ब्रजेंद्रनाथ
यह कहानी कथ्य में बहुत सुन्दर है। घटनाओं का सहज वर्णन है। एक वयस्क विधवा को समाज में अपने काम के लिए कितना भटकना पड़ता है, कितनी बदनामियों से होकर गुजरना पड़ता है, इस उद्देश्य में अगर कथ्य को पुनर्भाषित किया जाता तो कहानी अपने उद्देश्य में सफल मानी जाती। परंतु ऐसा होता हुआ दीखता नहीं। कहानी कुछ लंबी खींच गयी है।
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