आज 3 महीने बाद पिताजी ने बड़ी मस्कत के बाद मेरी बेल करवाई है। पूरे 3 महीने बाद जेल से आजादी मिली है। हालाँकि मुझे इस आजादी की कोई खुशी नहीं है। क्योंकि बिना किसी गुनाह के 3 महीने जेल में गुजारना उम्र कैद की सजा से भी ज्यादा तकलीफदेह है। पर यह गुजरा हुआ 15 महीने का वक़्त मुझसे ज्यादा मेरे माता पिता के लिए भारी रहा है। जिस उम्र में मेरे माता पिता मेरी खुशियॉ और तरक्की को देख कर फूले नहीं समाते ,उस उम्र में मुझे बेगुनाह साबित करने की कोशिश में जुटे हुए हैं!पर क्या मेरी इस रिहाई के बाद सब ठीक हो जायेगा? मेरे साथ जो हुआ है,उन परिस्थितियों में लोग जब आप को अपराधी मान लेते हैं, तो आप बहुत कोशिशों के बाद भी अपने लिए समाज में वह दर्जा वापस नहीं ले पाते।
अभी 15 महीने पहले की ही बात है जब मैं तरक्की की एक और सीढ़ी चढ़कर सिर्फ 28 साल की उम्र में लड़कियों के हाई स्कूल का टीचर बन कर स्कूल पहुंचा था। इस उम्र में नया खून नया जोश वाली स्थिती थी मेरी। उम्र का पड़ाव होता ही ऐसा है कि हर बंदा अपने आप में फिल्म का एक हीरो होता है। और मैं कामयाबी की और भी बढ़ रहा था तो मेरा उत्साह दुगना होना लाजमी था। भगवान ने भी सीरत और सूरत दोनों ही देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मेरा स्कूल में पहला दिन था। एक टीचर के तौर पर पहला दिन बहुत ही अच्छा गुजरा था। पर मुझे यह कतई पता नहीं था कि स्कूल के माहौल में एक अलग ही हलचल सी हुई थी। मुझे कुछ समय के बाद पता चला की कुछ लड़कियों ने अपने मन में मेरी एक अलग ही छवि बना ली थी। उनमें से कुछ लड़कियों में मेरा मोबाइल नंबर पाने की होड़ सी मच गयी थी। मेरा मन पूरी तरह उन लड़कियों के लिए गुरु शिष्य के रिश्ते से ज्यादा कुछ नहीं था।
हद तो तब हुई जब स्कूल की कुछ लड़कियों ने आपस में शर्त ही लगा ली की कोन मेरा नंबर जल्दी हासिल कर पाती है। नेहा 11 में पढ़ती थी। उसके पिताजी की पहचान के ही एक सर जो मेरे सहकर्मी थे,उनसे झूठ कहकर की उसे अंग्रेजी ग्रामर का एक चैप्टर समझने में दिक्कत महसूस हो रही है, यह कहते हुए नेहा ने मेहता सर से मेरा नंबर ले लिया। क्योँकि मैं उस स्कूल में अंग्रेजी का टीचर था तो मेहता सर ने मेरा नंबर ख़ुशी से दे दिया। नेहा वो नंबर मीना को दे दिया। चूँकि शर्त मीना और पायल के बीच लगी थी तो पायल को इस बात का बुरा लगा। उस दिन के बाद से मेरे पास नए नम्बरों से मिस कॉल और मैसेज आना आम सा हो गया था। पहले पहल तो मैं इसे लड़कियों की नादानी समझ कर नजरअंदाज कर देता था, फिर मैंने उन्हें क्लास में समझाने की कोशिश भी की क़ि गुरु और शिष्य का रिश्ता बहुत ही पवित्र होता है। इसे पावन ही रखें। पर कहते हैं ना यह उम्र चिकना घड़ा होती है उस पर जितना भी पानी डालो सब व्यर्थ होता है।
मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ । मुझे फ़ोन कॉल्स और मैसेज आने बंद नहीं हुए। मुझे स्कूल में 6 महीने हो चुके थे। अब तो हद ही हो चुकी थी!लड़कियों ने मुझे सीधे ई लव यू सर,सर मुझसे शादी कर लीजिए जैसे मैसेज करने सुरु कर दिए थे। मैं इस बात से अब डर रहा था। क्योँकि इस बात का जरा सा भी पता किसी को लगा तो यह मेरे करियर के लिए नुकसानदायक ही होगा। इसीलिए मैंने यह पूरी बात प्रिंसिपल सर को बताने का फैसला कर लिया। स्कूल में जब मैंने देखा कि प्रिंसिपल सर अपनी ऑफिस की फाइलों में अकेले बैठे कुछ कर रहे हैं तब मुझे यह सही मौका लगा उनसे अपनी बात कहने का। मैं जैसे ही सर से परमिशन लेकर उनके पास पहुंचा सर ने तपाक से मुझसे कहा "यस गुप्ता सर आज आप इस वक़्त क्लास में नहीं हैं ?मैंने भी सर की बात सुनते ही तपाक से कहना शुरु किया कि सर मुझे आप से कुछ जरूरी बात करनी है। सर बहुत समय से इस स्कूल की लड़कियॉ मुझे कॉल व् मैसेज करती रहती हैं और मुझे अपने अभद्र फोटोज भी भेजती हैं। यह सब एक सांस में कहते हुए मैंने सर को अपने मोबाइल पर भेजी उन सभी तस्वीरों को दिखा दिया। पहले तो सर भी एक गहरे आश्चर्य में चले गए। साथ ही उन्होने मुझे भी डाँट लगायी की इतनी बडी बात मैंने अब तक छुपा कर क्योँ रखी। साथ ही हिदायत भी दी क़ि गुप्ता सर आपको पता भी है अगर यह बात बाहर किसी को गलत तरह से पता चल गयी तो आपकी नोकरी खतरे में पड़ सकती है। अब आप निश्चिन्त रहें मैं आज ही इस पर जरूरी एक्शन लेता हूँ! इस आस्वासन से मुझे तसल्ली मिल गयी।"
प्रिंसिपल सर ने तुरंत ही एक्शन लिया। उन्होंने उन सभी लड़कियों जिनके फ़ोन नंबर व् फोटोज मेरे मोबाइल में थे उन्हें स्टाफ रूम में बुलाया। सर ने उनकी ओर देखते हुए कहा तुम सभी ने गुरु के साथ जो करने की कोशिश की है वह कार्य आशोभनीय है। साथ ही तुमने नारी जाती का भी अपमान किया है! क्या किसी स्त्री को ऐसे बेहूदा फोटोज किसी व्यक्ति को भेजना शोभा देता है!पर मैं तुम्हारे आने वाले कल को देखते हुए तुम्हे नादाँन समझ कर तुम लोगों की लिखित माफ़ी पर तुम्हें छोड़ रहा हूँ। पर आइंदा ऐसी गलती होने पर आपके पलकों को बुला कर आपको रेस्टीकेट कर दिया जायेगा। अब आप सभी वापस अपनी क्लास में जा सकती हैं। इसके बाद मुझे लगा सब ठीक हो गया है। और में सुकून से अपना काम करने लगा।
पर मुझे क्या पता था कि यह खमोशी आने वाले तूफ़ान की पहली ख़ामोशी है। उस दिन के पूरे दो महीने बाद जब मैं स्कूल की लाइब्रेरी में अकेला बैठा पढ़ रहा था। स्कूल टाइम पर वैसे भी लाइब्रेरी खली होती है! अचानक से मैंने दरवाजे के बंद होने की आवाज सुनी। जैसे ही मैं दरवाजे की ओर बढा , स्कूल में ही पढ़ने वाली 12वी की एक लड़की विशु मुझसे आकर लिपट गयी और मुझे चूमने की कोशिश करने लगी। सब कुछ इतना अचानक हुआ की मैं कुछ समझ ही नहीं पाया। मैंने इस स्थिति में जल्द ही दिमाग को स्थिर किया । और अपनेआप को सम्हालते हुए विशु को एक जोरदार तमाचा जड़ते हुए बाहर आ गया। बाहर आते बी ये बात मैंने प्रिंसिपल सर से कही।सर को पहले तो यकीन नही हुआ पर फिर वो आश्चर्य से भर गए की क्या कोई लड़की आपने ही साथ ऐसा कर सकती है । पर प्रिंसिपिल सर ने तुरंत ऐक्शन लिया , उन्होंने विशु को ऑफिश में बुलाया और विशु को अपने पिताजी को स्कूल में बुलाने को कहा , विशु ने जब यह सुना तो वह रोने लगी गिड़गिड़ाने लगी सर प्लीज् मुझे माफ़ कर दीजिये सर यह गलती मुझसे दुबारा नहीं होगी । उस दिन गुप्ता सर की वजह से जो हमें डांट पड़ी मैं उसका बदला लेने के लिये सर को बदनाम करना चाहती थी। सर प्लीज माफ़ कर आज के बाद सर तो क्या मैं किसी के भी साथ ऐसी गलती नहीं करुँगी। सर मेरा यह आख़री साल है स्कूल में अगर मेरे पिताजी को पता चला तो वो मेरे पढ़ाई बीच में ही छुडवा देंगें। सर मेरा भविष्य खराब हो जायेगा सर मुझे माफ़ कर दीजिये। विशु की यह बात मुझे भी सही लगी अगर बाहर यह बात फैल गयी तो विशु का भविष्य खराब हो जायेगा और बदनामी होगी सो अलग । इसलिए मैंने प्रिंसिपल को रोक लिया पर मुझे क्या पता था यह कर के मैं अपने ही पैर पर कुल्हाडी मार रहा हूँ। सर ने विशु को थोड़ी फटकार लगाई " क्योंकि गुप्ता सर और मैं तुम्हारा भविष्य ख़राब नहीं करना चाहते इडलिये माफ़ कर रहे हैं। तुमने जो किया है वह शर्मनाक है , इसलिए अब तुम स्कूल में सिधे एग्जाम वाले दिन ही एग्जाम देने आओगी तब तक नहीं आओगी" यह कहकर छोड़ दिया। पर इस घटना के बाद मेरा मन उस स्कूल और शहर दोनों में ही नहीं लगता था। मेरे माता पिता भी नहीं चाहते थे इतना सब होने के बाद भी मैं उस स्कूल में काम करूँ। इसलिए मैंने इस बारे में प्रिंसिपल सर से बात की, सर ने भी मेरा सहयोग किया क्योंकि फाइनल एग्जाम को बस एक ही महीना बांकी था और कोर्स भी पूरा हो चूका था इसलिए सर ने मेरा तबादला लड़कों के स्कूल में कर दिया।
अब मैं शुकुन से था और उस घटना को भूल ही चूका होता पर दुर्भाग्य इतनी आसानी से पीछा कहाँ छोड़ता है। मेरे साथ भी वही हुआ जिससे मैं पीछा छुड़ा कर भागा था। विशु ने मेरे खिलाफ पुलिस मैं शिकायत दर्ज कर दी की मेने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी और जब विशु ने मेरी बात नहीं मानी तो उस पर मैने हाथ भी उठाया। और जब उसने इस बात की शिकायत प्रिंसिपल से की तो सर ने भी उसकी बात नहीं सुनी बल्कि विशु को बदनामी का डर दिखा कर सिर्फ गुप्ता सर का तबादला दूसरे स्कूल में करके बात को टाल दिया। और उसके पास इस बात का ठोस सबूत भी है। दरसल उस दिन जब लाइब्रेरी में जब वह घटना हुई थी तब विशु ने उसका वीडियो बना लिया था। वीडियो कुछ इस तरह से लिया गया था कि समझ ही नहीं आ रहा था किसके साथ जबरदस्ती हुई है और किसने जबरदस्ती की हुई है। और उसने यह भी बताया कि क्योंकि उसके फाइनल एग्जाम थे और उसे एग्जाम देने से रोक दिया जायेगा इस धमकी के डर से वह 2 महीने तक शांत रही। विशु ने तो शिकायत कर अपनी डांट पड़ने वाली बेज्जती का बदला ले लिया।
पर विशु की शिकायत का अंजाम ये हुआ की प्रिंसिपल सर और मुझे तुरंत ही ससपेंड कर दिया गया साथ ही मुझे हवालात मर बंद कर दिया गया। आज पूरे 3 महीने लग गए मेरे पिताजी को अपने बेगुनाह बेटे को बेगुनाह साबित करने में। मेरे लिए इस बीच जो लोगों की सम्मानीय नजर थी वह बदलकर समाज पर कलंक, इंसान के रूप में भेंड़िया, गुरु के नाम पर धब्बा जैसे कसीदे मेरी तारीफ में पड़े जाने लगे थे। वह तो भला हो प्रिंसिपल सर का जिन्होंने बड़ी मेहनत व खोज बीन के बाद उन लड़कियों के लिखे माफ़ी नामें ढूंढ निकाले। जो मेरी बेगुनाही का आखरी साबुत थे। विशु का बदला तो मुझे बदनाम करके पूरा हो गया। कानून ने मुझे बाइज्जत बरी भी कर दिया पर क्या समाज से भी मुझे बाइज्जत बरी कर दिया जायेगा ????




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