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Mr. Joshi कि backstory से हम वापिस आएंगे वर्तमान मे।

वंदना किचन मै कुछ काम कर रही थी, एक दो बर्तन गिरनेकी आवाज़ आयी- जोकि काफी था Mr. जोशी को गहरी नींद से जगाने।

March के महीना और चुभनेवाली गर्मी ने मुंबई पर कब्ज़ा कर लिया था। पसीने से लथपथ उनकी शर्ट परेशान करने लगी। तभी वंदना ने एक हाथ से फैन की बटन दबाई। दूसरे हाथ मे खाने की थाली थी। टेबल पर थाली पटक दी और बोली,

"9 बजे हैं, आपको खा लेना चाहिए। फिर 9.30बजे कि नहीं आँखे आपकी factory की तरह बंद होती हैं"

Mr. जोशी ने चुपचाप खाना शुरी कर दिया। अब दिल तो किया वंदना से पूछने उसने खाना खा लिया क्या! पर पूछे कैसे!

इस बेचैनी परखते, साँप जैसे डसते हुए बोली,

"हाँ बाबा, मैंने कहा लिया- यूँ छुपकर न देखो... आप गूंगे नहीं हो... लेकिन मैं अंधी तो बिलकुल नहीं"


"You know, आपको कभी कभी खुलके बात करनी चाहिए...पहले जैसे.. at least मेरे साथ। मैं आ गयी ना वापिस। आपको अच्छा लगेगा।"


Mr. Joshi खाने मे व्यस्त थे- वंदना की बात सुनकर भी अनसुनी जैसे acting करने लगे। आखि एक वही तो थी जिसने उनकी जिंदगी मे एक नया रंग डाला था!

न जाने क्यों, वंदना उन्हें अपनी माँ कि याद दिलाती- हालाँकि इन्हें माँ का चेहरा तक याद नहीं था। पर हमेशा लगता कि माँ जरूर वंदना जैसी होगी- हँसी को चेहरे पर ओढ़े, दिनभर मस्ती करना, अपने ही अंदाज़ मे सबका खयाल रखना और बहुत कुछ...

उन्हें लगता, माँ बेटी बनकर आयीं हैं- शायद माँ का कर्त्तव्य जो अधूरा था, उसे बेटी बनकर पूरा करेगी।

Mrs. Joshi, विकास और विनीता हैरान होते उनको वंदना से इतना बात करते देख। हमेशा वंदना के अगले बगल मे लेके घूमते। अगर उनकी ज़िन्दगी मे कभी ख़ुशी का दौर था तो वो वंदना के साथ।

फिर एक दिन, जैसे शांत-सुखी शहर मे एक भूकंप , जोरदार वाला भूकंप, और फिर सब शोर, बर्बादी का शोर होता हो.. ठीक वैसे धक्का लगा Mr. Joshi जी को- वंदना भाग गयी- 2 दिन बाद पता चला उसकी शादी के बारे मै। कुछ सवालों के जवाब कभी नहीं मिलते। फिर आप उस सवाल को ही जवाब बनाते हो- Mr. Joshi मजबूरन अपनी पुरानी theory के पास गए- जिंदगी तो शापित ही होगी।


फिर वही आवाज़ आयी,

" अछा, वैसे मैं जान गयीं दीदी के बारे में- पहले से ही जानती थी इस आदमी कि हरकतों के बारे मै। I had my sources behind him! After all, BA in Journalism का फायदा कब होगा।"


"कितना try किया समझाने- पर नहीं! आपको तो सिर्फ मराठी ब्राह्मण लड़का ही चाहिए था, जो कभी foreign ना जा सके, बहोत अछा कमाने वाला, दिखावा करनेवाला। दीदी को एक बार भी नहीं पूछा और शादी कर डाली"


"वैसे, एक सस्पेंस वाली news बताऊँ? आपके लिए वो breaking news होगी ये"


Mr. Joshi कि जबान ने वंदना के शब्दों के सामने हार मान ली थी। पर वो news anchor वाली स्टाइल के सामने अपना disciplined look खो बैठे और झट से बोले,

"हाँ, बताओ!"


"सो called जीजू का एक अफेयर था- बहुत सारे थें, पर एक बड़ा मशूर हुआ था- girlfriend के हाथ बच्चा दिया और मुह फिर बैठे! ये केहके this girl has a questionable character and I was forced to father this child. ये साबित भी किया court मे"


" आप तो कितना अच्छा करैक्टर certificate दे रहे थें उसे"


"ये सब हरकते मैं नहीं सेहन करती, आप मेरा बचपना कहे या डर, मैं ये सब हरगिज़ होने नहीं देतिअपने आप को। इसलिए भाग गयी... अपने प्यार के साथ।"


" ये मत सोचिये, मेरी जिंदगी शापित हैं।"


Mr. Joshi चौंक गए। क्यों ना? इतने सालों से मन मे छिपे एक कड़वे शब्द को वंदना ने कैसे जाना?


" hahahaha... आपके चेहरे का तो रंग ही उड़ गया....

Surprised, मुझे कैसे पता चला? आपके अंदर का गहरा सच? "


Mr. Joshi अब shock mode मे थे। हाँ या ना कहना भी समझ नहीं आ रहा था।


"दो साल पहले, जब मैं घर से भागी थीं तब office मे एक कहानी छपने मिली थी, एक दिवाली स्पेशल मैगज़ीन मै.... शापित ज़िन्दगी.... मराठी मे थी- खैर उसे कोई इतना नहीं पड़ता- मेरे हाथों लगी। बड़े चालू क़िस्म के आदमी हो आप- वो कहानी आपने एक लड़की की आवाज़ मे लिखी, under the pen name- वंदना, वही आपकी माँ का नाम है- और मेरा भी। आप ही की बेटी हूँ।

पता है, the only reason why you chose your mother was- एक वहीं थीं जिनके गुज़र ने से आपके पिताजी और फिर आपने थान ली- औरतों की शापित जिंदगी होती हैं।

वो कहानी मेरे दिमाग मे बस गयी। कईं साल बीतें उस लेखक को ढूंढते ढूंढते। पिछले हफ्ते, इस सवाल का जवाब मैंने crack किया- और वो आप थे"


वंदना ने अपनी पॉकेट से पिले रंग के चार-फोल्ड वाली कागज़ का टुकड़ा टेबल पर Mr. Joshi के सामने रख दिया। और मुस्कुराकर बोलीं-


"मेरा divorce नहीं होने वाला हैं। वो तो बस आपकी सोच के साथ खेलने के लिए कहा गया झूट हैं। "


कुर्सी से उठते बोली, " अब आपकी इस सोच को जरूर ख़तम करुँगी। इसलिए आयीं हूँ।

अब उस क्रिमिनल lawyer को क्रिमिनल मैं साबित करुँगी। अब डर डर के bore हुई हूँ। थोड़ा लढने का मजा लैंलैं!"


वंदना को बैडरूम की तरफ जाता देख Mr. जोशी के मन की मुस्कराहट चेहरे पर आ गयीं थी।


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