कलाकारः
1. जादूगर (सूत्रधार)
2. जम्हूरा
3. गायक कलाकार वाद्यवृन्द के साथ
सामग्री
1. एक ताली लगी पेटी
2 क, ख, ग, घ, क्ष, त्र, ज्ञ लिखा बोर्ड
3 एक डुगडुगी
4 जादूगर की वेषभूषा एवं
5 जम्हूरे की वेषभूषा हेतु आवष्यक सामग्री
स्थलः सडक के किनारे कोई चैराहे का नुक्कड

जादूगरः (डुगडुगी बजाते हुए, आज पब्लिक परेशान है, नेता हैरान है और मेरा जम्हूरा
नादान है)
जम्हूराः …………………… नादान है।
जादूगरः बाबूसाहब आइये। मेडम जी आइये। बच्चा लोग गोल घेरा बना लो।
मेहरबान। कदरदान आज आपके शहर मे, इस चैराहे पर, फस्र्ट डे, फस्र्ट शो, एकदम हाउसफुल/ कोई टिकिट नहीं। टैक्स फ्री मनोरंजन। नाटक का नाटक। जदू का जादू। षिक्षा की षिक्षा। एकदम फ्री।
जम्हूराः ………………… एकदम फ्री।
जादूगरः हां, तो बच्चा लोग जोरदार ताली बजाओ हमारा शो स्टार्ट होने को है।
जम्हूराः ………………… स्टार्ट होने को है।
……………………. उस्ताद रोक के।
जादूगरः ऐ क्या बोलता है………………। रो के क्यूं ?
जम्हूराः उस्ताद वो भाई साहब आ रहे हैं। उनको आने दो।
जादूगरः ओ.के…………। उन भाई साहब को बुलाओ। इन बहनजी को बुलाओ। सब के
सब आओ। सब लोग अपने-अपने पर्स सम्हल कर रखना। पिक पाॅकेट से होषियार।
(इस तरह मजमा एकत्रित कर वातावरण तैयार किया जाता है)
जम्हूराः उस्ताद।
जादूगरः जम्हूरे।
जम्हूराः खेल शुरू हो। उस्ताद।
गायक कलाकार- (समवेत स्वर में)
शिक्षा का जादू दिखलाओ।
स्वाभिमान का पाठ पढ़ाओ।
योजनायें है, आज अनेकों।
जीवन स्तर उच्च उठाओ।
एक स्वर हो, एक ही लय।
गीत आज मस्ती के गाओ।
जादूगरः जम्हूरे।
जम्हूराः हां, उस्ताद।
जादूगरः ये तो बहुत अच्छा गीत है। ‘‘शिक्षा हमारी सच्ची मीत है।
जम्हूराः ऐसा क्या ? उस्ताद। मगर पब्लिक का प्राब्लम कुछ और है।
जादूगरः क्या है पब्लिक का प्राब्लम?
जम्हूराः पब्लिक का प्राबलम है-‘मनी‘। जनता को रोटी चाहिये। कपडा चाहिये।
मकान चाहिये। इज्जत की जिंदगी चाहिये।
जादूगरः जम्हूरे। पब्लिक की परेसानी का सोल्यूशन इस बाक्स मे है (एक बाक्स
जिसमें ताला लटका हुआ है की ओर इंगित करते हुये)
जम्हूराः अरे कहा उस्ताद (बीच मे रखी एक पेटी की ओर भागता है) पर इसमें तो
ताला लगा है उस्ताद।
जादूगरः बिल्कुल। जो पढता नहीं, उसके पास इस बाक्स की चाबी नहीं होती।
जम्हूराः जो पढ लिख लेता है, उसे इस बाक्स की चाबी मिल जाती है उस्ताद?
जादूगरः हां। इस बाक्स मे, वह ज्ञान धन है, जिसे हमारे पुरखो ने अपने अनुभवों से,
किताबों के रूप मे संजोया है। इसकी चाबी बडी टेढी-मेढी है, वह ‘‘क‘‘ है, ‘‘ख‘‘ है ‘‘ग‘‘ है ‘‘क्ष‘‘ ‘‘त्र‘‘ ‘‘ज्ञ‘‘ है (‘‘क‘‘‘‘ख‘‘ ‘‘ग‘‘ ‘‘घ‘‘ लिखा बोर्ड हवा मे लहराते हुये)
जम्हूराः ऐसा क्या उस्ताद।
जादूगरः इन पुस्तकों मे राजगार छिपा है, रोजगार में रोटी भी है, कपडा, मकान और
इज्जत की जिंदगी भी है।
जम्हूराः ऐसा क्या उस्ताद।
जादूगरः जिसने इन किताबो को पढ लिख, समझ लिया, वो ‘‘आम‘‘ से खास बन
सकता है। वो डाँक्टर बन सकता है, इंजीनियर बन सकता है प्रोफेसर बन सकता है, वैज्ञानिक बन सकता है, वो क्या नहीं बन सकता?
जम्हूराः यानी वो कुछ भी बन सकता है।
जादूगरः बिल्कुल। बहुत ताकत है, इन किताबों में। इन किताबों को पढने-समझने से,
जनता अपने आप को पहचान सकती है। वो सब कुछ देख सकती है, जो उसे देखकर भी दिखता नहीं। जनता अपने वोट की ताकत समझ सकती है। जनता नेता को पाठ पढा सकती है। नौकर, मालिक से अपना हक मांग सकता है। जम्हूरा, उस्ताद बन सकता है।
जम्हूराः (आष्चर्य से) किताब में इतनी ताकत होती है, उस्ताद ?
जादूगरः बिल्कुल। किताबें पढकर ही महात्मा गांधी, डा. अंबेडकर, बाबू जगजीवन
राम, इसी गोल घेरे से निकलकर, इतने उपर पहुंच गये। जनरल से स्पेशल हो गये।
जम्हूराः और जो न पढे तो ?
जादूगरः (गुस्से से) मत पढ।
पढेगा नही तो बढेगा नहीं/तेरा स्वाभिमान तुझको पुकारेगा नहीं/तू अपना
अधिकार मांगेगा नहीं। तू खुद को पहचानेगा नहीं/ पीढियों का गुनहगार बनेगा/समाज में बदनुमा दाग रहेगा।
जम्हूराः (चिरोरी करते हुये) अरे उस्ताद गुस्सा क्यों होते हो ? मैं तो वैसेई बोल रहा
था। दरअसल मास्साब से डर लगता है। पढाई लगती बहुत कठिन है।
जदूगरः मगर राह नहीं कोई और मुमकिन है। सरकार अपनी असरदार है। आजादी
के बाद अपने जीवन में आई बहार है। सरकार ने अनपढ, पिछडो का दर्द पहचाना है। जो सदियो से शोषित रहे है, उन्हें उपर लाने का ठाना है और इसलिये आरक्षण का अपनाया बाना है।
जम्हूराः उस्ताद ये आरक्षण क्या होता है ? क्यों होता है ?
जादूगरः जम्हूरे तुम भी सुनों और पब्लिक के मेरे मेहरबान दोस्तों तुम भी सुनों- और
केवल सुनों नहीं, ध्यान से गुनो।
गीतकार मडली-
सदियों से पिछडे शोषित थे,
उनके बल पर ‘‘कुछ‘‘ पोषित थे।
पिछडो का अपमान घृणित है,
जाति-पाति विधान सृजित है।
शासन ने अब यह पहचाना,
दलितों को उपर है लाना।
इसीलिये आरक्षण मिलता,
जिस में प्रावधान यह होता।
सीट आपकी रक्षित होती
जम्हूराः (गीत को अचानक रोककर) पर, फिर भी, पढने की जरूरत होती।
अरे। पढोगे, लिखोगे तो दोगे जवाब।
अनपढ, रहोगे तो कोरी किताब।
जम्हूराः उस्ताद। मै समझ गया।
जादूगरः क्या समझा ?
जम्हूराः यही उस्ताद कि आरक्षण पाने के लिये पढना तो जरूरी है।
जादूगरः हां। इतना ही नहीं। पिछडे दलितों को अपने बूते पर खडे होना है आरक्षण
की बैसाखी तोड कर फेंक देना है।
जम्हूराः वाह उस्ताद। वाह।
जादूगरः जम्हूरे। ये जो पब्लिक है, इसमें उॅंचे है, छोटे है, गोरे है, मर्द है, ओैरत है,
बच्चे है, बच्चियां है- घेरे मे आगे की लाइन वाले हैं पीछे की लाइन वाले है पर इनमें एक समानता है- बता सकते हो ?
जम्हूराः बता सकता हॅू उस्ताद।
जादूगरः बताओ ।
जम्हूराः उस्ताद सबके बाल काले हैं।
(पब्लिक हंसती है)
जम्हूराः सिर खुजलाते हुये। उस्ताद। हम सब खाना खाते है, पानी पीते है।
(पब्लिक फिर हंसती है)
जादूगरः बेवकूफ।
जम्हूराः (पब्लिक को घूरते हुये घेरे का चक्कर लगाता है फिर कहता है) उस्ताद ये
सब हिन्दुस्तानी है।
जादूगरः हां। अब जम्हूरा थोडा-थोडा ट्रेक पर आ रहा है। हम सब हिन्दुस्तानी है।
हम सब इंसान है। हम सब का खून ‘‘लाल‘‘ है। हम सब एक है। अमीर हो या गरीब हममें कोई फर्क नहीं है।
जम्हूराः फर्क है उस्ताद।
जादूगरः क्या फर्क है ?
जम्हूराः कोई जूते का काम करता है, कोई स्वीपर का काम करता है, कोई आफिस
मे साहब है, कोई पूजा कराता है।
जादूगरः हां। तू सही कह रहा है। कोई कोई जूते का काम करता है पर जूते का
काम करने मे कोई छोटा, दलित या पिछडा नहीं होता। ‘‘बाटा‘‘ का, ‘‘लिबर्टी का, ‘‘फनिक्स‘‘ का किसका शेयर, शेयर बाजार मे लिस्टेड नहीं है ? स्टेशनों की सफाई के ठेके बडी-बडी कंपनियां लेती है, और उस कंपनी में अगडे-पिछडे सब कंधे से कंधा मिलाकर काम करते है अरें सफाई झाडू करती है, जात नहीं। जम्हूरे ‘‘वर्क इज वर्शिप‘‘ काम ही पूजा है, क्या समझा ?
जम्हूराः समझा-उस्ताद। अगर कोई जात-पात के आधार पर गाली दे तो ?
जादूगरः (नाटकीय आवाज में)
तो हरिजन थाना है।
कानून अपना है।
पर उसको यदि समझना है।
तो शिक्षा को अपनाना ही पडेगा।
बुदंल पार्शव स्वर- सुनो, सुनो, सुनो (मुनादी के अंदाज मे)
छुआछूत विरोधी कानून 1965 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को किसी खास
जाति मे पैदा होने के कारण उससे दूरी का व्यवहार किया जावे, तो उसे छुआछूत कहते है। सार्वजनिक कुंए, तालाब, सडक आदि के इस्तेमाल का हक हर जाति के लोगों को बराबरी से है। यदि कोई छुआछूत मानता है तो वह अपराध करता है। उसे एक साल की कैद व 500 रू. का जुर्माना हो सकता है। यहीं अपराध बार-बार करने पर सजा बढाई जा सकती है।
(ढोलक की थाप)
जादूगरः डा. भीमराव अंबेडकर ने कहा है-शिक्षित बनो। संगठित हो। संघर्ष करो।
यही प्रगति का मंत्र है।
जम्हूराः उस्ताद। तुम तो बहुत वजनदार बात बता रहे हो। बच्चा लोग जोरदार ताली बजाओ।
जादूगरः एक ओर वजनदार बात सुनो।
देश की आजादी में दलितो को उपर उठाने में, नारी सशक्तिकरण में, एक
नहीं अनेक प्रेरणा पुरूष पिछडे समाज से हो चुके है।
जम्हूराः कौन-कौन उस्ताद ?
जादूगरः शंबूक ऋषि- जिन्होनें वंशानुगत कार्य व्यवस्था का सर्वप्रथम विरोध किया।
(ढोलक की थाप)
- एकलब्वय जिसने अपनी लगन से धनुर्विद्या में महारत हासिल की ।
(ढोलक की थाप)
- नसिरूद्धीन खसुरो जो एक भंगी था और अपनी वीरता से वह सन् 1320
में भारत के सिंहासन तक पहुंचा।
(ढोलक की थाप)
- पन्ना धाय जिसने त्याग और बलिदान की अनुपम मिसाल पेश की अपने
बेटे चंदन का बलिदान कर राजकुमार उदय की जान बचाई।
(ढोलक की थाप)
- अमर शहीद ऊधमसिंग- जलियावाला बाग काण्ड का बदला लेने जनरल
डायर को लंदन में गोली मारी और फांसी के फंदे पर भारत माता की
जय कहते हुए झूल गए ।
(ढोलक की थाप)

- डा. भीमराव अंबेडकर, बाबू जगजीवन राम और न जाने कितने ऐसे प्रेरणा
स्त्रोत पथप्रदर्शको पर हमें गर्व है।
जम्हूराः इन महान प्रेरणा स्त्रोतों की शक्ति क्या थी।
जादूगरः यही शिक्षा। संगठन। और संघर्ष। आत्मबल। स्वाभिमान और सकारात्मक
सोच।
जम्हूराः उस्ताद। आज पब्लिक को इस बक्से की चाबी और बक्से में बंद जादू की
बात तो अपून ने बता दी, समझा दी। बात समझ भी आ रही है मगर बात बडी मोटी है। कुछ पांइट की बात बताओ।
जादूगरः मतलब शार्टकट मे। तो सुनो-
हमारे संविधान में इम सबको बराबरी के अधिकार दिये गए है। छुआछूत जुर्म
है। हमें अपने मतदान के अधिकार का जिम्मेदारी से उपयोग करना है।
(ढोलक की थाप)
हमें शिक्षा को अपनाना है अशिक्षा सबसे बडी बुराई है। शिक्षा से प्रगति के
नए-नए मार्ग खुलते हैं।
(ढोलक की थाप)
बाल मजदूरी पिछडे वर्ग की एक बडी कमी है। इसे रोकना है। बच्चो को पढाना है। बंधुआ मजदूरी से बचाना है।
(ढोलक की थाप)
बाल विवाह पिछडे वर्ग की प्रमुख कुरीति है। इससे जनसंख्या वृद्धि, कुपोषण, असमय मृत्यु जैसी कठिनाईयां उत्पन्न होती हैं, इसे रोकना है। महिलाओं को बराबरी से शिक्षा, बराबरी के अधिकार देना है।
(ढोलक की थाप)
नशा बंदी करनी है। शराब, गांजा, अफीम, तंबाखू का सेवन स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है इससे परिवार की आर्थिक हालत बिगड जाती है। नशे में बेकाबू इंसान हैवान बन जाता है। नशे से सबको बचाना है।
(ढोलक की थाप)
शासन की लाभकारी योजनाएं ढेरों है। पर उनका लाभ उठाना है। आत्मनिर्भर
बनना है।
(ढोलक की थाप)
जम्हूराः वाह। उस्ताद। वाह। ये हुई न बात। बच्चा लोग एक बार फिर से जोर से
ताली बजाओ। उस्ताद। जरा कल्याणकारी योजनाओं का खुलासा किया
जाए।
जादूगरः जम्हूरे। समस्त शासकीय योजनाओं में शासन स्वरोजगार, पिछडे वर्ग, के
पात्र उम्मीदवारों को प्राथमिकता देता है। जरूरत है लाभ उठाने की और लाभ जागरूकता से ही उठाया जा सकता है। जागरूकता शिक्षा से ही आती है। और ………….।
जम्हूराः और क्या उस्ताद।
जादूगरः और इतना ही नहीं गलती से कभी किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति का उत्पीडन कहीं हो जाये तो भी तुरंत राहत की अनेक योजनाएं अनुसूचित जाति विभाग ने बनाई है। हत्या, बलात्कार, मानसिक एवं शारीरिक आघात, अखाद्य पदार्थो के खाने या पीने से, महिला के लैंगिक शोषण से पानी गंदा करने, रास्ते के रूढि जन्य अधिकार से वंचित करने आदि हर स्थिति मे उत्पीडन पर जिलाधीश महोदय राहत की नगर राशि तुरंत स्वीकृत कर सकते है। हरिजन कल्याण थाना, स्थापित किये गये है।
(ढोलक की थाप)
जम्हूराः लेकिन हमें ऐसा समाज बनाना है ऐसा वातावरण बनाना है कि, ऐसे अपराध हों ही नहीं। आदर्श समदर्शी समाज बने ओर यह सब होगा शिक्षा के जादू से।
गीतकार मंडलीः (समवर स्वर में)
किताबें पढो, हक की खातिर लडो,
किताबों से रस्ते निकल आते है,
साथ लेके किताबों को जो चलते है,
उनके बिगडे हुए दिन संवर जाते है,
आज भी हैं जो सर झुकाए हुए,
उनको लाना है किताबों के संसार में,
उनकी दुनिया सचमुच बदल जाएगी,
गर किताबों के गले वो लग जाएगें।
जम्हूराः उस्ताद अब इस पेटी के भीतर का राज तो जनता को बता दो।
जादूगरः (एक काला कपडा पेटी के उपर डालता है और मुटठी में ताले की चाबी
लेकर पब्लिक से एक पढे लिखे बच्चे को बुलाता है और उससे मुट्ठी में फूंकने को कहता है)
आज हमने जनता को शिक्षा का मंत्र सिखाया है। और इस पढे लिखे बच्चे से इस ताले की चाबी मे शिक्षा का जादू फूंका है। तो लो शिक्षा का जादू देखो। (ताला खोलकर कपडा हटाता है और पेटी खोलकर प्रचार सामग्री, योजनाओं की जानकारी के फोल्डर कुछ स्वंय और कुछ जम्हूरे के हाथो जनता में बांटे जाते है)
(पेटी से एक जलता हुआ दीपक निकलता है)
(सभी कलाकार एक पंक्ति मे खडे होकर एक-एक कर अपना परिचय देते है)
जादूगरः यह ज्ञान दीप शिक्षा का जादू फैलायेगा। आज जनता ने समझ लिया हमें ।
सुना और समझा जादूगर सबका शुक्रिया अदा करता है। हमको रूपया पैसा कुछ नही चाहिये। बस एक वादा चाहिये-जो जहां है, वहीं कुछ ऐसा करेगा कि देश में कोई पिछडा नही रहेगा। सब बराबर होगें। कोई इज्जत की टोपी पहनेगा तो कोई टाई। पर कोई किसी की इज्जत की लंगोट नहीं खींचेगा, हम इतना सशक्त समाज बनायेंगे कि आरक्षण के पुतले जलायेंगे .क्यों मेरे भाई? जय हिन्द।

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