उसकी सहेली नंदिनी की शादी थी। बाहर काफी बारिश हो रही थी। हल्की-हल्की ठण्ड में मंडप के बिलकुल बीच में जलती आग का ताप उसे अच्छा लग रहा था। वो अंश के कंधे पर सर रख के एक टक आग को निहार रही थी। उसका ध्यान पंडित के मन्त्रों की तरफ भी था जो लाख चाहने के बावजूद उसे समझ नहीं आ रहे थे। बीच-बीच में नंदिनी और उसके पति को भी देख उन दोनों के लिए खुश हो लेती। फिर दूल्हा-दुल्हन खड़े हुए और घर वाले उनके पाँव छूने लगे। उसने अंश से धीमी आवाज़ में पूछा "वो उनके पाँव क्यूँ छू रहे हैं?" अंश उसकी तरफ देख मुस्कुराया और उसे लगा शायद उसने कोई बच्चों वाला सवाल पूछ लिया हो। अंश वापिस उन दोनों की तरफ देखने लगा। थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला "ऐसा मानते हैं कि शादी होते वक़्त ये सब जो मन्त्र पढ़े जाते हैं उस समय लड़का और लड़की साक्षात भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के रूप होते हैं, इसी लिए सब आशीर्वाद ले रहे हैं।" जवाब सुनते ही वो हँसते हुए बोली "अच्छा,ये बात है! तुम क्या मानते हो?" अंश फिर मुस्कुराते हुए बोला "मुझे दिक्कत नहीं है इस सब से, धारणा है लोगों की तो मैं उसकी इज्ज़त करता हूँ। कल को यही लड़के वाले उस लड़की को परेशान करें तब ये सब धारणाएं बेवकूफियाँ लगने लगती हैं।" उसने वापिस कुछ न पूछा। सारे रीति-रिवाज़ ध्यान से देखती रही। कुछ पर उसे हँसी आती तो कुछ उसे काफी अच्छे लगते। शादी हो गयी। अंश ने उस से पूछा "तुम्हें नींद तो नहीं आरही न? सोना हो तुम्हें तो कुछ इंतज़ाम करवाऊँ?" वो अपने मोबाइल स्क्रीन देखते हुए जम्हाई लेते हुए बोली "अरे अब क्या, सुबह होने वाली है! घर जा कर ही सो लूँगी। कॉफ़ी मिलेगी?" अंश ने हामी में सर हिलाया और इशारे में ही उसे इंतज़ार करने को कह कॉफ़ी लेने चला गया। बाहर बारिश रुक चुकी थी। वो खड़ी हुई और वहाँ से निकलते हुए बालकनी में आगई। आसमान ताका तो बिलकुल साफ़ था। तारे जैसे कुछ ज्यादा ही चमक रहे थे। पूरा शहर अँधेरे से ढका हुआ। अंश कॉफ़ी ले कर आगया। "ये लो थर्मस भर कॉफ़ी और कप्स, पियो जितनी पीनी है.. चियर्स!" कहते हुए रेलिंग पर जाकर बैठ गया। वो कॉफ़ी कप्स में निकालती हुई गुस्से में बोली "पता है न तुम्हें हम छठवीं मंजिल पर हैं! गिर जाओगे तो परसों बैंक कौन जाएगा?" अंश ने बाँहें फैला मौसम को गले लगाने की कोशिश की और फिर लम्बी शोर करती हुई साँस ले कर हँसते हुए बोला "अरे अच्छा है न, इसी बहाने और छुट्टियाँ तो मिलेंगी!" वो नकली हँसी हँसते हुए उसकी तरफ कॉफ़ी का एक कप बढ़ाते हुए बोली "हा, हा, हा! वैरी फनी!" अंश ने कॉफ़ी का एक सिप लिया और फिर उसकी तरफ इशारा करते हुए आकर पास बैठने को कहा। "नो वे, मैं तुम्हारी तरह पागल नहीं हूँ! परसों से फोर्थ सेमेस्टर शुरू हो रहा, और मुझे हॉस्पिटल से पढ़ाई नहीं करनी" कहते हुए उसने भी कॉफ़ी की सिप ली। अंश ने ज़बरदस्ती टेढ़ा मुंह बना के मुस्कुरा दिया और फिर दूसरी तरफ देखने लगा। "तुम्हारे चक्कर में एक दिन मैं पक्का मरूँगी, और अगर नहीं मरी तो जिस दिन पापा को पता चलेगा वो मुझे मार देंगें" हँसते हुए बोलकर वो भी ठीक उसके बगल में जाकर रेलिंग पर बैठ गयी। "सो, तुम्हें बड़ा पता है रीति-रिवाजों के बारे में! पंडिताई का भी मन बनाए थे क्या कभी?" उसने अंश को कोहनी मारते हुए पुछा। अंश हँसते हुए मना करने को सर हिला दिया। "तो तुम भी आस्तिक हो?" उसने पूछा। अंश ने हामी में सर हिला दिया। "पर तुम्हारे फेसबुक पोस्ट्स पढ़कर तो ऐसा बिलकुल नहीं लगता?" कहते हुए उसने खाली कप्स में वापस कॉफ़ी भरी। अंश थोड़ी देर तक चुप रहा। कप लेते हुए बोलना शुरू किया "हाँ, मैं आस्तिक हूँ। रीति-रिवाज़ का उस से कोई लेना देना नहीं। उतना धार्मिक तो नहीं हूँ पर अगर एक हिन्दू होने के नाते मुझे अपने रीति-रिवाज़ पता हैं तो उसमें बुरा भी कुछ नहीं है, न?" उसने हामी भरने को सर हिला दिया। "क्या हुआ? तुम्हें अजीब लगा क्या?"अंश ने पूछा। वो थोड़ी देर सोचने के बाद बोली "नहीं... पर हिन्दू सुनते ही मोहन भागवत, आशाराम, बजरंग दल, VHP, RSS जैसों का ख्याल आजाता है... बिलकुल ठीक वैसे ही जैसे मुस्लिम सुनते ही तुम्हें ख्याल आता होगा किसी शख्स के हाथ में बंदूकें और बारूद"। अंश ज़ोर से हँस पड़ा। उसे भी हँसी आ गयी। फिर अंश बोला "उनके लिए धर्म कोई भी गलत काम करने का बहाना है और उनकी गलतियों की वज़ह से मैं अपने आपको हिन्दू बोलने में क्यूँ शर्मिंदा होऊँ? मैं अपने माँ-बाप का बेटा हूँ, ब्राह्मण हूँ, हिन्दू हूँ और भारतीय भी। दिस इज़ माय रिएलिटी एंड आई ऍम एक्सट्रीमली प्राउड ऑफ़ दैट! अगर मैं मुस्लिम भी पैदा होता तो भी आय वुड हैव बीन प्राउड ऑफ़ दैट... और मुझे जानने वाले किसी भी शख्स के लिए मैं हिन्दू हूँ न कि वो लोग.. तो मुझे अच्छी मिसाल कायम करनी हैं उनके लिए"। वो उसे टोकते हुए बोल पड़ी "पर तुम्हें नहीं लगता कि ये सब चीज़ें हमें बाँध कर रखती हैं?" अंश घूम कर उसकी तरफ मुंह करके बैठ गया और बोला "बाँध कर नहीं रखती हैं.. इन्हें साथ लेकर चलना कठिन होता है... और हमें सब कुछ आसान चाहिए.."।

"आसान? एक बार मैंने किसी पॉलिटिकल मुद्दे पर अपनी राय रखी थी तो लोगों ने ऐसी-ऐसी बातें बोलीं कि आई वाज़ मेंटली डिस्टर्ब्ड फॉर फ्यू डेज़!"

"हाहा... ये तो हमारे और तुम्हारे ऊपर है न कि हम कैसी मिसाल कायम करते हैं दूसरों के लिए... मुझे हर रोज़ मंदिर छोड़ने वाला ऑटोवाला कहता है कि वो चाहता है कि उसका लड़का एक दिन मेरी तरह बने। वो मुसलमान है और मैं हिन्दू, फिर भी!"

"हाँ... तुम्हारी बात अलग है। पता है तुमसे जब भी कोई बहस करो तो खुद का ही नज़रिया बदल जाता है चीज़ों को देखने का..."

"क्या मैं इसे एज़ अ कॉम्प्लीमेंट ले लूँ? वो क्या है न खूबसूरत लड़कियाँ बहुत कम ही दूसरों की तारीफ़ करती हैं.."

"क्या यार... तुम भी न!"

दोनों हंसने लगे। फिर कुछ और बातें करने लग गए।

हलकी-हलकी रौशनी हो चुकी थी। "चलो, मैं तुम्हें ड्रॉप कर देता हूँ तुम्हारे घर पे" कहते हुए जब अंश ने ध्यान दिया तो वो उसके कंधे पर सर रख के सो चुकी थी। वो देखता रहा उसे। थोड़ी देर बाद उसने आँख खोली तो बोली "मुझे लगा यू विल किस मी पर तुम तो.."। अंश हंसने लगा। वो दोनों बालकनी से उतर के नीचे आये। अंश ने उसे उसके घर ड्रॉप किया और फिर अपने दोस्त की गाड़ी वापिस कर स्टेशन चला गया जहाँ से उसकी ट्रेन थी। वो घर आते ही चुप चाप सो गयी। दोपहर में नींद खुली तो भी वो अलसायी बिस्तर पर ही पड़ी-पड़ी पिछली रात अंश से हुई बातें सोचने लगी। उसने खुद को और अंश को नंदिनी और उसके पति की जगह सोचा और फिर शर्मा गयी। फेसबुक पर लॉग इन किया और पोस्ट डाला "We should always be proud of our reality. Try to be an example for the ones who come across it."। अगले ही सेकंड नोटिफिकेशन आया कि Ansh Tripathi commented on your status और तुरंत देखा तो अंश ने कमेंट किया था cool । उसने फिर कमेंट किया smiley तो उस पर अंश ने कमेंट किया kiss । अब वो सोच में पड़ गयी कि क्या करे, कोई रिश्तेदार देखेगा तो क्या बोलेगा। फिर उसने अपना पोस्ट दुबारा पढ़ा "We should always be proud of our reality" और फिर बोलते हुए "रिश्तेदारों की ऐसी की तैसी" उसने भी कमेंट कर दिया kiss

थोड़ी देर बाद उसकी माँ उसके कमरे में आयीं तो उसे नमाज़ अदा करते देख चौंक गयीं। उनके लाख समझाने पर भी उसने कभी ये सब नहीं किया था। खुश भी हुईं। शाम को खाना खाते वक़्त पूछ ही लिया तो बेटी से जवाब मिला "बिकॉज़ निदा खान इज़ एक्सट्रीमली प्राउड ऑफ़ हर रिएलिटी!"...

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