नुक्कड़ नाटक

कलाकारः
1. आम आदमी (सूत्रधार) सामान्य कपड़ो में
२ आम महिला साड़ी में
३ इंस्पैक्टर खाकी वर्दी में
४ एक युवा लड़की भड़कीली पोशाक में
८ गले में रंगीन रूमाल डाले हुये गली के शोहदे २ लड़के
५ अखबार का लिबास पहने हुये ..अखबार के रूप में एक लड़का
६ टी वी चैनल का पत्रकार ..हाथो में माइक लिये हुये
७ आतंकवादी की सूरत में एक लड़का
८ भीड़ से दो लड़के

सामग्री
1. एक स्कूल का घंटा
2 एक बैग में बम
३ एक स्टूल
स्थलः सडक के किनारे कोई चैराहे का नुक्कड

सूत्रधार आम आदमी … घंटा बजाते हुये ….टन टन टन ….. लो हो गई अदालतो की गर्मी की छुट्टियां ! सुप्रिम कोर्ट में ६० हजार प्रकरण लंबित हैं ! ४४ लाख प्रकरण देश के विभिन्न हाई कोर्टो में और लगभग तीन करोड़ प्रकरण निचली अदालतो में पेंडिंग हैं . और हो गई अदालतो की महीने भर की छुट्टियां ! अब जज साहबान गर्मी मनाने बच्चो बीबी के साथ पहाड़ों पर जायेंगे !

आम महिला ……… .अंग्रेजो की गुलामी के दिनो की याद है ? तब एसी , कूलर बिजली के पंखे नही होते थे … तब गर्मियो में पूरी राजधानी ही पहाड़ो पर शिफ्ट कर दी जाती थी … क्योकि अंग्रेजो को गरमी बर्दाश्त नहीं होती थी . गर्मियो की छुट्टियां अंग्रेजो की ही देन है जिसे अदालतें आज भी ज्यो का त्यों ढ़ो रही हैं , ठीक वैसे ही जैसे अदालतो की अंग्रेजी और खास गैर हिन्दी भाषा .

सूत्रधार आम आदमी .. अरे कोई तो बता दो इन जज साहब को कि जस्टिस डिलेयेड इज जस्टिस डिनायड . अब कब तक कानून आंखो पर पट्टी बांधे अंधा बना रहेगा ? कब तक न्याय पेशी दर पेशी बरसों पकता रहेगा जैसे बीरबल की खिचड़ी ! देश के राष्ट्रीय ला संस्थानो से पाँच साला एल एल बी कोर्स के पढ़े लिखे होनहार युवाओ में संभावना की कौंध नजर आती है , पर वे भी कारपोरेट जगत की हाई पैकेज वाली चकाचौंध से प्रभावित हैं और उन्हें इस चमक से बचाने के कोई प्रयास भी नही हो रहे . यहाँ आज न्याय की रक्षा करने वाले बैरिस्टर कम और कानून के लूप होल में से मल्टी नेशनल्स के लिये मोटी रकम निकालने वाले कारपोरेट ला विशेषज्ञ अधिक बन रहे हैं .
अदालतो में आज भी वही ईवनिंग क्लासेज से ला किये हुये वकील ही काम कर रहे हैं , हर पेशी में मिलने वाली फीस में फैसले से ज्यादा रुचि होना उनकी परिस्थितियो की मजबूरी है .
इंस्पैक्टर ….. क्या हो हल्ला मचा रखा है ..अदालतें बंद हैं महीने भर को , तो क्या है ..तुम्हें पता नही है क्या कि जस्टिस हरीड इज जस्टिस बरीड ! और श्रीमान आम आदमी तुम्हें क्या , जवान उठाई और पटक दी , लगे सरकार को कोसने ! तुम इतना तक नही जानते कि न्याय की देवी ने आंखो पर पट्टी इसलिये नहीं बांधी है कि कानून अंधा है , बल्कि इसलिये बांधी है क्यो कि कानून के लिये सब बराबर हैं ! कानून सबूत मागता है , वह तुम्हारी तरह भावनाओ से बहकता नही है ..सबूत ढ़ूंढ़ने के लिये पुलिस है , प्रशासन है , सबूत पेश करने के लिये काले कोट में वकील हें … .अदालतें कम हैं तो क्या हुआ …केस ज्यादा हैं तो क्या हुआ …सब ठीक ठाक ही है … स्थिति नियंत्रण में है !
इंस्पैक्टर बैठ जाता है .

युवा लड़की भड़कीली पोशाक में इतराते हुये …कुछ किताबें लिये हुये , मोबाइल पर बात करते प्रवेश करती है .

गले में रंगीन रूमाल डाले हुये गली के शोहदे लड़के उसे छेड़ते हुये …ओय होय !! ………. चलती क्या खंडाला !

लड़की …. सैंडिल उतारकर लड़को की ओर मुखातिब होकर …. मैं आजाद देश की प्रगतिशील लड़की हूं ! लड़को से हर दौड़ में एक कदम आगे , मुझे छेड़ते हो !

इंस्पैक्टर ….दौड़कर लड़की का हाथ पकड़कर ..हाथ ऊंचे उठाते हुये…… कानून महिलाओ के साथ है .

सूत्रधार आम आदमी…. देश प्रगति कर रहा है , पश्चिमी देशो की बराबरी कर रहा है नारी की पूजा अब पिछड़ेपन की बातें हैं . अब हमने पत्रिका के पन्नो पर नारी देह को विज्ञापनो में परोसने में प्रगति के सूत्र ढ़ूढ़ निकालें है . मुन्नी बदनाम हुई और शीला की जवानी जैसे फिल्मी गीतो ने राष्ट्रीय लोकप्रियता के रिकार्ड बनाये हैं , सेंसर से स्वीकृत ऐसी फिल्मो को हम ही बाक्स आफिस पर हिट कर रहे हैं .समाज ने ऐसी व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है कि एक क्लिक पर चंद रुपयो के लिये स्त्री स्वयं सारे बंधनो से मुक्त हो रही है .

आम महिला ………हर बरस देश में लगभग २० से २५ हजार … बलात्कार के प्रकरण पुलिस रिकार्ड में दर्ज हो रहे हैं , और पुलिस के बड़े बूढ़ो का कहना है कि इससे कहीं ज्यादा घटनायें आन रिकार्ड आती ही नही है ….. देश की राजधानी तक में लड़कियो के साथ तरह तरह से बत्ततमीजियां हो रही हैं . तंदूर में जिंदा जला दी गई लड़कियां . लड़कियो के शरीर के टुकड़े टुकड़े करके सूटकेस में भरकर फेका तक है दंरदियो ने . ८ साल से ६० साल तक की स्त्री ही नही , नन्ही सी बच्ची भी सैक्स वृत्ति जनित अपराधो से बच नही पा रही ! ळड़कियो की खरीद फरोख्त हो रही है ..कैसे हब्शी युग में जा पहुंचे हैं हम ? पुलिस थानो में भी महिलायें असुरक्षित हैं .

इंस्पैक्टर … लेकिन जनता बिलकुल कनफ्यूज न हो ..महिला थाने बनाये गये हैं . निर्भया फंड आबंटित हो चुका है . दामिनी की कुर्बानी बेकार नही गई है . जनता जाग गई है , …धीरे से…. अब हम सो सकते हैं .. सारी जस्ट फार जोक ! स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है ! और इसका प्रमाण भी है .. लाखो लड़कियां अपने घरो से दूर उच्च शिक्षा ले रही हैं , नौकरियां कर रही हैं , रोज बसों , मैट्रो में ट्रेवल कर रही हैं . रात की पारी में दफ्तरो कारखानो में पुरुषो के कंधो से कंधे मिलाकर काम कर रहीं हैं , देश की प्रगति में अपना योगदान दे रहीं हैं . है ना स्थिति नियंत्रण में !
इंस्पैक्टर बैठ जाता है .

अखबार का लिबास पहने हुये ..अखबार के रूप में एक लड़का गोल घुमता हुआ भीड़ के बीच से केंद्र में प्रवेश करता है …. आज की ताजा खबर ! साइबर क्राइम ब्रांच ने पकड़ा मंत्री जी के विरुद्ध टिप्पणी करने वालो को ! सोशल मीडिया पर सरकार की होगी नजर ….
सूत्रधार आम आदमी…. फेसबुक पर की गई एक बौद्धिक टिप्पणी या एक कार्टून तो मंत्री जी को नागवार गुजरते हैं और इस साइबर क्राइम को रोकने सारा तंत्र सक्रिय हो जाता है , पर सरकार उस दहशत गर्द को कभी नही पकड़ पाती जिसकी फैलाई अफवाहो से दक्षिण भारत से सारे पूर्वोत्तर राज्यो के कामकाजी लोगो को बेवजह पलायन करना पड़ा और सरकार के नुमांइदो को बयान देना पड़ा था कि स्थिति नियंत्रण में है !

आम महिला …… अभिव्यक्ति का अधिकार हमारा मौलिक संवैधानिक अधिकार है . सोशल मीडिया पर यह सरकारी पहरेदारी कितनी सही कितनी गलत है ? कोई बतायेगा ! अगली बार फिर से कम्प्यूटर के जरिये कोई अफवाह कोई दहशत कोई आतंक न फैले ,आतंकवादियो को मदद न मिले इंटरनेट से . ई मनी के इस समय में देश की अर्थ व्यवस्था ही जाम न हो जावे हैकिंग से … इसके लिये जरूरी है कि इंटरनेट पर नियंत्रण हो , ई मेल एड्रेस का पंजीकरण लागू किया जावे .

सूत्रधार आम आदमी…. इंटरनेट ने देश से भ्रष्टाचार मिटाने में और कानून व्यवस्था लागू करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है . चाहे रेल रिजर्वेशन हो , सरकारी योजनाओ के अनुदान हों , बिलों के भुगतान हों हमें जहां इस आधुनिक संसाधन का व्यापक जनहित में बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगा वहीं यह भी देखना होगा कि दूषित सामग्री वाली पोर्न साइट्स हमारी नई पीढ़ी को दिग्भ्रमित न कर सकें .

इंस्पेक्टर … जनता की ओर मुखातिब होकर …अरे साहबान आप इन बेचारे सूत्रधार को केवल नुक्कड़ नाटक का सूत्र ही संभालने दें . आप जरा भी चिंतित न हों . इस देश की कानून व्यवस्था को संभालने के लिये इस देश में अब भी पुलिस है ! मैं हूं ! बड़े बड़े आई पी एस , आई ए एस अफसर हैं …लाल बत्तियो की गाड़ियो पर सवार बड़े बड़े मंत्री हैं ! स्थिति नियंत्रण में हैं !
इंस्पैक्टर बैठ जाता है .

टी वी चैनल का पत्रकार ..हाथो में माइक लिये हुये प्रवेश करता है . ब्रेकिंग न्यूज ! नक्सलवादियो ने फिर किया बारूदी सुरंगो का विस्फोट . परिवर्तन यात्रा पर बड़ा हमला . कई घायल .

सूत्रधार आम आदमी …महात्मा गांधी को देश के नेताओं ने आजादी के बाद अपने-अपने ढंग से उपयोग किया है . उनकी सफेद खादी राजनेताओ की यूनीफार्म बन गई है , जिसे पहनकर वे हर संभव काले कारनामे कर रहे हैं . कोई गांधी की लाठी ले भागा है और उसे भांजकर छल बल से वोट बटोर रहा है . कोई उनके राम के नाम को भुना कर वोटो में तब्दील कर रहा है . शपथ लेने ,अनशन करने और विदेशी अतिथियो को घुमाने के लिये गांधी को राष्ट्रपिता बनाकर उनकी एक संगमरमरी समाधि बना दी गई है . गांधीवाद दम तोड़ चुका है . जहां हमारी सीमायें विदेशी आतंक से बुरी तरह प्रभावित हैं वहीं देश के भीतरी हिस्सो में भी आतंकवादी जब तब कानून व्यवस्था एजेंसियो के तालमेल में अभाव के चलते छोटी बड़ी वारदातें करने में सफल हो रहे हैं . सीरियल बम विस्फोट की कई घटनायें देश के कई शहरो में घट चुकी हैं . देश की आजादी का जश्न हो या गणतंत्र दिवस का भव्य आयोजन हर बार जैसे सुरक्षा बलो की अग्नि परीक्षा होती दिखती है .

आम महिला … विदेशी आतंक के साथ ही आंतरिक आतंक नक्सलवाद की शक्ल में अपनी जड़ें जमा चुका है . राज्यो की सीमावर्ती क्षेत्रो में , आदिवासी बहुल इलाकों में नक्सल गतिविधियां चरम पर हैं . प्रत्येक घटना के ठीक बाद मंत्री जी के शांति बनाये रखने के खोखले बयान , जाँच करके वास्तविक दोषी को सजा दिलाये जाने के आश्वासन आम नागरिको के लिये विश्वसनीय नही रह गये हैं . मानवाधिकार संगठनों के आंदोलन , राजनैतिक पार्टयो के बंद , इन सब से आम नागरिक ऊब चुका है .

इंस्पेक्टर … टी वी के हर बुलेटिन में इन कड़वे सच को ब्रेकिंग न्यूज के रूप में देखकर भी , हर सुबह अखबार की सुर्खियो में देश के ऐसे बदसूरत हालात चाय की घूंट के साथ पीते हुये भी , जनता एक सुखद भविष्य की कामना में चार लगभग समान राजनैतिक ठग चेहरो में से किसी एक को वोट देकर चुनती ही है . लोकतंत्र कायम है और दुनिया के दूसरे देशो से कही बेहतर है . स्थिति नियंत्रण में है . हर घटना हमें एक शिक्षा देती है , बेहतर समन्वय से , बेहतर व्यवस्था से देश का प्रशासन हर नागरिक को पूरी सुरक्षा देने को प्रतिबद्ध है .

तभी भीड़ के एक हिस्से में हलचल मचती है , और भीड़ से दो युवक एक आतंकवादी को पकड़ कर केंद्र में लाते हैं . इंस्पेक्टर साहब संभालिये इसे यह संदिग्ध आदमी यहां यह बैग छोड़कर भाग रहा था . इंस्पेक्टर बैग खोलकर देखता है और बम निकालता है .
इंस्पेक्टर … आतंकवादी को कालर से पकड़कर , अच्छा तो तुम यहां बम विस्फोट करना चाहते थे . पर मेरे देश के नौजवानो ने कर दी ना तुम्हारी कोशिश नाकाम .शाबास नौजवानो !

सभी कलाकार हाथ जोड़कर मानव श्रंखला बनाकर आतंकवादी को गोल घेरे में ले लेते हैं .
इंस्पेक्टर …स्टूल पर खड़े होकर
दोस्तो ! अकेली सरकार कुछ नही कर सकती . हम सब को ऐसे ही चौकस रहना होगा . जब तक हम सतर्क हैं और अपने अपने परिवेश , अपने घर के आस पास , सार्वजनिक स्थलो पर चौकन्ने हैं तब तक

कोई भी अपराधी सफल नही हो सकता . इस देश की सवा अरब की आबादी ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है . क्लोज सर्किट कैमरो की निगरानी , ढ़ेर सी पुलिस से बढ़कर है हमारी परस्पर संवेदना , जागरुखता , सामयिक , तात्कालिक बुद्धि से उठाया गया छोटा सा कदम . प्रायः भगदड़ से होने वाली दुर्घटनाओ का मूल कारण किसी एक व्यक्ति द्वारा नियमो को तोड़कर जल्दबाजी मचाना होता है . जरूरी है कि भीड़ में हम सब संयम से काम लें कतार में कार्य करें . कानून आपके साथ है , पर आपको भी कानून का साथ देना होगा . उठाईगिर , पिक पाकेट या यौन अपराधी तक समाज की सतर्कता से कभी भी उसके मकसद में कामयाब नही हो सकता . सड़क दुर्घटना में पीड़ित के प्रति हमारी संवेदनशील त्वरित कार्यवाही उसकी जान बचा सकती है . आइये संकल्प करें कि केवल सरकारी तंत्र को दोष देने के बजाय हम अपनी सोच बदलेंगें और घर बाहर अपने कान , नाक , आंखे खुली रखकर पुलिस की हर संभव सहायता करेंगे . क्योकि बढ़ती आबादी के दबाव में हमारे इसी प्रयास से रहेगी स्थिति नियंत्रण में .

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