सियाह लहरें

कांता रॉय

सियाह लहरें
(4)
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सारांश

यह मेरा भ्रम था या .... नहीं , तो और क्या था ? लेकिन पनियाई आँखों में दर्द की लहर का सच, जो एकदम से उठते-उठते-से तुरंत शांत हो गई थी। असहाय-सा अपने मन को डूबता हुआ महसूस किया मैंने।
प्रेरणा
आदरणीया कांता जी, आपका लेखन पढकर लगता है, सामने से सब गुजर गया। बहुत सुंदर। हार्दिक बधाई आपको।
आशीष कुमार
सियाह लहरें चिंता की सियाह लहरें तिल तिल मारती हैं.
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कल्पना
बहुत बढ़िया | मुझे पसंद आयी आपकी ये कहानी |saadar
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Pawan
परिवार की धुरी को कुछ हो जाये तो सारी दुनिया लुटती सी दिखाई देती है, और जरा सी आहट भी कुशंकाऔ से भर देती है ।सियाह लहरें में कांता राय जी ने सजीव चित्रण किया है ।कहानी अंत तक पाठक को बांधे रखने में सक्षम है ।शुभकामनाएँ एवं बधाइयाँ ।
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