उसने अपनी प्रेमिका का हाथ अपने हाथों में ले अपनी खुशकिस्मती उसके नाम कर दी और उसकी बदकिस्मती को अपना जीवन बना लिया |
दिन महीनों में बीते -
प्रेमिका के जीवन में सच में खुशियों की आहट थी | वह अपनी खुशियाँ लुटाना चाहती थी अपने प्रेमी पर | लेकिन उसका प्रेमी उसकी बदकिस्मती को ले कहीं दूर चला गया था |
वर्षों बाद -
प्रेमिका और प्रेमी मिले तो प्रेमिका ने प्रेमी से उसके दूर जाने का कारण पूछा और प्रेमी ने कहा - " मुझे डर था कि यदि मैं तुम्हारे साथ रहा तो फिर से तुम्हारे जीवन में बद्किस्मातियाँ दस्तक न दे दें |मैं उन्हें लेकर दुनिया के ऐसे छोर पर छोड़ आना चाहता था जहां से वे तुम तक कभी न पहुँच पायें |"
प्रेमिका के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान फ़ैल गई और उसने कहा - " कोई किसी की किस्मत नहीं बदल सकता | मेरी बदकिस्मती मेरे साथ ही रही ...... तभी तो तुम मुझसे बिना कारण दूर चले गए | "

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