चार सालों से दोनों रिलेशनशिप में है.लड़की अब कहीं और शादी करने जा रही है. अपनी माँ बाप की मर्जी से.दोनों लड़-झगड़ कर अलग होना नहीं चाहते है. साथ में बिताएं पलों को वे जीना चाहते है. सकारात्मक तरीके से.

दोनों साथ बैठे है. पर आज उन दोनो का हाथ एक दुसरे के हाथ में नहीं है.

लड़का लड़की का हाथ पकड़ लेता है. फिर धीरे से बोलता है,’’जाने-अनजाने में ही सही पर तुमने मुझे बहुत कुछ दिया है. याद है जब मैं पहली बार मुंबई आया था, तुमसे मिलने. तुमने हाथ पकड़ कर पूरा मुंबई घुमाया था. मरीन ड्राइव पर बैठना और उसके लहरों को देखना. हर उठती लहर तुम्हे छूकर मेरे अंदर आ जाती थी. और मैं अपने अंदर तेरे होने का एहसास करता था. दूर से आती हवाएं तुम से टकरा कर तुम्हारी खुशबू बिखेर देती थी. मैं आज भी उस खुशबू में डूबा हुआ हूँ. अगर तुम नहीं होती तो शायद मैं कभी मुंबई देख ही नहीं पाता. अब तो लगभग हर गली को पहचानता हूँ. हर सिनेमा हॉल को जनता हूँ. हर पार्क को जनता हूँ. एक अच्छा एहसास तुम्हारे साथ जुड़ा है. जब भी मुंबई आऊंगा, तुम मेरे दिमाग में आ जाओगी I क्या तब मैं अच्छे से मुस्कुरा भी पाउँगा?’’- वह थोड़ी देर चुप रहता है फिर बोलता है,’’ तुम भी कुछ बोलो, चुप क्यों हो!’’

लड़की लड़के के आँखों में देखती है. वह ज्यादा देर नहीं देख पाती है. उसे पता है वह थोड़ी देर और देखेगी तो उसके आँखों से आंसू आ जायेंगें I वह मायूस होकर बोलती है, ‘’क्या बोलूं ? बोलने जैसा कुछ बचा ही नहीं है ! बस इतना जानती हूँ, जिंदगी के किसी भी मोड़ पर रहूंगी, तुम्हारा चेहरा हमेशा मेरे दिमाग में घूमेगा. जब भी आइसक्रीम खाऊँगी तुम्हे याद करुँगी. जब भी गोलगपे खाऊँगी तुम याद आ ही जाओगे. जब भी कोई फिल्म देखूंगी तुम्हे साथ पाऊँगी. तुमने मुझे बहुत कुछ सिखाया है. देखो मैं अब कभी लड़की होने का फायदा नहीं उठती हूँ. कल मैं टिकेट ले रही थी तो एक लड़का लाइन में आगे लगने के लिए ऑफर किया. मैं मना कर दी. पुरे लाइन में लगी हूँ और तुम्हे याद करते हुए मुस्कुराई हूँ. मुझे आज भी याद है जब तुम डांटे थे मुझे यह कहते हुए कि लड़की होने का फायदा कभी मत उठाना. अब मुझे कोई सीट भी ऑफर करता है तो मैं नहीं बैठती हूँ. क्यों बैठूं ? मैं कमजोर थोड़ी ना हूँ. तुमने मुझे कितना मजबूत बना दिया है.”- वह थोड़ी देर चुप रहती है फिर कुछ सोचते हुए बोलती है –“ देखो अब मैं बात बात पर रोती भी नहीं हूँ’’

वह यह बोल ही रही थी की उसके आंख से दो बूंद आंसू ढल कर उसके गाल पर आ गए.

‘’वो तो ऐसे ही आंसू आ गए. मैं रो नहीं रही हूँ. सच में.’’-

वह यह बोलकर सिसक-सिसक कर रोने लगी.

‘’कैसे रहूंगी राहुल तुम्हारे बगैर. तुमने इतना अच्छे अच्छे मोमेंट्स दिए, पर मुझे कभी अकेले रहना क्यों नहीं सिखाया. मैं तुम्हे कभी माफ़ नहीं करुँगी ‘’

वह उसे रोते हुए नहीं देख सकता था. इस दुनिया में कोई भी इन्सान लड़की को रोते हुए नहीं देख सकता. वह उठ गया. उसे भी हाथ देकर उठाया.

‘’अब चलती हूँ ! ‘’- लड़की आंसू पोछते हुए बोली.

शाम होने की वजह से कुछ कुछ अँधेरा हो गया था. लड़की अनायास ही उसे गले लगा लेती है. दोनों बहुत देर तक वैसे ही रहते है. बहुत देर तक. फिर अलग हो जाते है. हमेशा के लिए.

वह साथ कैसी भी सड़क पर चली हो, पर जुदा एक खूबसूरत मोड़ देकर ही होना चाहती थी. एक ऐसा मोड़ जो तय किये गए सारे रास्ते को खूबसूरत बना दे. वह चाहती थी कि वह जब भी उसे याद करे तो एक अच्छा एहसास मिले.

इस घटना के चार साल बाद. वही लड़की कुर्सी पर बैठी है. उसके हाथ में चाय का कप है.

‘’अरे! कल जो गिफ्ट पैक करा कर लाया था वह कहाँ रख दी! जल्दी दो, आज बॉस का जन्मदिन है’’- उसका पति तैयार होते हुए पूछता है.

वह उठकर गिफ्ट देती है. एकदम नए और खूबसूरत तरीके से पैक. मानों दो चार घंटे लगा कर पैक की हो.

‘’अरे वाह ! इतनी खूबसूरत पैकिंग. मेरे बॉस को इम्प्रेस करना है क्या?”- वह बोलकर थोड़ा मुस्कुराया और ऑफिस चला गया.

आज के दिन ही राहुल का भी जन्मदिन था. था क्या है ! वह उसका चेहरा दिमाग में रखकर ही पैकिंग कर रही थी.

‘’तो क्या राहुल ही इनका बॉस है!..... नहीं..नहीं यह मेरा खूबसूरत भ्रम है !‘’- वह खुद से बोलकर मुस्कुराई और चाय पीने लगी.

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