उस रात जब विशाखा सोने गई तो नयी जगह होने की वजह से काफी देर तक उसे नींद ही नहीं आयी| ऊपर से उसके सारे दोस्त जो लड़के थे उनको शादी के घर में अलग से ठहरने को कमरा दिया था और खुद को बाकी औरतों के साथ जिनमें से एक को भी वो जानती नहीं थी उनके साथ ठहराया था |और कमरा भी शादी की जगह से करीब एक किलोमीटर दूर था |विशाखा का मन पहले से कम था मुंबई से इतने दूर यूपी के कोई  गाँव में..लेकिन हैदर कोलेज का जिगरी दोस्त भी तो है... | बाकी औरतें अभी शादी के गीत गाने में लगी हुई थी | मुसाफ़री के कारण विशाखा थक के ढेर हो चूकी थी पहली बार उसने इतना लंबा सफ़र ट्रेन से किया था | हैदर शादी के कामो के बीच में भी व्हाटस अप  पर उसका खयाल रख रहा था |

और वैभव उसका बॉयफ्रेंड तो उधर था ही|उसका तो यह गाँव था | लेकिन उसने अभी अपने घर पर कुछ भी बात नहीं बतायी थी इसलिए वो विशाखा से दूरी रख रहा था | विशाखा को पहले से यह बात पसंद नहीं थी| दोस्तों में भी हैदर को छोड़ कर वैभव और विशाखा के बारे में किसीको कुछ भी नहीं पता था | वैभव मुंबई में उसके साथ कुछ अलग और बाहर निकलते दोस्तों के सामने कुछ अलग ही बन जाता था |यहाँ तक की वह बाकि दोस्तों के साथ अन्य लड़कियां के बारे में पूछताछ भी करता, वो भी विशाखा के सामने | विशाखा के पूछने पर बताता की अभी वो दोस्तों को बताने के लिए स्योर नहीं है |

थकान की वजह से रूम पर आकर जल्दी में कपडे बदल लिए और वो परदे सटाना भूल गई, तुरंत भागती हुई खिड़की के पास पहुंची और परदे सटा रही थी तभी उसको लगा जैसे कोई उसको खिड़की में से देख रहा था | उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और वो बत्ती बुझा कर बिस्तर पर लेट गई |रात को सब औरतें वापस आएगी तो दरवाजा खोलने उठना पड़ेगा सोच उसने दरवाजे को कुण्डी नहीं लगाई थी | आँख बंद करते ही उसको नींद लग गई | कुछ ही पल बीते थे अभी, कच्ची नींद वाली विशाखा को लगा जैसे कोई दरवाजे से अन्दर आया हो | वो तुरंत बत्ती जलाने खडी हुई तो किसीने उसको पीछे से दबोच लिया | मुहं पर कर्कश सा हाथ दबा दिया ताकि वो चिल्ला न पाए |लेकिन  विशाखा सतर्क थी उसने हफडा तफडी में उसका फ़ोन पैरो के पास गिरा दिया | वो दानव उसके गले में काटे जा रहा था | उसका नाईट ड्रेस का टॉप भी फाड़ चूका था वो | यहाँ तक की उसके बाजुओ में खरोच के निशाँ भी लगा चूका था |  लेकिन विशाखा ने हार नहीं मानी उसने उसको पता न चले वैसे पैरो से हैदर को व्हाटस अप पर कॉल लगा दी |

हैदर को पता था की विशाखा कभी देर रात को एसे ही कॉल नहीं करती है | जब कॉल उठाने पर कुछ अजीब आवाजे सुनी तो वो सीधा विशाखा के कमरे की और भागा| तब तक वो दानव विशाखा के शरीर के ऊपर सवार हो चूका था |विशाखा चिल्ला रही थी लेकिन आसपास में कोई भी नहीं था जो उसकी आवाज को सुन पाए |हैदर भागते हुए रूम पर पहुँच गया उसने देखा तो दरवाजा अन्दर से बंद था | खिड़की पर परदे सटे हुए थे लेकिन हलकी सी चिल्लाने की आवाज उसने सुन ली | वो दरवाजा तोड़कर अन्दर घुस आया और सबकुछ समझ गया | हैदर ने तुरंत वो दानव को एक झटके में विशाखा से दूर कर दिया | हैदेर् ने उस अपराधी को दोनों हाथों से दबोच के पकड़ रखा था | उसने भागने की बहुत कोशिश की लेकिन हैदर की पकड़ से वो छूट न सका |विशाखा ने बत्ती जलाई | बत्ती जलते ही हैदर ने उस अपराधी को छोड़ दिया |वो फटी आँखों से उसे देखे जा रहा था | वो अपराधी मुहं पर मफलर डाल वहां से तुरंत ही भाग लिया |

उसने विशाखा को चद्दर से ढँक दिया | विशाखा वो लडकियों में से नहीं थी जो एसे हादसों से डर कर टूट जाए | उसने आपने आप को तुरंत ही संभाला | वो बाथरूम गई और जहाँ खून बह रहा था वह खरोचों को उसने साफ़ कर वहा बोरोप्लस लगाई | कपडे ठीक किए | मुहं पर पानी डाल वो बाहर आयी | हैदर मुहं को दो हाथों में लिए उसके बिस्तर पर एक कोने में बैठा था | उसकी आँखों में शर्म के आंसू थे | उसने विशाखा के सामने दो हाथ जोड़ दिए | विशाखा हादसे से सहमी हुई थी उसकी आँखों में भी पानी आ गया लेकिन तुरंत उसने खुद को संभाला और हैदर को बताया की वह उसी वक्त यहाँ से निकल जाना चाहती है | अगर हो पाए तो उसको आधे घंटे की दूरी पर आए लखनऊ एयरपोर्ट तक छोड़ दे| हैदर उसको लेकर गाड़ी के पास आ गया | उसने फिर से रास्ते में विशाखा की माफ़ी मांगी |विशाखा ने हैदर को सब कुछ भूल जाने को और शादी में मन लगाने को कहा |

कुछ  समय के बाद विशाखा के जेहन में चल रही बात उसने गाडी में हैदर से पूछी  की उसने वो अपराधी को जाने क्यूँ दिया ? हैदर ने गाडी रोकी | बहुत मुश्किल से वह शब्द जोड़ते हुए सिर्फ इतना बता पाया की वह वैभव के पिताजी थे | विशाखा सन्न हो गई | उस दिन के लिए इतना सदमा काफी था | वो और कुछ भी सुनने समझने की हालत में नहीं थी |

दोनों वैभव जहा ठहरा था वहा आ रुके | विशाखा ने हैदर से कहा की वो अभी वैभव से मिलना नहीं चाहती है | हैदर ने रात के तीन बजे विशाखा का मुंबई का टिकट करवाया और सुबह पांच बजे की फ्लाइट में उसको बिठाया | वापस आकर उसने सबसे पहले वैभव को जगाया जो देर रात तक दारु पीकर सोया था | वह वैभव को लेकर चाय पीने चला गया | उसने अगली रात की सारी बाते वैभव को बताई | वैभव की काटो तो खून न निकले जैसी हालत हो गई थी | हैदर ने उसको भी मुंबई चले जाकर विशाखा को सँभालने को कहा | लेकिन कुछ देर तक चूप रहने के बाद वैभव बोला , अच्छा हुआ सब टूट गया, कभी उसका सामना नहीं करना है अब. कई दिनों से में भी यह सब ख़तम करना चाहता था, वो हम ठाकुरों के खानदान में आने के लायक नहीं है!! आओ चलो तुम्हारी हल्दी है आज, भूल जाओ यह सब कहकर वह हैदर को लेकर वापस घर आ गया |

तीन दिनों तक वैभव का कोई कॉल नहीं आया, विशाखा को पता चल गया था की हैदर ने उसको बात बता दी है तभी वह भाग रहा है | चौथे दिन विशाखा ने खुद कॉल लगाई | 

वैभव ने कॉल काट दी | सात दिन बाद वह वापस आया तो उसने विशाखा को मैसेज करके बता दिया की "घरवालो की जबरदस्ती से उसकी एंगेजमेंट हो गई है, सोरी...."

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