मेरी फैंडस प्रिया अपने नाम की तरह ही प्यारी सी थी । बचपन मे ही उसकी मॉं चल बसी । उसके पापा ने दूसरी शादी कर ली । सोतेली मॉं तो सोतेली ही होती है। मॉ और मॉ का प्यार क्या होता है उसने कभी जाना ही नही । उसके पापा की जॉब ऐसी थी , की 3- 4 दिन मे वो एक बार घर आते थे। उनकी बस निन्द ही उनकी पूरी हो पाती थी बच्चो की तरफ ध्यान देना तो दुर की बात थी। उसकी एक छोटी बहन भी थी। दोनो बहनो को ना तो मॉ का प्यार मिला ना ही पापा का ।दोनो बहने प्यार की बून्द के लिए तरसती थी । बस एक चाचा ही थे, जिनसे मॉ और पापा दोनो का प्यार मिला। उनके चाचा उन्हे बहुत प्यार करते थे, बिलकुल अपने बच्चो की तरह रखतें थे। वह हमारे पडोस मे रहती थी । हम साथ ही स्कूल जाते थे.........।।
‘‘अरे! प्रिया आज फिर लेट, आज भी मेम से डॉट खिलायेगी तूू ।‘‘
‘‘सॉरी यार, तुझे तो पता है ना घर का पूरा काम करके तब आना होता है‘‘ उसने समझाते हुये कहा।
‘‘यार तेरी मॉ इतनी मोटी है,एक काम कर लेंगी तो पतली नही हो जाएगी। देखना जल्दी मरेगी मोटी‘‘ मैंने गुस्से मे कहा ।
उसने कहाः ‘‘नही यार वो जैसी भी है मेरी मॉ है, ऐसा मत बोल उनके बारे मे।‘‘
एक तो वो घर का सारा काम करती थी तब भी उसकी मॉ उसे बहुत मारती थी । हमारे घर तक आवाज आती थी रोने की । मुझे बहुत बुरा लगता था उसके लिए । लेकिन उसे इन सब की आदत हो गई थी।
बारहवीं के रिजल्ट आने के बाद हम दोनो ने ही कॉलेज मे एडमिशन ले लिया । उसकी मॉ उसे आगे नही पढाना चाहती थी । लेकिन उसके चाचा ने उसको पढने की परमिशन दे दी थी । कॉलेज जाने के बाद वो मुझसे अलग हो गई । उसका और मेरा स्ट्ीम अलग था। टाईम और क्लास भी । मैं पढाई मेे बिजी रहने लगी। मिलना भी कभी -कभार ही होता था। मेरी फैंडस मुझसे बहुत दूर हो गई थी.......।।
उन दिनो एक लडका उसकी लाईफ मे आया। वो उसको बस में मिलता था । धीरे -धीरे दोनो अच्छे दोस्त बन गये थे। जो लडकी जिन्दगी भर प्यार की बुन्द को तरसती रही । उसे जैसे प्यार का समुन्दर मिल गया था। भगवान से सभी शिकवे - शिकायत खत्म हो गई थी । वो उस पर पागलो की तरह भरोसा और अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करने लगी थी ।।।
एक दिन उस लडके का फोन आया।
उसने कहाः- ‘‘होटल मे रूम बुक किया है मैंने, प्रिया तुम आ जाना‘‘
प्रिया ने गुस्से में कहाः ‘‘मै नही आने वाली।‘‘
उसने कहाः ‘‘तुम्हे मेरी कसम है। मै कभी बात नही करूगा, सोच लेना।‘‘
ंप्रिया समझ गई थी वो चाहता क्या था, लेकिन वो उसे और उसके प्यार को खोना नही चाहती थी । शायद यही उसका अन्धा प्यार था,जो सही और गलत मे फर्क नही कर पाया।उस दिन उसने अपना सब कुछ उसको सोंप दिया ताकि उस लडके को उसके प्यार पर शक ना हो। वो अपनी दुनिया मे खुश थी। उस से मिलना और बाते करना उसे बहुत पसन्द था। बस ऐसा ही चलता रहा।
एक दिन वो लडके से फोन पर बात कर रही थी । तो उसके चाचा ने सुन लिया। उसके चाचा ने डॉट भी लगाई । उसका मोबाइल ले लिया गया।
चाचा ने कहाः- ‘‘सिर्फ पढने के लिए तुम कॉलेज जाओगी। घर से कॉलेज और कॉलेज से सीधा घर।‘‘
पर प्यार कहा किन्ही बन्धनो से रूकंता है। वो कालेज जाती और फैंडस के फोन से उस से बात करती थी। कॉलेज से बंक मारकर उससे मिलने जाती थी।
जब उसके चाचा को ये सब पता चला, तो उसके पापा को सब कुछ बता दिया। और उसकी शादी के लिए लडका देखना शुरू किया। जब उसको ये पता चला,कि उसको देखने लडके वाले आने वाले है। तो उसने रोते हुये अपने चाचा से कहा- ‘‘ मै किसी को बहुत पसन्द करती हॅू चाचा जी उसके लिए अपनी जान भी दे सकती हॅू। मै अगर शादी करूंगी तंो सिर्फ उससे। ‘‘
चाचा ने कहा-‘‘ठीक है बेटा, हम तेरी शादी उसी से करेगें। जिसको तुम चाहती हो, रोयो मत। मैं तुम्हारा पापा से बात करूगा।‘‘
उस दिन वो बहुत खुश थी की, उसकी सब फरियाद रब ने सुन ली। वो अपने नये जीवन के सपने देखने लगी थी । उसे क्या पता ये खुशियॉ कुछ ही पलों की है । उसने शाम को उस लडके के पास फोन किया। ं
प्रिया ने हॅसते हुये कहाः-‘‘ यार, तैयार हो जाओ शादी के लिए मैंने हमारी शादी के लिए अपने चाचा से बात कर ली है, वो मान गये है।‘‘
‘‘ क्या शादी ? पागल हो गई हो क्या तुम? शादी वादी मुझे नही करनी। शादी मतलब जीवन भर की बरबादी। मै बस अपनी लाईफ एन्जाय करना चाहता हॅू।‘‘ लडके ने समझाते हुये कहा।
‘‘ यार अब तो करनी ही पडेगी वो भी जल्दी से ही क्योकि मै 3 महिने से परेंग्नेन्ट हॅू, ये मुझे कल ही पता चला। मै मिलकर तुम्हे बताने वाली थी‘‘
‘‘ना तो मुझे शादी में कांेई इनट्स्ट है, ना ही अब तुम मैं । कॉल कर अब मुझे परेशान मत करना‘‘ उसने गुस्से मे कहते हुये फोन काट दिया।
प्रिया ने कई बार उसको फोन किया, पर हर बार नम्बर स्विच ऑफ । वो समझ गई थी की, उसके अन्धे प्यार ने उसको धोखा दे दिया। वो उस रात बहुत रोई ।उसे कोई रास्ता नजर नही आ रहा था। जैसे कि सब रास्ते बन्द हो गये हो उसके लिए। उसने उसी रात पंखे से फॉसी लगा कर सुसाईड कर ली। पीछे बस लेटर छोडा जिसमे लिखा था-‘‘ चाचा जी मुझे माफ कर देना । मैने आपके विश्वास को तोडा। मैं आपकी अच्छी बेटी नही बन सकी । आज मेरे पास जीने की कोई वजह ही नही बची। जिसे पागलो की तरह मैंने प्यार किया उसने मुझे धोखा दे दिया। मेरी मौत का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ मेरा अन्धा प्यार है।‘‘
काश ये तबाही का मंजर यही रूक जाता पर उसके अन्धे प्यार की सजा किसी और मासूम को भी मिलनी थी। कुछ दिनो बाद उसके पापा ने उसकी छोटी बहन की शादी तय कर दी।
चाचा ने कहा- ‘‘भाईसाहब रिया अभी छोटी ही है, नौवी कक्षा मे ही तो पढती है । आप जल्दी नही कर रहे हो क्या?‘‘
बडे भईया ने गुस्से मे कहा-‘‘ तुम्हारे कारण मै अपनी एक बेटी को खो चुका हॅू, काश तुम मुझे सबकुछ पहले बता देते। दुर रहो मेरी बेटियो के मामले से ‘‘
चाचा ने कहा- ‘‘ क्या मेरी बेटी नही थी वो, मैंने कभी उनमे और मेरे बच्चो मे र्फक नही समझा , ठीक है भाईसाहब मै कुछ नही बोलुंगा पर आप रिया के ससुराल वालो से कुछ छुपाना नही। ‘‘
लेकिन उसके पापा ने उन्हे कुछ भी नही बताया। जब रिया की ससुरावालो ने पुछा की, लडकी की बडी बहन शादी मे क्यो नही आई । तो उन्हाने कहा‘‘- वो हॉस्टल मे रहती है, और एग्जाम की वजह से नही आ सकी। ‘‘
लेकिन सच छुपाने से कहा छुपता है, ये सच भी ज्यादा दिन तक नही छुप पाया। जब ंरिया के ससुरालवालो को इसका पता चला तो रिया का जीना दुश्वार हो गया। रोज उसे हर समय ताने मिलते। अगर उसके पति ने उसका साथ दिया होता तो शायद सहन भी कर लेती, लेकिन उसके पति ने भी उसका साथ नही दिया। वो मानसिक रूप से इतनी डिर्स्टब हो गई थी, की उसने भी एक दिन सुसाईड कर ली.........। ।


अपने बच्चो को इतना समय और प्यार तो जरूर दो कि वो हर बात आप से शेयर कर सकें और प्यार की बुन्द के लिए उन्हे तरसना ना पडें। और यूवागन हर रिश्ते की एक सीमा होती है, वो सीमा ना तोडे और ना ही अपनो के विश्वास को तोडो। अगर कोई आपसे सच्चा प्यार करता है तो बिना किसी शर्त के करेगा क्योकि प्यार मे कभी कोई शर्त नही होती। ........। ।




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