से छिप ना सका |
क्या बात है बेटा ,,,आजकल तो तुम बहुत सा काम खुद कर ले रहे हो ,पहले तो पानी भी खुद से नही निकाल के पीते थे ,माँ ने कहा |नही ऐसी कोई बात नही है ,रवि ने कहा ,,,,,लेकिन अनुभवी माँ की नजरें इस अर्धसत्य को पहचान गयी थी |
अब रवि की माँ से भी कोई डिमांड नही रहती थी ,क्योकि अब माँ से कुछ खाने की इच्छा जताता ,माँ रिया को बनाने के लिए ,रिया बनाती ,फिर अकेले में रवि की क्लास लेती

कोई भी डिमांड रवि को अब भारी पड़ने लगा |
सपने रवि को अब भी आते थे ,लेकिन सपनो के प्रकार अब बदल गए थे |अब दो लोग सपने में बैडमिंटन खेलते हुए दीखते थे ,वो उसकी माँ और बीवी होती थी ,और शटल कॉक की जगह रवि खुद अपने को पाता |
कभी क्रिकेट के सपने आते थे ,जिसमे नॉन स्ट्राइक एंड से रवि की माँ बॉल बॉल फेकती थी ,स्ट्राइक एन्ड में रिया बैटिंग करते हुए जोर से बॉल को हिट करती थी ,लेकिन अरे ये क्या ! बाल की जगह रवि खुद को देखता था ,फिर बॉल को किसने पकड़ा ,किसने फेका ,ये उसे समझ नही आता |


कभी नींद से जगाते हुए कलाम साहब सपने में आते ,,,कहते अरे रवि उठ ,,,,,सपने वो होते है जो सोने नही देती ,,,,,,रवि सपने में हसते हुए कहता ,,,सही बात है कलाम साहब सपने वो होते है जो सोने नही देती ,और वास्तविकता वो है जो रोने नही देती .

ऐसी उठापटक रवि और रिया की जिंदगी में लगभग एक साल तक चलती रही |माँ का रवि के लिए प्यार ,रवि का रिया के लिए प्यार ,और माँ का रिया को अपने घर के लिए उपयुक्त बनाने की चाहत ये तीन चीजे तीनो की जिंदगी में ही उठापटक मचा रही थी |
एक साल बाद पता चला की रवि के यहाँ एक नन्हा मेहमान आने वाला है|अब रिया और रवि की लाइफ में हर बात में टेंसन देने के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ आ गयी थी |पुरानी परेशानिया कुछ कम हो गयी थी ,लेकिन नई परेशानी का आगाज सुखद था |
अब रवि और रिया को आने वाले सपने की प्रकृति बदल चुकी थी |और सपनो में अब दोनों को नन्हा राजकुमार दीखता था ,जिसकी एक मुस्कान उनका सारा दर्द भुला देती थी |

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