यह कहानी उसकी है जो मुझसे सबसे ज्यादा नफरत करती है उसका नाम है नेहा उसके साथ जो भी हुआ आज मैं जब भी सोचता हूं तो मुझे अंदर तक हिला हिला कर रख देता है... नेहा एक बात बोलूं हां..... बोलो यार तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो....... तो मैं क्या करूं अच्छी, तो मैं सबको लगती हूं यार मैं तुमसे प्यार करता हूं तो इसमें मैं क्या करूं मैं तुमसे प्यार नहीं करती तुम किसी की फीलिंग नहीं समझ सकती क्यों मैं फालतू हूं क्या जो सबकी फिलिंग समझूं चलो ओके ठीक है यार गुस्सा मत हो कुछ दिनों बाद क्या बात है नेहा आज तुम बहुत खुश नजर आ रही हो. हमने सुना है कि आपको प्यार हो गया आप को किसने बोला हमने तो सुना है हां यार मैं उससे बहुत प्यार करती हूं कब हुआ यह सब बस कुछ दिन पहले यह घड़ी किसने दिलाई.... मेरे प्यार ने. कौन है वह.? मेरी लाइफ अच्छा कृष्णा हां यह घड़ी अच्छी नहीं लग रही घड़ी अच्छी नहीं लग रही मैंने तुमसे नहीं पूछा मुझे तो अच्छी लग रही है फेंक दो ना इस घड़ी को क्यों तुम्हें तकलीफ हो रही है नहीं मुझे क्यों तकलीफ होने लगी मैं तो बस यूं ही बोल रहा थाचलो ठीक है बंद करो बकवास मुझे बहुत सारा काम है....... अब कुछ बाद वैलेंटाइन डे आ गया नेहा का तो खुशी का ठिकाना ही नहीं था उसका पहला वैलेंटाइन डे था ना वह बहुत सारी उम्मीद लगा रखी थी शायद उसने कृष्णा ने उसको टेडी बेयर दिया और एक चॉकलेट वह भी बहुत महंगी ₹150 वाली वह बहुत खुश नजर आ रही थी मुझे भी उसे खुश देखकर बहुत अच्छा लग रहा था मैं बस भगवान से यही दुआ कर रहा था कि बस वह हमेशा ऐसे ही खुश रहे लेकिन भगवान मेरी कहां सुनता है वह तो अपनी मर्जी अपनी मर्जी का मालिक है जो मैं चाहता हूं वह तो बिल्कुल ही नहीं करता लगता है बरसों की दुश्मनी थी हमारी चलो छोड़ो मैं भी फालतू की बातें बता रहा हूं कहानी पर आता हूं उसके बाद, नेहा के दिन और भी अच्छे जाने लगे और रोज बात होने लगी और घूमने का प्लान भी बना सिटी प्लेस भी घूमने गए बहुत मजा आया उसे वहां पर जाकर कृष्णा के साथ बहुत मजे किए उसने यूं समझ लो वह अपने आप को बहुत लकी समझ रही थी उसे जो चाहिए था वह सब कुछ मिल गया था बस थोड़ा सा बाकी था उसकी किस्मत इतनी अच्छी थी कि उसे सब कुछ मिलता है थोड़ा भी मिल गया कुछ दिन बाद जिसे वह शायद कभी जिंदगी में नहीं भूल पायेगी नेहा ने कृष्णा को फोन किया हाय कैसे हो बहुत बढ़िया


क्या कर रहे हो

कुछ नहीं बोल जान के चाहिए तन

कुछ नहीं आप मिल गए सब कुछ मिल गया

तो कल घर पर मिलने आ जाओ ठीक है कितने बजे

10:00 बजे आ जाओ

नेहा का खुशी का ठिकाना नहीं था वह अपनी जिंदगी से मिलने जो जा रही थी वहां वह सब कुछ हुआ जो एक लड़का चाहता है शायद लड़की भी लेकिन इस उम्मीद के साथ कि वह लड़का उसका जिंदगी भर 7 निभाए गा उसके बाद वह ऑफिस में आ गई जहां वह जॉब करती थी उसका चेहरा देख कर मुझे लग था हां जैसे उसने पहली बार अपनी जिंदगी जि हो उसे आज वह सारी खुशियां मिल गई थी जो उसे चाहिए थी भगवान को भी थैंक्स बोला होगा आज उसने इस दिन के लिए

बाद मैं उसे पता चला कि वह उससे प्यार नहीं करता उसका यूज़ कर रहा है

कुछ दिनों बाद कृष्णा ने कहा यार मैं दिल्ली जा रहा हूं तो तुम तुम घर पर मिलने आ जाओ

यार मैं ऑफिस में हूं तुम ऑफिस आ जाओ ना

नहीं तुम घर पर आ जाओ मैं

नहीं आ सकती यह सुनकर कृष्णा को लगा कि अब उसका काम नहीं बनेगा तो उसने उस से पीछा छुड़ाने की सोचा और बोल दिया

तो ठीक है आज के बाद मुझसे बात मत करना और मेरे नंबर डिलीट कर देना और मुझसे बात करने की कोशिश भी मत करना

आज भी नेहा आस लगाए बैठी की कृष्णा का फोन आएगा और उसे सॉरी बोलेगा और पूछेगा कि जान के चाहिए तन तेरे खातिर जान भी दे दूं

मुझे यह तो नहीं पता कि मैंने उस से प्यार करता हूं या नहीं करता लेकिन उससे लड़ाई करना उसे बातें करना उसको चिढ़ाना वह रुठ जाए तो उसे मनाना बहुत अच्छा लगता है उसके साथ वक्त का पता ही नहीं चलता कब वक्त गुजर जाता है और दिन भी अच्छा जाता है , एक बात उसकी मुझे बहुत अच्छी लगती है जब भी मैं उसे गुस्से में यह बोलना चाहता हूं कि तुम ना बहुत गंदी हो

जब भी मैं यह बोलना स्टार्ट करता हूं

तुम ना

हां मुझे पता है मैं बहुत अच्छी हूं

यह सुनकर मुझे बहुत खुशी होती है.

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