रात आधी बीत चुकी थी पर आँखों से नींद गायब थी तभी फ़ोन पर मैसेज नोटिफिकेशन की लाइट जली फ़ोन उठा कर देखा तो व्ट्सअप्प पर काशान का मैसेज था 
सो गई क्या 
नहीं नींद नहीं आ रही 
मुझे याद कर रही थी 
अभी इतने बुरे दिन नहीं आये :(
यह अब रोज़ का काम बन गया था मैं और काशान एक ट्रेवलिंग साइट पर पहली बार मिले थे उसे मेरी प्रोफाइल अच्छी लगी थी और उसने मेल भेजी थी पहले हम G - TALK पर चैटिंग करते रहे फिर सुविधा के लिए एक दूसरे को फ़ोन नंबर दे दिया तब से वो और मैं दिन मैं तीन चार बार जरूर बात या कहे चैटिंग कर लेते थे। 

इंटरनेट की दुनिया भी अजीब ही है कहा से कहा अजनबीयों को जोड़ देती है और असलियत मैं जो हमारे पास है अपने वो दूर होते जाते है काशान  USA  मैं एक बड़ी कंपनी मैं एक बड़े पद पर है  मैंने तसल्ली करने के लिए उसका Linkdin और facebook दोनों एकाउंट्स चेक कर लिए थे उसने ही आईडिया दिया था 

मैं भी दिल्ली मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी मैं मिडिल मैनेजमेंट का हिस्सा थी अच्छा कमा लेती थी कहने को सोशल पर एकदम अकेली घर से  ऑफिस और ऑफिस से घर बस ज्यादातर यही दिनचर्या थी मैं और मेरे हस्बैंड ४ साल से अलग थे जब से डाइवोर्स हुआ मैंने आपने चारो और एक दिवार बना ली थी 
जो तूलिका हरदम एडवेंचर के लिए तैयार रहती थी अब वो सिर्फ ओफ़्फ़िशियल टूर पर ही जाती थी रिश्तेदारो से मिलना तो ना के बराबर था ही दोस्तों से मिलने मैं भी हिचक होती थी उन लोगो के पास हरवक्त पति बच्चों और परिवार की बाते होती थी और मेरे पास ऐसा कुछ नही यह ऑफिस मैंने कोई ढाई साल पहले ही ज्वाइन किया था यहाँ लोग मेरे बारे  नहीं जानते थे मैं काफी रिज़र्व रहती थी मैं किसी भी पर्सनल मामले मैं कोई टीका टिप्पणी न करती थी ना कोई मेरे ऊपर करे उसका अवसर देती थी बस ऐसे ही बोझिल जिंदगी जी रही थी तभी मेरे मन मैं ट्रेवलिंग का ख्याल आया और काशान मिल गया वो ३५-३६ साल का अच्छे व्यक्तित्व का मालिक था जब से वो मुझे मिला था जैसे पुरानी  तूलिका वापिस आ गई थी उसके साथ मैं खुल के मजाक करती अपनी दिल की हर बात बताती शायद इसलिए वो मुझसे बहुत दूर था कई बार अपनी दिल की बात अजनबियों से करना ज्यादा आसान होता है 

एक दिन मैं ड्राइव कर रही थी और फ़ोन बज उठा अपरिचित नम्बर मैंने सोचा बाद मैं देखूंगी पहले इस ट्रेफिक से निकला जाये पर फ़ोन लगातार बजता ही जा रहा था साइड मैं गाड़ी रोक कर झुंझलाते हुए मैंने फ़ोन उठाया सामने से आवाज आई हेल्लो तुली आय एम इन दिल्ली ओह माय गॉड काशान तुम यहाँ 
जल्दी आओ Trident गुडगाँव मैं हु मैंने कहा क्या मैं बस MG रोड पर ही हु ऑफिस जा रही थी वो बोला ऑफिस छोड़ो यहाँ आओ 

मैं रिसेप्शन पर पहुँची ही थी सामने से जनाब आ धमके वाकई उसकी पर्सनैलिटी दमदार थी ६. १ कद गेहुआ रंग और कसरती बदन मेरे पास आते ही वो बोला तुली तुम प्रोफाइल पिक्चर से कही ज्यादा सुन्दर हो एक बार तो मैं ठिठका फिर बालो से पहचान गया बिखरे हुए बेतरतीब नूडल जैसे 
हां तुम भी देखने मैं ठीक ठाक से ही हो बुरा सा मुँह बना कर मैंने जवाब दिया 
हम दोनों ही हँसने लगे तभी उसने आगे बढ कर मुझे गले लगा लिया मैं उसे लगभग धक्का देते हुए बोली हेल्लो यह इंडिया है अमेरिका नहीं वो झेंप गया बोलो सॉरी तुम्हे देख कर एक्ससाइटेड हो गया था उसकी शक्ल देख कर मेरी हँसी छूट गई 
हम होटल के रेस्त्रां की और बढ चले काफी माँगा ली गई मैंने कहा तुम यहाँ अचानक कैसे आ गए मुझे बतया भी नहीं वो बोला देखा कैसा सरप्राइज किया वो यहाँ एक इंटरव्यू के लिए आया था उसके पेरेंट्स हैदराबाद मैं अकेले रहते थे इसलिए वो इंडिया आने की कोशिश मैं था मैंने कहा अच्छा है तुम यहाँ आ जाओगे तो साथ मैं बहुत घूमेंगे मूवीज देखगे मेरे चेहरे पर उत्साह छलक आया वो हलके से मुस्कुराया और बोला सोच लो उसका इंटरव्यू शाम को था वो बोला तुली आज ७ बजे डिनर डेट पर चलोगी मैंने हां कह दिया उसके बाद कुछ देर रुक कर मैं ऑफिस चली गई पर आज ऑफिस मैं दिल नहीं लग रहा   था बार बार मेरा ध्यान काशान पर ही जा रहा था 
मैं ऑफिस से जल्दी ही निकल गई बीच मैं एक बार All the best का मैसेज भेज दिया रिप्लाई मैं जानी पहचानी स्माइली आज मैं नर्वस थी क्या पहनू बहुत दिनों बाद इस तरह तैयार होने का दिल किया पर आखिर मैं वही कुरता और जीन्स हमेशा की तरह ६ बजे काशान का फ़ोन आया बोला तुम गाड़ी मत लाना मैं तुम्हे लेने आ रहा हु एड्रेस मैसेज करो मैंने कहा क्यों जनाब डर गए मैं अच्छी ड्राइवर हु वो बोला नहीं मैं नहीं चाहता मेरे अलावा तुम किसी और चीज़ पर ध्यान दो 
दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था जैसे मैं कोई टीनएजर हु खुद पर ही हसी आ गई 

वो शाम बहुत अच्छी बीती पहली बार पता चला काशान भी सेपरेटेड है अपनी वाइफ से ,जब १२ साल पहले वो अमेरिका गया तो वही की एक लड़की से उसका प्यार हुआ और बाद मैं शादी भी पर परिवार को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर दोनों के विचार अलग थे  काशान को बच्चो से भरपूर शोर गुल वाला परीवार चाहिए था पर उसकी वाइफ को नहीं इस बात पर उनकी बहस इतनी बड़ी की बात लड़ाई झाग्डे पर आ गई  और फिर रिश्ते मैं दरार बढ़ती गई और फिर वो दोनों अलग हो गए पिछले ३ सालो से वो भी अकेला था उसकी जॉब लगभग पक्की हो ही गई थी उसने कहा तुली तुम्हे मेरी हेल्प करनी होगी गुडगाँव मैं घर ढूढ़ना और  उसे सजाना तुम्हारी जिम्मेदारी मैं कल ही वापिस जा कर रिजाइन करता हु और ३ महीने मैं मैं यहाँ आजाऊंगा अपने देश, मैंने कहा इतनी दूर आये हो अपने पेरेंट्स से नहीं मिलोगे उसने कहा बस अब इंतजार नहीं होता जल्द  से जल्द मैं लौटना चाहता हु फिर मुझे घर ड्राप करके वो होटल चला गया 

अगले कुछ महीने जैसे हवा की रफ़्तार से गुजर गए काशान के लिए घर ढूढ़ते और फिर सजाते हुए आखिर वो दिन आ ही गया मैं एयपोर्ट पर काशान का वेट कर रही थी और वो सामने ही था मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा था पता नहीं क्यों मेरी हालात ऐसी हो जाती है इस बार वो गले नहीं लगा दूर से ही नमस्कार करने लगा मैंने भी नमस्कार का जवाब दिया ओह हो बड़े संस्कारी  हो गए हो वो हँसते हुए बोला अब इंडिया मैं ही रहना है ना 
उसे घर बहुत पसंद आया उसका ऑफिस भी नजदीक था अगले दिन वो हैदराबाद के लिए रवाना हो गया १ हफ्ते बाद जब वो वापिस आया परेशान सा लगा उसके पेरेंट्स उसके साथ नहीं आये थे पूछने पर कुछ बतया नहीं फिर जल्द ही वो काम  मैं बिजी हो गया और मुझे भी ऑफिस  टूर पर ४ हफ़्तों  के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना पड़ा इस टाइम पीरियड मैं हमारी काफी काम बातचीत हो पाई मैं जब लौट कर आई तो घर फैला हुआ था धूल मिटटी उफ़ सबसे पहले  सफाई करने मैं जुट गई तभी  डोर बेल बज उठी मुझे लगा पक्का कामवाली है  मुह पर कपडा बांदे हाथ मैं झाड़ू लिए जब दरवाजा खोला तो सामने काशान इससे पहले मैं संभलूँ उसने फटाफट मेरी फोटो खींच ली और हँसते हुए कहना लगा फेसबुक पर मैडम चमक जायगी मैं उससे उसका फ़ोन छीनने की कोशिश करने लगी और वो बचने की इसी भागम दौड़ मैं मेरा पैर मूढा और मैं सीधी काशान पर जा गिरी एक पल को मुझे सँभालने के लिए उसने मुझे कस कर पकड़ लिया उसकी बाहों  मैं यु जाना बहुत सुकून भरा लगा पर अगले ही पल वो चिल्लाने लगा अरे मोटी उठ जा मैं पिचक गया  हाय मेरी हड्डिया तोड़ दी मैं झेपते हुए खड़ी हो गई 
फिर उसका ड्रामा शुरू हो गया तुली हॉस्पिटल ले चल तूने मार डाला मोटी  मैं ही मिला था मैं हँसने लगी काशान ने एक ऑकवर्ड मूमेंट को मजाक मैं बदल दिया
बहुत अच्छा लगा फिर वो कहने लगा जाओ नहां कर तैयार हो कर आओ मैं चाय बनाता हु जब नहां कर फ्रेश हो कर वापिस आई इतने मैं काम वाली कुसुम भी आ गई थी और वो और काशान जाने क्या बाते करते हुए नाश्ता बना रहे थे कुसुम की आँखों मैं अचरज था आज पहली बार उसने किसी को मेरे घर पर देखा था 
 मैंने कहा तुम इतनी सुबह सुबह यहाँ कैसे वो बोला संडे था सोचा तुम से  मिल आऊ इतने दिनों से ठीक से बात भी नहीं हो पाई और तुम्हे अपनी नई कार दिखा कर जलाना भी तो था मैंने कहा मैं क्यों जलने लगी वह  बोला  जल्दी  चलो हम लॉन्ग ड्राइव पर जायगे 
हम निकल पड़े नेशनल हाईवे  पर जयपुर की तरफ काशान ने Audi Q 7 खरीदी थी मैंने कहा क़माल है तुम तो धन्ना सेठ निकले वो हँसने लगा पर उसकी हँसी मैं एक उदासी थी वो बोला मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता हु जब मैं अम्मी अब्बा से मिलने गया था तब उन लोगो ने मेरी शादी मेरे चाचा की लड़की से पक्की कर दी सुन कर धक्का सा लगा मेरे चहरे पर एक रंग आ कर चला गया मैं संभलते हुए बोली तो अच्छी बात है ना लाइफ मैं सेटल हो जाओगे वो मेरी आँखों मैं देखता हुआ बोला सच कह रही हो ? मैंने कहा हां पर मेरी आवाज़ काँप गई मेरा हाथ अपने हाथ मैं लेते हुए वो बोला तुली मेरा इंडिया वापिस आने का एक कारन तुम भी थी तुमसे जबसे मिला तुम्हारा हो गया तुमसे बाते करना टाइम स्पेंड करना बहुत अच्छा लगता है बोलो यह प्यार नहीं है क्या ? मैं मानता हु हमारा धर्म अलग है पर यह इतनी बड़ी बात नहीं है मेरी आँखों मैं आँसू आ गए मैंने कहा तुम जानते भी हो मेरे हस्बैंड ने मुझे क्यों छोड़ा ? क्यों की मैं कभी भी माँ नहीं बन सकती रीज़न तुम्हारे तालाक का भी यही था बस तुम्हारी वाइफ की विलिंग नहीं थी और मेरी मजबूरी काशान  चुप हो गया कुछ नहीं बोला गाडी वापिस घुमा  ली मुझे घर छोड़ कर वो चला गया मेरे दिल मैं एक दर्द सा उठा मुझे लगा यह हमारी आखरी मुलाक़ात है घर आकर मैं बहुत रोइ अगले दिन ऑफिस से १ वीक की छुट्टी ले मम्मी के पास डलहौज़ी चली गई फ़ोन इन्टरनेट सब बंद बस कुछ टाइम अकेले रहना चाहती थी पर डलहौजी मैं आकर भी चैन कहा बुआ जी एक विधुर का रिश्ता लिए बैठी थी जवान बच्चे थे उसके सूरत मैं किसी टेक्सटाइल मिल का मलिक तूलिका राज करेगी मम्मी मेरा मूड देखते हुए बुआ जी से बहाने बनाने लगी फिर कोई पड़ोसन तो कभी रिश्ते की चाचियाँ किसी ना किसी बहाने मेरी कमिया गिना ही जाती मैं और दुखी हो गई मम्मी ने कहा बेटा तू वापिस जा यहाँ तुझे रिश्तेदार ताने मारते ही रहगे और तू रोती ही रहेगी जो मुझसे देखा नहीं जाता हफ्ते के लिए गई मैं पाँचवे दिन वापिस गुडगाँव आ गई थी दरवाजा खोला तो एक नोट मिला कहा हो फ़ोन भी नहीं लग रहा मोटी फ़ोन कर काशान 
क्या वो मुझे ढूंढ रहा था क्यों फ़ोन करने की इच्छा नहीं हुई सुबह से शाम कैसे हुई पता ही नहीं लगा शाम ढलने को थी घर मैं अँधेरा फैला था मैं उठ कर लाइट्स जलाने लगी तभी डोर बेल बजी मैंने दरवाजा खोला तो सामने काशान था हैरान परेशान मुझे देखते ही उसने गले लगा लिया वो रो पड़ा मैं कर्तव्यविमूढ़ सी खड़ी रही मुझे कंधो से पकड़ कर वो हिलाता हुआ बोला कहा चली गई थी मैंने कहा कहा नहीं ढूंढा मैसेज ईमेल्स सब अनरीड फ़ोन बंद क्यों तुली ऐसा क्या किया था मैंने -मैं रोने लगी वो बोला हां तुम्हारी सच्चाई जानने के बाद मैं शॉक्ड हुआ था पर यह डिसाइड करने मैं मुझे १ दिन  भी नहीं लगा की मेरी जिंदगी मैं तुम ही सबसे इम्पोर्टेन्ट हो बाकि कुछ नहीं जबअगली शाम आया तो तुम नहीं थी मेरे दिल पर क्या गुजारी पिछले ५ दिनों से खुद को कोस रहा था क्यों कुछ बोले बिना आ गया था यह सुन कर मेरे सब्र का बाँध भी टूट गया और मैं उस से लिपट गई काशान आज तक मैं इसलिए चुप रही तुम्हारी भरी पूरी फॅमिली वाला सपना मैं कभी पूरा नहीं कर सकती थी किस मुंह से कहती की यस आई  लव यु काशान ने मेरा चेहरा अपने हाथो मैं लिया और मेरा माथा चुम लिया फिर आँखे और फिर उसके लब मेरे होटो पर थे वो बोला अब चाहे कुछ भी हो हम एक हो जायगे 
अगले ही दिन हम हैदराबाद पहुचे काशान ने सबको बता दिया यह तूलिका है और मैं इससे ही शादी करूँगा चाहे आपको पसंद हो या नहीं थोड़े बहुत प्रयासों के बाद उसके अम्मी अब्बा मान गए हम सीधा डलहौज़ी पहुचे और माँ को सारी बात बताई माँ ख़ुशी से रो पड़ी उन्होंने मेरे सेटल होने का ख्याल ही दिल से निकल दिया था उन्हें काशान भी बहुत पसंद आया  एक महीने बाद हमने कोर्ट मैरिज कर ली 
आज चार साल बाद हम दोनों बहुत खुश है मैंने जॉब छोड़ दी भरेपूरे परिवार का सपना हमने पूरा कर लिया था हमने २ बच्चे कबीर और काव्या गोद ले लिए थे काशान के अम्मी अब्बा मेरे माँ पापा थे और माँ भी डलहौज़ी से अक्सर आ जाती है काशान आज भी मुझसे उतना या शायद उससे ज्यादा प्यार करता है 

 

 

 

 

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