नीड़ में नीड़ का निर्माण

मधुर कुलश्रेष्ठ

नीड़ में नीड़ का निर्माण
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सारांश

ऑफिस से लौटा तो बेटी ने चहकते हुए कहा, ‘‘पापा दो लोग अपना प्लॉट देखने आए थे।’’ बेटे ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलाई, ‘‘हाँ पापा, दो लोग अपना प्लॉट देखने आए थे।’’ में चौंक गया, प्लॉट! कौन सा प्लॉट? मन शंका-कुशंकाओ में भटकने लगा। मेरा तो कोई प्लॉट ही नहीं है। ‘‘हाँ पापा, फुदक-फुदक कर देखा दो चिड़ियों ने। अपने पोर्च में फैली मनीप्लांट के बीच बनी तिकोनी जगह पर बैठ-बैठकर मजबूती देखी। सुरक्षित जगह देखी। शायद दोनां को पसंद आ गई हमारे पोर्च की जगह। दोनों ने खुश होते हुए कहा।’’
shilpi
👌👌👌👌
Anamika
हमारे घर में भी चिड़िया ने घोसला बनाया था उसमें 3 बच्चे थे जो बड़े होकर उड़ भी गये।
satish
कुलश्रेष्ठजी बहुत ही मधुर कहानी लिखी ऐसा संजीव चित्रण मानो सब कुछ हमारे सामने हो रहा हो
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नीलम मधुर
बहुत ही शानदार कहानी . मनुष्यों का मनोविज्ञान और पर्यावरण की चिंता , अच्छी विचारात्मक कहानी .
Umrao
सुन्दर व प्रेरक कहानी
santoshi
मस्त kahani
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